बच्चों में कूल्हे का दर्द और लंगड़ापन: संक्रमण के जोखिम की अनदेखी न करें
बच्चों में अचानक कूल्हे में दर्द और लंगड़ाकर चलना चिंता का विषय हो सकता है। ट्रांजिएंट साइनोवाइटिस सामान्य है, पर गंभीर संक्रमण सेप्टिक आर्थराइटिस की अनदेखी घातक हो सकती है।

द क्लिफ न्यूज़ | 21 अगस्त 2026
बच्चों में अचानक कूल्हे में दर्द के साथ लंगड़ाकर चलना अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। यह स्थिति विभिन्न कारणों से उत्पन्न हो सकती है, जिनमें सबसे आम 'ट्रांजिएंट साइनोवाइटिस' है, जिसे 'इरिटेबल हिप' के नाम से भी जाना जाता है। यह विशेष रूप से 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों में अधिक देखी जाती है। इस स्थिति में कूल्हे के जोड़ की अंदरूनी परत, जिसे साइनोवियम कहा जाता है, में अस्थायी सूजन आ जाती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रांजिएंट साइनोवाइटिस आमतौर पर किसी संक्रमण के कारण नहीं होती और अधिकांश मामलों में कुछ ही समय के भीतर स्वतः ठीक हो जाती है।
हालांकि, डॉक्टर इस बात पर जोर देते हैं कि लंगड़ाने की समस्या के हर मामले में ट्रांजिएंट साइनोवाइटिस को एकमात्र कारण मानकर आगे की जांच को स्थगित नहीं करना चाहिए। तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता सबसे गंभीर संभावित बीमारी, 'सेप्टिक आर्थराइटिस', की पहचान और उसे खारिज करने पर होना चाहिए। सेप्टिक आर्थराइटिस कूल्हे के जोड़ का एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है। यदि इसका समय पर निदान और उपचार न किया जाए, तो यह जोड़ को तेजी से और स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
लक्षणों में भिन्नता: सामान्य से गंभीर तक
ट्रांजिएंट साइनोवाइटिस से पीड़ित बच्चा अचानक कूल्हे में दर्द की शिकायत कर सकता है और चलते समय लंगड़ाने लगता है। ऐसे बच्चे अक्सर दर्द वाले पैर पर वजन डालने से बचते हैं। दर्द सिर्फ कूल्हे तक सीमित न रहकर जांघ, ग्रोइन (जांघों के बीच का ऊपरी हिस्सा) या घुटने तक फैल सकता है। आमतौर पर इस स्थिति में तेज बुखार नहीं होता, हालांकि कुछ बच्चों में हल्का बुखार महसूस किया जा सकता है। कूल्हे की गतिविधियों में भी सीमा आ जाती है, खासकर पैर को अंदर की ओर घुमाने (internal rotation) और बाहर की ओर फैलाने (external rotation) में परेशानी होती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि कई बार ऐसे लक्षणों से एक से तीन सप्ताह पहले बच्चे को सर्दी-जुकाम या ऊपरी श्वसन तंत्र का कोई वायरल संक्रमण हो चुका होता है।
इसके विपरीत, सेप्टिक आर्थराइटिस में बच्चा अक्सर गंभीर रूप से बीमार दिखाई देता है। तेज बुखार (38.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर), प्रभावित पैर पर बिल्कुल वजन न डाल पाना, और सामान्य स्वास्थ्य का अचानक बिगड़ना इसके मुख्य संकेत हैं। रक्त जांचों में श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या में वृद्धि, सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) और एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट (ESR) का काफी बढ़ जाना संक्रमण की ओर स्पष्ट संकेत करता है। जबकि ट्रांजिएंट साइनोवाइटिस में ये जांचें सामान्य या मामूली रूप से बढ़ी हुई हो सकती हैं।
निदान प्रक्रिया: सावधानी और सटीकता
