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बाबा रामदेव की चेतावनी: सुधरें सरकारी व्यवस्थाएं, वरना आंदोलन होगा

स्वतंत्रता दिवस पर ईटीवी भारत से बातचीत में योगगुरु बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने व्यवस्था में सुधार की मांग की, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी।

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बाबा रामदेव की चेतावनी: सुधरें सरकारी व्यवस्थाएं, वरना आंदोलन होगा

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 अगस्त 2026

योगगुरु बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सरकारी व्यवस्थाओं में कथित खामियों, विशेषकर सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को लेकर तीखी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार को चेताया है कि यदि समय रहते इन गंभीर मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो उन्हें एक बार फिर आंदोलन का मार्ग अपनाना पड़ सकता है। ईटीवी भारत के साथ एक विशेष बातचीत में, बाबा रामदेव ने जोर देकर कहा कि देश के युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था मिलने का अधिकार है।

बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इन महत्वपूर्ण मामलों में किसी भी प्रकार की धांधली या अनियमितता स्वीकार्य नहीं है। भर्ती और साक्षात्कार प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने व्यवस्था में अधिक से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि केवल मेहनत और योग्यता के आधार पर ही युवाओं को अवसर मिलना चाहिए, न कि किसी भी प्रकार के अपारंपरिक साधनों से।

सरकारी भर्ती में भ्रष्टाचार पर उठाए सवाल

योगगुरु ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता होती है, तो इसका सीधा और गहरा नकारात्मक प्रभाव लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है। यह न केवल उनके व्यक्तिगत सपनों को तोड़ता है, बल्कि युवाओं के बीच व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कम करता है।

पेपर लीक की घटनाओं को एक अत्यंत गंभीर विषय बताते हुए, बाबा रामदेव ने परीक्षा व्यवस्था को इतना मजबूत बनाने की वकालत की कि मेहनती और योग्य विद्यार्थियों के साथ कोई अन्याय न हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं में सरकार और व्यवस्था के प्रति विश्वास बनाए रखना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है। एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए युवाओं का विश्वास अटूट होना आवश्यक है।

शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर चिंता

सरकारी नीतियों पर अपनी बात रखते हुए, बाबा रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश भर के कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, साथ ही पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी बना हुआ है। उनके अनुसार, एक मजबूत राष्ट्र की नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से ही तैयार होती है।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में केवल इमारतों के निर्माण और योजनाओं के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, स्कूलों में पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक, बेहतर शैक्षणिक संसाधन और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रत्येक बच्चे का अधिकार है और राष्ट्र निर्माण के लिए इसका सर्वोपरि महत्व है।

सुधार न होने पर आंदोलन की चेतावनी

बाबा रामदेव ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि व्यवस्था में समय रहते सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात का संकेत दिया कि यदि भ्रष्टाचार, भर्ती में अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ, तो उन्हें जनहित में पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके प्रस्तावित आंदोलन का उद्देश्य किसी भी व्यवस्था को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसमें सुधार लाना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जवाबदेही तय करना होगा। उन्होंने सरकार से जनता और युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनके समाधान की दिशा में ठोस, प्रभावी कदम उठाने की अपील की।

सत्ता पक्ष और विपक्ष को नसीहत

अपनी बातचीत के दौरान, बाबा रामदेव ने देश के वर्तमान राजनीतिक माहौल पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इस विरोध को कभी भी आपसी नफरत या वैमनस्य में नहीं बदलना चाहिए।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से देशहित को सर्वोपरि प्राथमिकता देने और समाज में बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण तथा आपसी घृणा के माहौल से बचने की सलाह दी। उनके विचार में, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी-अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं, और लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी मजबूत हो सकती है जब राजनीतिक मतभेदों के बावजूद निरंतर संवाद और आपसी सम्मान कायम रहे।

युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए गए अपने बयान में, बाबा रामदेव के निशाने पर मुख्य रूप से युवा, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे रहे। उन्होंने कहा कि आज का युवा प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों के लिए वर्षों तक अथक परिश्रम करता है। ऐसे में, यदि भर्ती प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होती है, तो यह उनके विश्वास को गहरा आघात पहुंचाती है।

बाबा रामदेव के इस बयान ने एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, पेपर लीक पर प्रभावी रोक, सरकारी स्कूलों की अव्यवस्था और राजनीतिक संवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन गंभीर चिंताओं पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है और व्यवस्था में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।