बालाघाट में बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बालाघाट में 27 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौतों पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार और प्रशासन से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा कि क्या कार्रवाई के लिए इतने बच्चों की मौत का इंतजार था।

द क्लिफ न्यूज़ | जबलपुर | 10 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की लगातार हो रही मौतों के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन के प्रति सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के लिए इतने बच्चों की मृत्यु का इंतजार था। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, जून माह से अब तक 27 से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टें यह संख्या 30 के पार जाने का संकेत देती हैं।
इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता ने प्रभावित गांवों का विस्तृत ग्राउंड सर्वे कर उसकी रिपोर्ट और वीडियो साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों में प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, पोषण, स्वच्छता, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की दयनीय स्थिति उजागर हुई है। कुछ स्थानों पर हैंडपंप से निकलने वाले पीले दूषित पानी और लोगों के लिए पर्याप्त पौष्टिक भोजन की अनुपलब्धता का भी उल्लेख किया गया है।
स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली और सरकारी जवाबदेही
हाईकोर्ट की यह सख्ती ऐसे समय में सामने आई है जब बालाघाट के बिरसा क्षेत्र में बीमारी से पीड़ित बच्चों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। पहले सरकारी स्तर पर घर-घर स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई थी, और स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में बच्चों की जांच कर रही थीं।
बच्चों की बीमारियों के सटीक कारणों का पता लगाने में भी अभी तक पूरी तरह स्पष्टता नहीं आ सकी है। केंद्र सरकार द्वारा की गई हालिया जांच में किसी एक विशेष रोगजनक को मौतों का एकमात्र कारण नहीं पाया गया। विभिन्न रिपोर्टों में मीजल्स, मलेरिया, सह-संक्रमण, श्वसन संबंधी समस्याएं, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसी कई जटिल चिकित्सकीय स्थितियों को मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
बालाघाट के प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की लचर स्थिति पहले भी उजागर हो चुकी है। अगस्त माह के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित गांवों में सैकड़ों मरीजों की पहचान की गई थी और बड़ी संख्या में बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी जांच शुरू की थी, जिसमें स्वास्थ्य, मलेरिया, महिला एवं बाल विकास तथा पेयजल से संबंधित विभागों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
वर्तमान में, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट कलेक्टर तथा अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की गई है। अदालत की इस कार्रवाई ने दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी संकट की समय पर पहचान न हो पाने और प्रभावी हस्तक्षेप में हुई देरी पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