सेप्टिक आर्थराइटिस की संभावना का आकलन करने के लिए 'कोचर क्राइटेरिया' का उपयोग किया जाता है। इनमें 38.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक बुखार, प्रभावित पैर पर वजन न डाल पाना, ESR का 40 mm/hr से अधिक होना और WBC का 12,000/mm³ से अधिक होना शामिल है। आधुनिक चिकित्सा में CRP को भी एक महत्वपूर्ण संकेतक माना गया है। हालांकि, इन मानकों को बच्चे की संपूर्ण क्लिनिकल स्थिति के साथ मिलाकर ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जाता है।
शुरुआती जांच के तौर पर एपी पेल्विस एक्स-रे किया जा सकता है। यह अक्सर सामान्य होता है, लेकिन फ्रैक्चर, पर्थेस रोग (Legg-Calve-Perthes disease) और अन्य हड्डी संबंधी समस्याओं की पहचान में सहायक हो सकता है। अल्ट्रासाउंड कूल्हे के जोड़ में तरल पदार्थ (एफ्यूजन) की उपस्थिति का पता लगाने में मदद कर सकता है, लेकिन केवल तरल पदार्थ की मौजूदगी से ट्रांजिएंट साइनोवाइटिस और सेप्टिक आर्थराइटिस के बीच निश्चित अंतर करना संभव नहीं होता।
यदि संक्रमण का संदेह होता है, तो CBC, ESR और CRP जैसी रक्त जांचें अत्यंत उपयोगी साबित होती हैं। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, बार-बार वापस आते हैं, या निदान स्पष्ट नहीं हो पाता है, तो मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) की आवश्यकता पड़ सकती है। सेप्टिक आर्थराइटिस का पर्याप्त संदेह होने पर, कूल्हे के जोड़ से सीधे तरल पदार्थ निकालकर उसकी जांच (हिप जॉइंट एस्पिरेशन) की जाती है।
उपचार और आगे की निगरानी
यदि बच्चा चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ प्रतीत होता है और सेप्टिक आर्थराइटिस की संभावना को पर्याप्त रूप से खारिज कर दिया गया है, तो ट्रांजिएंट साइनोवाइटिस का उपचार मुख्य रूप से आराम, गतिविधियों में कमी और दर्द निवारक दवाइयों, जैसे कि इबुप्रोफेन (NSAID), के साथ किया जाता है। बच्चे की स्थिति की नियमित निगरानी और समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। अधिकांश मामलों में, दर्द और लंगड़ापन 24 से 72 घंटे के भीतर कम होने लगता है, और कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों के भीतर बच्चा पूरी तरह सामान्य हो जाता है।
हालांकि, कुछ स्थितियां ऐसी हैं जिनमें तत्काल विशेषज्ञ की सलाह लेना अनिवार्य है। यदि बच्चे को तेज बुखार हो, अत्यधिक दर्द हो, वह प्रभावित पैर पर बिल्कुल भी वजन न डाल पा रहा हो, CRP या ESR का स्तर काफी बढ़ा हुआ हो, या बच्चा असामान्य रूप से अस्वस्थ दिखाई दे, तो अविलंब बाल रोग विशेषज्ञ या ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क किया जाना चाहिए।
अन्य संभावित कारण
यदि कूल्हे का दर्द या लंगड़ापन लगातार बना रहता है या बार-बार होता है, तो अन्य गंभीर स्थितियों की जांच आवश्यक हो जाती है। इनमें पर्थेस रोग (बच्चों में कूल्हे के ऊपरी हिस्से की हड्डी का रक्त प्रवाह बाधित होने से होने वाली बीमारी), किशोर इडियोपैथिक आर्थराइटिस (बच्चों में होने वाला गठिया), ऑस्टियोमाइलाइटिस (हड्डी का संक्रमण), छिपे हुए फ्रैक्चर, और किशोरों में स्लिप्ड कैपिटल फेमोरल एपिफिसिस (SCFE) जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। इसलिए, केवल कूल्हे में तरल पदार्थ की उपस्थिति के आधार पर ट्रांजिएंट साइनोवाइटिस का निदान करना पर्याप्त नहीं है। लंगड़ाकर चलने वाले प्रत्येक बच्चे में, चिकित्सकीय संकेतों और जांचों के अनुसार, सेप्टिक आर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारियों को गंभीरता से विचार कर समय पर खारिज करना सबसे महत्वपूर्ण है।
