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बलरामपुर: बीज भंडारों की सूचना न मिलने पर आरटीआई कार्यकर्ता ने की प्रथम अपील

बलरामपुर में राजकीय कृषि बीज भंडारों से संबंधित जानकारी न मिलने पर अधिवक्ता ने मुख्य विकास अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील दायर की है।

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•संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
बलरामपुर: बीज भंडारों की सूचना न मिलने पर आरटीआई कार्यकर्ता ने की प्रथम अपील

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल

द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 25 सितंबर 2026

बलरामपुर जिले के राजकीय कृषि बीज भंडारों में कथित अनियमितताओं की आशंका के बीच, सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समयसीमा में उपलब्ध न कराए जाने पर अधिवक्ता महेंद्र कुमार तिवारी ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील दायर की है। यह कदम तब उठाया गया है जब जिले के छह विकासखंडों के जन सूचना अधिकारियों ने बीज वितरण रिकॉर्ड संबंधी जानकारी देने में विफलता दिखाई है।

लखनऊ हाई कोर्ट के अधिवक्ता महेंद्र कुमार तिवारी ने चार अगस्त 2026 को आरटीआई आवेदन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक के बलरामपुर, हरैया सतघरवा, उतरौला, श्रीदत्तगंज, रेहरा बाजार और गैड़ास बुजुर्ग विकासखंडों के राजकीय कृषि बीज भंडारों से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों की प्रमाणित छायाप्रतियां मांगी थीं। इन अभिलेखों में बीज स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, स्वीकृत अनुदान और बीज बिक्री का विस्तृत विवरण शामिल है। इसके अतिरिक्त, अधिवक्ता ने बीज वितरण के पात्रता मानकों और लाभान्वित किसानों की सूची का विवरण भी मांगा था।

सूचना उपलब्ध कराने में अधिकारियों की विफलता

अपीलकर्ता का कहना है कि आरटीआई आवेदन जमा करने के बाद, संबंधित जन सूचना अधिकारियों ने अधिनियम के तहत निर्धारित तीस दिन की समयसीमा के भीतर मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। समयसीमा बीत जाने के बावजूद कोई जवाब प्राप्त न होने पर, अधिवक्ता तिवारी ने अब मुख्य विकास अधिकारी, बलरामपुर के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत कर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

प्रथम अपील में क्या है मांग?

प्रथम अपील में यह अनुरोध किया गया है कि मांगी गई सूचनाएं जिस रूप में संबंधित कार्यालयों में उपलब्ध हैं, उसी रूप में उन्हें प्रमाणित छायाप्रति के तौर पर शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। अधिवक्ता के अनुसार, ये सूचनाएं सीधे तौर पर राजकीय कृषि बीज भंडारों में बीज की प्राप्ति, वितरण, किसानों को दिए गए लाभ और सरकारी सब्सिडी से जुड़ी हैं, जिनका सार्वजनिक हित में पारदर्शी होना आवश्यक है।

आरटीआई अधिनियम की धारा सात के तहत विहित समय-सीमा का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अपील दायर की गई है। अब प्रथम अपीलीय अधिकारी के स्तर पर होने वाली कार्रवाई और विभिन्न विकासखंडों से इन अभिलेखों के मिलान की स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यह मामला राजकीय बीज भंडारों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।