अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सीलिंग ठप, भोपाल रहवासी लामबंद
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने का नगर निगम का दावा विफल रहा। 10 दिन के नोटिस के बाद भी कार्रवाई न होने से रहवासियों में आक्रोश है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 30 जुलाई 2026
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई का दावा गुरुवार को हवा-हवाई साबित हुआ। नगर निगम ने 10 दिन की नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद ऐसे प्रतिष्ठानों को सील करने की घोषणा की थी, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद अधिकांश दुकानें और व्यावसायिक संस्थान सामान्य रूप से खुले रहे। इस शिथिलता के कारण स्थानीय रहवासियों में भारी रोष व्याप्त है, जिन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
भोपाल की पॉश अरेरा कॉलोनी सहित कई अन्य आवासीय इलाकों के निवासी लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं। उनका आरोप है कि आवासीय भूखंडों पर नियमों का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक निर्माण किए गए हैं और उनका संचालन भी अवैध रूप से हो रहा है। इस मामले को लेकर क्षेत्रीय निवासी पूर्णेंदु शुक्ला एवं अन्य द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर की गई है। न्यायालय ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम से जवाब मांगा है। रहवासियों का कहना है कि अधिकारी वास्तविक स्थिति को छिपाने और न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला, अवमानना याचिका की चेतावनी
रहवासियों ने इस संदर्भ में देश के सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले का भी हवाला दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आवासीय प्रयोजन के लिए स्वीकृत भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन या नियमों के विपरीत निर्माण होने पर स्थानीय निकाय और जिला प्रशासन ऐसे निर्माणों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करने के लिए बाध्य हैं। इस आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित कई शहरों में प्रशासन ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। इसी क्रम में, सर्वोच्च न्यायालय ने देश भर के विभिन्न नगर निकायों से अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध निर्माणों और की गई कार्रवाइयों का विस्तृत विवरण भी मांगा है।
अरेरा कॉलोनी के निवासी विवेक त्रिपाठी ने इस संबंध में कहा कि यदि भोपाल नगर निगम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई नहीं करता है, तो वे सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भोपाल में नगर निगम की कथित मिलीभगत से आवासीय नक्शों को मंजूरी दिलाने के बाद अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर जैसे कई रहवासी इलाकों में विशाल व्यावसायिक भवनों का निर्माण हुआ है, जो स्थानीय नागरिकों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। त्रिपाठी के अनुसार, शिकायतों के बावजूद नगर निगम केवल छोटे व्यापारियों के खिलाफ दिखावटी कार्रवाई करता है, जबकि प्रभावशाली लोगों के प्रतिष्ठानों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि कई इमारतें बिना भवन पूर्णता प्रमाण-पत्र (Building Completion Certificate) के ही संचालित हो रही हैं और स्वीकृत मानचित्रों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई में विफलता
नगर निगम ने पूरे भोपाल में लगभग 1,000 अवैध व्यावसायिक संस्थानों को चिन्हित कर नोटिस जारी करने का दावा किया था और यह भी घोषणा की थी कि 10 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद गुरुवार से सीलिंग अभियान शुरू किया जाएगा। हालांकि, वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत रही। अधिकांश बड़े और प्रभावशाली प्रतिष्ठान पूरे दिन सामान्य रूप से संचालित होते रहे। विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण करने पर रहवासियों ने पाया कि कुछ छोटे प्रतिष्ठानों को छोड़कर, लगभग सभी बड़े व्यापारिक संस्थान बिना किसी बाधा के अपना काम करते रहे। यह नगर निगम की क्षमता और इच्छाशक्ति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
यह स्थिति तब है जब सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि आवासीय भूखंडों पर वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने ऐसे सभी निर्माणों को तत्काल हटाने या सील करने का आदेश दिया है। इसके बावजूद, भोपाल में स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता चिंताजनक है। रहवासियों के अनुसार, नगर निगम केवल औपचारिकताओं को पूरा करता है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता। यह रवैया नागरिकों के अधिकारों का हनन है और शहर के सुनियोजित विकास में बाधा डालता है।
न्यायपालिका पर विश्वास, दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति, भोपाल का आरोप है कि नगर निगम की यह कार्रवाई केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है। समिति का मानना है कि जानबूझकर प्रभावशाली अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बचाने के उद्देश्य से कमजोर कार्रवाई की जा रही है, ताकि न्यायालय में उन्हें लाभ मिल सके। समिति ने न्यायपालिका में अपने पूर्ण विश्वास को दोहराया और आशा व्यक्त की कि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित होगा तथा कानून के अनुसार दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
समिति ने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होने के लिए संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन कर रहे निर्माणों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की। उनकी मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध व्यावसायिक ढाँचे खड़े होना असंभव है। इसलिए, न केवल अवैध निर्माणों को हटाया जाना चाहिए, बल्कि उन अधिकारियों के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं किया। रहवासियों का कहना है कि वे इस लड़ाई को तब तक जारी रखेंगे जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता और उनके आवासीय क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जाता।
