बैंकों की मनमानी के खिलाफ इटावा के व्यापारियों का प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन
इटावा में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने बैंकों की कथित मनमानी के खिलाफ प्रदर्शन कर वित्त मंत्री को आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। मांगों में सातों...

इटावा | संवाददाता: मनोज कुमार
द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 28 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश के इटावा में बुधवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने बैंकों द्वारा कथित तौर पर की जा रही मनमानी और व्यापारियों के उत्पीड़न के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल के आह्वान पर जिला मुख्यालय पर जुटे व्यापारियों ने जिला अध्यक्ष आलोक दीक्षित के नेतृत्व में अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र बहादुर के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री को एक आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों का आरोप है कि मौजूदा बैंकिंग नीतियां उनके व्यापारिक लेनदेन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न कर रही हैं, जिससे उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इस प्रदर्शन के दौरान, व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि बैंकों में साप्ताहिक अवकाश के कारण उनके व्यापारिक कार्य प्रभावित होते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए, उन्होंने एक प्रमुख मांग के रूप में सभी सरकारी बैंकों को सप्ताह के सातों दिन खुला रखने का प्रस्ताव दिया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बचत खातों पर मिलने वाले अत्यंत कम ब्याज और चालू खातों पर किसी भी प्रकार का ब्याज न मिलने की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। इस संदर्भ में, व्यापारियों ने मिनिमम बैलेंस के नाम पर ग्राहकों से काटे जाने वाले शुल्क को पूरी तरह समाप्त करने की जोरदार मांग की है, जिसे वे अनुचित मानते हैं।
चेक बाउंस और शुल्क वसूली पर उठाए सवाल
व्यापारियों ने चेक बाउंस होने की स्थिति में भुगतान प्राप्त करने वाले व्यापारी पर दंड लगाने की वर्तमान प्रक्रिया को भी अनुचित बताया है। उनका तर्क है कि ऐसी स्थिति में दंड केवल चेक जारी करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध ही लागू किया जाना चाहिए, न कि भुगतान प्राप्त करने वाले के विरुद्ध। यह मांग व्यापारियों के बीच भुगतान संबंधी विवादों के निपटारे की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से उठाई गई है।
नगद लेनदेन पर लगाए जा रहे कैश हैंडलिंग चार्ज को व्यापारियों ने अपने व्यवसाय पर एक अनावश्यक आर्थिक बोझ करार दिया है। उनका कहना है कि नियमित और अपेक्षित लेनदेन करने के बावजूद, बैंक विभिन्न प्रकार के शुल्क वसूल रहे हैं, जो उनके व्यवसाय के लिए नुकसानदायक साबित हो रहे हैं। इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए, उन्होंने इन शुल्कों को तत्काल हटाने की मांग की है, ताकि छोटे और मध्यम व्यवसाय अपने परिचालन को सुचारू रूप से जारी रख सकें।
लोन नवीनीकरण, एनपीए और के.वाई.सी. पर महत्वपूर्ण सुझाव
व्यापारियों ने अपनी मांगों में लोन और लिमिट खातों के नवीनीकरण तथा संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन के नाम पर बैंकों द्वारा ली जा रही राशि पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया है। यह मांग विशेष रूप से उन व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण है जो बार-बार होने वाले इन मूल्यांकनों और नवीनीकरण प्रक्रियाओं से परेशान हैं। इसके साथ ही, उन्होंने लोन खातों को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित करने की वर्तमान तीन महीने की अवधि को बढ़ाकर छह महीने करने का सुझाव दिया है। इस बदलाव से व्यापारियों को वित्तीय दबाव से उबरने और अपने खातों को नियमित करने के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
के.वाई.सी. (अपने ग्राहक को जानें) अपडेट के नाम पर खाताधारकों को बार-बार बैंक बुलाकर परेशान करने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया। व्यापारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में लगने वाले समय और बार-बार की जाने वाली भाग-दौड़ से उनका व्यवसायिक समय बर्बाद होता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि के.वाई.सी. की अवधि को वर्तमान एक वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष किया जाए, ताकि इस प्रक्रिया को अधिक सुगम और समय-कुशल बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, अकाउंट मेंटेनेंस चार्ज को भी समाप्त करने की वकालत की गई है, जिसे व्यापारियों ने अनावश्यक व्यय माना है।
प्रशासन ने ज्ञापन को उच्च स्तर तक भेजने का आश्वासन
इस प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान, जिला उपाध्यक्ष अशोक जाटव, हाजी हन्नान मंसूरी, जिला उपाध्यक्ष मनोज कठेरिया, शहर अध्यक्ष सोनू अग्रवाल सहित दर्जनों पदाधिकारी और स्थानीय व्यापारी नेता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में बैंकिंग प्रणाली में सुधार और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। जिला प्रशासन ने व्यापारियों को आश्वासन दिया है कि उनके द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तर तक भेजा जाएगा और इस पर उचित कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा।
