आरोन: वनकर्मियों पर हमला करने वाले चार आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजा
गुना के आरोन में वन विभाग की टीम पर हमला और शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामले में चार आरोपी कल्याण, विजय, रघुनाथ और...

गुना / आरोन | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | 14 सितंबर 2026
गुना पुलिस अधीक्षक हितिका वासल के निर्देश पर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के तहत आरोन थाना पुलिस ने वन विभाग की टीम पर हमला करने और शासकीय कार्य में बाधा डालने के चार आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। गिरफ्तार आरोपियों में कल्याण अहिरवार, विजय अहिरवार, रघुनाथ अहिरवार और सुनील अहिरवार शामिल हैं, जिन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
वन क्षेत्र में अवैध कटाई का विरोध करने पर हुआ था हमला
घटना एक सितंबर 2026 को झाझोन गांव के जंगल क्षेत्र में हुई थी। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, वनरक्षक प्रमोद कुमार गौर अपनी टीम के साथ गश्त पर थे। उन्होंने तीन व्यक्तियों को अवैध रूप से लकड़ियां काटते हुए रंगेहाथ पकड़ा। जब वनरक्षक ने उनसे पूछताछ की, तो उन्होंने अपने अन्य साथियों को बुला लिया। इसके बाद सभी आरोपियों ने मिलकर वनकर्मियों के साथ न केवल गाली-गलौज की, बल्कि मारपीट भी की और सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न की।
मुखबिर तंत्र की सक्रियता से चार आरोपी गिरफ्तार
फरियादी वनरक्षक की रिपोर्ट पर आरोन थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी थी और आरोपियों की धरपकड़ के लिए मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया था। पुलिस को 14 सितंबर 2026 को मुखबिर से सटीक सूचना मिली, जिसके आधार पर पुलिस ने तत्काल दबिश देकर चारों फरार आरोपियों, जो झाझोन गांव के ही निवासी बताए जा रहे हैं, को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कल्याण पुत्र हमीरा अहिरवार, विजय पुत्र चंदना अहिरवार, रघुनाथ पुत्र बलदेवा अहिरवार और सुनील पुत्र कल्याण अहिरवार शामिल हैं।
शासकीय कार्य में बाधा बर्दाश्त नहीं: पुलिस
पुलिस ने सभी आरोपियों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्यवाही पूर्ण करने के उपरांत उन्हें माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इस पूरी कार्यवाही में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक पंकज कुशवाह, उपनिरीक्षक किशोर टोप्पो सहित आरक्षक दिनेश शर्मा, सचिन, जितेन्द्र पाल, इरशाद खान, जितेन्द्र गुर्जर, भूपेन्द्र और प्रताप मौर्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में भी ऐसी घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। प्रशासन ने यह भी कहा है कि वन संपदा की सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
