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बहादुरपुर में श्रद्धापूर्वक मनाई गई गोगा नवमी, भक्तों ने की नागदेवता की पूजा

सैफई के बहादुरपुर में गोगाजी मंदिर में शनिवार को गोगा नवमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। हवन-पूजन और भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालुओं ने जाहरवीर गोगाजी महाराज के जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।

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संवाददाता: सुघर सिंह
बहादुरपुर में श्रद्धापूर्वक मनाई गई गोगा नवमी, भक्तों ने की नागदेवता की पूजा

संवाददाता: सुघर सिंह

द क्लिफ न्यूज़ | बहादुरपुर | 6 सितंबर 2026

सैफई के निकट बहादुरपुर स्थित गोगाजी मंदिर में शनिवार को गोगा नवमी का पर्व पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह हवन-पूजन से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला देर रात तक चला, जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। महिलाओं ने जाहरवीर गोगाजी महाराज के भजनों का गुणगान करते हुए उनके जन्मोत्सव को हर्षोल्लास से मनाया।

गोगा नवमी का पर्व राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता जाहरवीर गोगाजी महाराज के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। लोकमान्यता के अनुसार, गोगाजी को सर्पों का देवता माना जाता है और उनकी आराधना से सर्पदंश का भय दूर होता है। इसी मान्यता के चलते इस पर्व पर नागदेवता और बांबी (सांपों के बिल) की भी विशेष पूजा की जाती है। श्रद्धालु पूजा स्थल से प्राप्त मिट्टी को घर में रखकर सर्पभय से मुक्ति की कामना करते हैं। यह पर्व न केवल राजस्थान में, बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। इस पर्व के साथ हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की आस्था गहराई से जुड़ी हुई है।

धार्मिक अनुष्ठान और मान्यताएं

बहादुरपुर में गोगा नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने मिट्टी की बनी गोगाजी की मूर्तियों और नीले घोड़े पर सवार उनके चित्रों का रोली, चावल, पुष्प और गंगाजल से पूजन किया। इस दौरान खीर, चूरमा और गुलगुले का भोग लगाया गया। विशेष रूप से, नीले घोड़े को चने की दाल अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने गोगाजी की कथा का श्रवण किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि व नागदेवता की कृपा बनाए रखने के लिए प्रार्थना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोगाजी का जन्म गुरु गोरखनाथ के वरदान से हुआ था। कहा जाता है कि निसंतान रानी बाछल देवी की भक्ति से प्रसन्न होकर गुरु गोरखनाथ ने उन्हें एक अभिमंत्रित गूगल फल प्रदान किया था, जिसके प्रसाद से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। इस कथा का श्रवण पर्व के महत्व को और अधिक बढ़ाता है।

स्थानीय भागीदारी

इस अवसर पर बहादुरपुर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में सुघर सिंह पत्रकार, नितुल प्रताप यादव, सुरेंद्र यादव, वीपी सिंह यादव पत्रकार, पिंकू यादव सहित अनेक भक्तों ने जाहरवीर मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना की और पर्व की खुशियों में भाग लिया। पर्व के उत्साह ने स्थानीय समुदाय को एक साथ जोड़ा और पारंपरिक धार्मिक आस्थाओं को सुदृढ़ किया।