बलरामपुर अस्पताल का डिप्टी सीएम ने किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं पर जताई नाराजगी
बलरामपुर: उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने जिला मेमोरियल अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्हें कई खामियां मिलीं, जिस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 8 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार को बलरामपुर स्थित जिला मेमोरियल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल परिसर में व्याप्त कई खामियों को देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया कि अविलंब अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारा जाए। निरीक्षण के दौरान पैसा वसूली की शिकायतें भी सामने आईं, जिस पर उप मुख्यमंत्री ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
पूर्व निर्धारित सूचना के बावजूद अस्पताल की व्यवस्थाएं उनकी अपेक्षाओं के विपरीत पाई गईं। वार्डों में सीलन, अग्निशमन यंत्रों का ठीक से काम न करना, और बेड पर हाल ही में खरीदे गए नए चादरों का बिछा होना, इन सभी बातों पर उप मुख्यमंत्री ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी व्यवस्थाओं को समय रहते ठीक कर लिया जाए। जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
अस्पताल में मिली खामियां, डिप्टी सीएम सख्त
जिला मेमोरियल अस्पताल में पहुंचते ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सबसे पहले इमरजेंसी सेवा का जायजा लिया। उन्होंने मरीजों से सीधे बातचीत की और संबंधित अभिलेखों का अवलोकन किया। इमरजेंसी में लगे फायर सिलेंडर पर एक्सपायरी डेट अंकित न होने पर उन्होंने विशेष रूप से नाराजगी व्यक्त की। चिंताजनक बात यह थी कि जिस स्थान पर यह एक्सपायर्ड फायर सिलेंडर लगा था, उसी के ठीक नीचे एक मरीज भर्ती था। उपमंत्री ने तत्काल उस सिलेंडर को वहां से हटवाया।
इसके पश्चात, उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, शौचालयों और अन्य महत्वपूर्ण अनुभागों का बारीकी से निरीक्षण किया। यद्यपि, अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था से वह कुछ हद तक संतुष्ट नजर आए। इसके बावजूद, कमरों में सीलन, उपकरणों का खराब होना और उनके रखरखाव में बरती जा रही लापरवाही पर उन्होंने गंभीर असंतोष व्यक्त किया। वार्डों में दुकान से लाए गए नए चादर बिछाए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बेहतर होता यदि इन चादरों को धोने के बाद बिछाया जाता।
कमरों में सीलन और टपकती छतों की समस्या के बारे में पूछे जाने पर अस्पताल प्रशासन ने इसे पुरानी बिल्डिंग की समस्या बताया। इस पर डिप्टी सीएम ने कहा कि रोगी सहायता समिति के माध्यम से प्राप्त धन का उपयोग कर इन समस्याओं का समाधान किया जाए। उन्होंने बरसात के बाद एक विस्तृत स्टीमेट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, ताकि अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं को भी सुधारा जा सके। इस दौरान सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी, सीएमएस डॉ. हीरा लाल और क्वालिटी प्रबंधक डॉ. रुचि पाण्डेय ने उपमंत्री को अस्पताल की वर्तमान व्यवस्थाओं से अवगत कराया। सदर विधायक पल्टूराम ने भी उपमंत्री से अस्पताल की सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की मांग की।
रिक्त पदों को भरने का आश्वासन, सुविधाओं में सुधार पर जोर
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बलरामपुर को आकांक्षी जिला बताते हुए कहा कि यहां चिकित्सक, स्टाफ नर्स और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इन रिक्त पदों को भरा जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दवाओं की कोई कमी नहीं है, बल्कि सुविधाओं को बढ़ाने की अधिक आवश्यकता है। उन्होंने सीएमओ और अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग से ओपीडी सेवाओं का विस्तार करें।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जिले के सभी जिला अस्पतालों के साथ-साथ सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को पूरा किया जाएगा और वहां की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जाएगा।
पुराने वाहनों का होगा निस्तारण, अग्रिम प्रशिक्षण पर भी निर्देश
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश में, डिप्टी सीएम ने कहा कि सभी जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मौजूद जर्जर व पुराने वाहनों को कंडम घोषित कर दिया जाएगा। इन वाहनों के स्क्रैप का भी उचित निस्तारण कराया जाएगा, ताकि उनकी जगह पर नए वाहन उपलब्ध कराए जा सकें।
उन्होंने अस्पताल क्वालिटी प्रबंधक, डॉ. रुचि पाण्डेय, को निर्देश दिया कि सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को अग्निशमन यंत्रों के संचालन का प्रशिक्षण दिलाया जाए। यह प्रशिक्षण विपरीत परिस्थितियों में आग से निपटने में सहायक होगा। क्वालिटी प्रबंधक ने उपमंत्री को अवगत कराया कि यह प्रशिक्षण पहले ही दिया जा चुका है और भविष्य में भी इसे जारी रखा जाएगा।
जन औषधि केंद्रों पर दवाओं की बिक्री ईमानदारी से करने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि तराई क्षेत्र होने के कारण यहां सर्पदंश की घटनाएं अधिक होती हैं। ऐसे में, एंटी-स्नेक वेनम सहित अन्य आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं और उपकरणों की व्यवस्था को सुदृढ़ रखा जाए। इन सबके अतिरिक्त, उन्होंने कई अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी आवश्यक निर्देश दिए।
