अयोध्या से सरयू जल लेकर महाकाल नगरी से निकलेगा रामभक्तों का दल
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को उज्जैन से अयोध्या के लिए पदयात्रा शुरू करेंगे, जिसमें सरयू नदी का जल कलश में...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 6 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में 20 अक्टूबर को महाकाल की नगरी उज्जैन से अयोध्या के लिए एक महत्वपूर्ण पदयात्रा का शुभारंभ होने जा रहा है। इस यात्रा की तैयारियों के बीच, श्रद्धालुओं ने अयोध्या पहुंचकर पवित्र सरयू नदी का जल कलशों में भरकर यात्रा का एक विशेष आध्यात्मिक पहलू जोड़ा है। यह सरयू जल कलश, आस्था और श्रद्धा के प्रतीक के रूप में, रामलला की जन्मभूमि अयोध्या तक की पूरी पदयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ रहेगा।
अयोध्या के प्रतिष्ठित संतों ने देशभर के सनातनी धर्मप्रेमी बंधुओं, राम भक्तों और शिव भक्तों से इस पदयात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया है। संतों के अनुसार, यह यात्रा सनातन परंपरा, आस्था और श्रद्धा को जोड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि व्यापक जनभागीदारी से यह धार्मिक यात्रा और भी गौरवशाली और स्मरणीय बनेगी।
धार्मिक यात्रा का महत्व और तैयारी
यह पदयात्रा, जो आगामी 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व के शुभ अवसर पर आरंभ होगी, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयोजन समिति के अनुसार, यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के प्रति अटूट निष्ठा और समर्पण की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। आयोजकों का मानना है कि यह एक बड़ी धार्मिक पहल है, जिसमें आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। पदयात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के उत्साह को देखते हुए, यात्रा को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
यह आयोजन, जिसमें अयोध्या के संतों का आशीर्वाद भी शामिल है, सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा। सरयू जल को कलशों में भरकर यात्रा के साथ ले जाने का यह कदम, नदी की पवित्रता और भगवान राम से उसके जुड़ाव को दर्शाता है। यह पवित्र जल न केवल यात्रा के दौरान ऊर्जा का स्रोत बनेगा, बल्कि यह विभिन्न समुदायों को एक साथ लाने का भी काम करेगा, जो सनातन धर्म के मूल्यों को साझा करते हैं।
पदयात्रा की शुरुआत उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से होगी, जो स्वयं भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह संगम, शिव और राम दोनों के भक्तों को एक साथ लाता है, और यात्रा को और भी पवित्र बनाता है। दिग्विजय सिंह, जिन्होंने पहले भी इस प्रकार की यात्राओं का नेतृत्व किया है, इस बार भी यात्रा की अगुवाई करेंगे। उनकी भागीदारी ने यात्रा को एक राजनीतिक और सामाजिक आयाम भी प्रदान किया है, जो व्यापक जन समर्थन को आकर्षित करने की उम्मीद है।
आयोजन समिति ने यह भी बताया कि यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले छोटे-बड़े शहरों और गांवों में स्थानीय समुदायों ने भी उत्साह दिखाया है। वे यात्रा के स्वागत और श्रद्धालुओं के ठहराव की व्यवस्थाओं में सहयोग करने के लिए तत्पर हैं। यह सामूहिक प्रयास यात्रा को न केवल सफल बनाने में सहायक होगा, बल्कि यह देश भर में सांप्रदायिक सद्भाव और एकता का संदेश भी फैलाएगा।
विभिन्न पड़ावों पर होने वाले प्रवचन, भजन संध्याएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम यात्रा के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को और बढ़ाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को न केवल शारीरिक रूप से यात्रा करने के लिए प्रेरित करना है, बल्कि उन्हें सनातन धर्म की समृद्ध विरासत से भी जोड़ना है। सरयू जल से भरी कलश यात्रा, अपने आप में एक चलती-फिरती पवित्रता का प्रतीक है, जो राम की नगरी तक की यात्रा के हर कदम में आस्था को जीवंत रखेगी।
