बाढ़ के खतरे के बीच बीलगड़ा में केवट-मल्लाह परिवारों को मिली राहत
महात्मा गांधी सेवा आश्रम ने बारिश से प्रभावित बीलगड़ा गांव के केवट-मल्लाह समुदाय को त्रिपाल और अन्य राहत सामग्री वितरित की।

द क्लिफ न्यूज़ | मुरैना | 23 अगस्त 2026
चंबल नदी के किनारे बसे बीलगड़ा गांव में लगातार हो रही बारिश के कारण उत्पन्न हुए संकट के बीच, महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा के कार्यकर्ताओं ने रविवार, 23 अगस्त को जरूरतमंद केवट-मल्लाह परिवारों के बीच पहुंचकर उन्हें राहत सामग्री वितरित की। शुभकाम वेंचर्स, मुंबई के सहयोग से प्राप्त टिकाऊ त्रिपाल की बड़ी चादरें उन परिवारों को सौंपी गईं, ताकि वे इस बरसाती मौसम में अपने घरों और पशुधन को सुरक्षित रख सकें। यह सेवा अभियान, जो गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित है, समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
दुर्गम रास्तों और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के बावजूद आश्रम के कार्यकर्ताओं का गांव तक पहुंचना, उनके सेवा-समर्पण का एक उल्लेखनीय उदाहरण रहा। महात्मा गांधी सेवा आश्रम के अध्यक्ष और विख्यात गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राजागोपाल पी.वी. के मार्गदर्शन में चल रहे इस सेवा अभियान के तहत, कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों के साथ एक बैठक भी की। इस बैठक में उनकी समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से सुना गया और राहत सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ समुदाय की आजीविका, आवास, पुनर्वास, पेयजल, रोजगार और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद किया गया।
राहत के साथ आजीविका और अधिकारों पर जोर
महात्मा गांधी सेवा आश्रम के सचिव दिलीप जैन ने इस अवसर पर कहा कि आश्रम का उद्देश्य केवल संकट की घड़ी में तात्कालिक राहत पहुंचाना नहीं है, बल्कि जरूरतमंद और वंचित परिवारों के साथ खड़े होकर उनकी मूलभूत समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में निरंतर प्रयास करना है। उन्होंने बताया कि डॉ. राजागोपाल पी.वी. के नेतृत्व में आश्रम केवट-मल्लाह समुदाय की आजीविका, रोजगार, सुरक्षित पुनर्वास, भूमि, आवास, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी विभिन्न समस्याओं को लेकर लगातार जनसंवाद और प्रयास कर रहा है।
दिलीप जैन ने यह भी रेखांकित किया कि चंबल नदी और घड़ियाल संरक्षण पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ उन परिवारों की आजीविका और जीवन-सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है, जिनकी पीढ़ियों पुरानी नदी आधारित आजीविका संरक्षण संबंधी व्यवस्थाओं से प्रभावित हुई है। आश्रम इसी संतुलित दृष्टिकोण के साथ प्रभावित परिवारों की समस्याओं को शासन-प्रशासन के समक्ष उठाता रहा है।
सेवा अभियान का दूसरा चरण, भविष्य की योजनाएं
महात्मा गांधी सेवा आश्रम के संयुक्त सचिव प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने बताया कि बीलगड़ा में आयोजित यह बैठक केवट-मल्लाह समुदाय के बीच आश्रम के सेवा अभियान का दूसरा चरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेवा का यह सिलसिला बीलगड़ा तक सीमित नहीं रहेगा। चंबल नदी किनारे बसे केवट-मल्लाह समुदाय के अन्य गांवों और मजरों तक भी आश्रम के कार्यकर्ता पहुंचेंगे। वहां लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं को समझा जाएगा और आवश्यकता के अनुसार राहत, सेवा और जनसरोकार से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने गांधीवादी सेवा की मूल भावना को समझाते हुए कहा कि इसका अर्थ है समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचकर उसके दुख-दर्द को समझना और समाधान की यात्रा में उसका सहभागी बनना।
बरसात में चुनौतियां और पारंपरिक रोजगार का संकट
बीलगड़ा, मल्लपुरा पंचायत क्षेत्र, ब्रिजगढ़ी और कोडेरा पंचायत के झुंडपुरा सहित चंबल किनारे बसे अनेक गांवों और मजरों में बड़ी संख्या में केवट-मल्लाह परिवार निवास करते हैं। बरसात के मौसम में इन बस्तियों के रास्ते कीचड़ और गंदे पानी से भर जाने के कारण आवागमन अत्यंत कठिन हो जाता है। नदी किनारे रहने वाले परिवारों के लिए अतिवृष्टि और बाढ़ के दौरान घरों के साथ-साथ पशुधन को सुरक्षित रखना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में टिकाऊ त्रिपाल की चादरें उपलब्ध कराना इन परिवारों के लिए तत्काल राहत का एक महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ है।
इसके अतिरिक्त, चंबल नदी में घड़ियाल संरक्षण व्यवस्था लागू होने तथा रेत उत्खनन पर रोक के बाद मछली पकड़ने सहित कई पारंपरिक रोजगार भी प्रभावित हुए हैं। इस स्थिति के परिणामस्वरूप अनेक परिवारों के सामने रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे कुछ परिवार पलायन के लिए विवश हो गए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए, महात्मा गांधी सेवा आश्रम केवल तात्कालिक राहत तक सीमित न रहकर आजीविका संरक्षण, रोजगार, सुरक्षित पुनर्वास, भूमि, आवास, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मूलभूत प्रश्नों के समाधान के लिए भी निरंतर प्रयासरत है।
अधिकारों के साथ सम्मानजनक जीवन का संकल्प
बैठक में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वंचित समुदायों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। केवट-मल्लाह समुदाय के चहुंमुखी विकास और उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए महात्मा गांधी सेवा आश्रम सेवा, संवाद और जनसहभागिता के माध्यम से अपना प्रयास निरंतर जारी रखेगा। बीलगड़ा की यह पहल इस बात का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है कि सच्ची गांधीवादी सेवा केवल सहायता बांटने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह जरूरतमंदों के बीच पहुंचकर उनकी पीड़ा को समझती है, उनके अधिकारों की आवाज बनती है और समाधान की राह में उनके साथ खड़ी होती है।
महात्मा गांधी सेवा आश्रम के पदाधिकारियों ने बताया कि बीलगड़ा से प्रारंभ हुआ सेवा अभियान आगे चंबल किनारे बसे अन्य केवट-मल्लाह गांवों और मजरों तक पहुंचेगा, जहां कार्यकर्ता समुदाय के बीच जाकर “सेवा, संवाद और समाधान” की इसी भावना को आगे बढ़ाएंगे।
