आरोन में सील की गई मेडिकल दुकान के संचालन पर उठे सवाल
आरोन सिविल अस्पताल के सामने अतिक्रमण कर संचालित हो रही एक मेडिकल दुकान को लेकर स्थानीय लोग गंभीर सवाल उठा रहे हैं। आरोप है कि दुकान बिना फार्मासिस्ट के चल रही है और पूर्व में ड्रग्स विभाग द्वारा सील की जा चुकी थी।

द क्लिफ न्यूज़ | आरोन | 27 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के आरोन शहर में सिविल अस्पताल के सामने एक मेडिकल दुकान के संचालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि यह मेडिकल दुकान अवैध रूप से संचालित हो रही है, जिसमें न तो निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है और न ही आवश्यक योग्य फार्मासिस्ट की उपस्थिति है।
आरोप यह भी है कि यह वही मेडिकल दुकान है जिसे पूर्व में ड्रग्स विभाग के अधिकारियों द्वारा सील किया गया था। इस संदर्भ में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि दुकान को पहले सील किया गया था, तो अब वह किसके आदेश या किन परिस्थितियों में पुनः संचालित हो रही है। इस मामले में स्थानीय प्रशासन और औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी संदेह जताया जा रहा है।
अस्पताल के सामने अतिक्रमण और नियमों का उल्लंघन
स्थानीय लोगों का कहना है कि उक्त मेडिकल दुकान सिविल अस्पताल परिसर के सामने अतिक्रमण करके चलाई जा रही है। यह न केवल सार्वजनिक स्थान के अतिक्रमण का मामला है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े नियमों के उल्लंघन का भी गंभीर विषय है। नागरिकों ने मांग की है कि अस्पताल के आसपास संचालित सभी मेडिकल दुकानों की विस्तृत जांच की जाए। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि सभी दुकानें वैध लाइसेंस के तहत, स्थापित नियमों के अनुसार और एक योग्य फार्मासिस्ट की उपस्थिति में ही चलाई जा रही हैं।
यह भी शिकायतें सामने आ रही हैं कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों को उसी मेडिकल दुकान पर भेजा जा रहा है, जिससे कहीं न कहीं मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। आरोप है कि मरीजों को भटकने से बचाने के बहाने एक विशिष्ट मेडिकल स्टोर का प्रचार किया जा रहा है, जहां से दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल
इस पूरे प्रकरण में आरोन सिविल अस्पताल प्रबंधन और संबंधित औषधि प्रशासन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इन शिकायतों में सच्चाई है, तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके का निरीक्षण कर उचित जांच करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। यह देखा जाना बाकी है कि क्या प्रशासन इन आरोपों पर संज्ञान लेकर आवश्यक कदम उठाता है या स्थिति जस की तस बनी रहती है।
