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आरोन में जैन साधिका मां गुलाब बाई जैन का सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण

गुना जिले के आरोन में आचार्यश्री विद्यासागर साधिका आश्रम में दो वर्ष से साधनारत श्रेष्ठ साधिका मां गुलाब बाई जैन ने सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण प्राप्त किया।

Aug 27
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आरोन में जैन साधिका मां गुलाब बाई जैन का सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण

द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 27 अगस्त 2026

मध्य प्रदेश के गुना जिले के आरोन स्थित आचार्यश्री विद्यासागर साधिका आश्रम में दो वर्षों से साधना कर रहीं श्रेष्ठ साधिका मां गुलाब बाई जैन का सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण गुरुवार को हो गया। मुनिश्री निरोग सागर, निर्मोह सागर, निरामय सागर एवं निर्भीक सागर जी महाराज के सानिध्य में उन्होंने यह देह त्याग किया।

केकड़ी, राजस्थान निवासी मां गुलाब बाई जैन, 11:35 बजे देव, शास्त्र और गुरु का स्मरण करते हुए अपनी नश्वर काया से मुक्त हो गईं। इस खबर के फैलते ही आसपास के जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में आरोन पहुंचने लगे। स्थानीय दिगम्बर जैन समाज द्वारा श्री विद्यासागर साधिका आश्रम से उनकी अंतिम डोला यात्रा निकाली गई, जिसमें समाज के सभी महिला-पुरुषों ने भाग लिया। उनके गृहस्थ जीवन के परिजन भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने साधिका मां के सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण की मंगल अनुमोदना की।

आरोन में सल्लेखना का दूसरा अवसर

यह आरोन में दूसरा अवसर था जब साधिका आश्रम की किसी साधिका ने सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण प्राप्त किया हो। विगत वर्ष, वात्सल्य मूर्ति एवं बीजाक्षर प्रणेता मुनिश्री दुर्लभ सागर जी महाराज के सानिध्य में बिलासपुर, छत्तीसगढ़ निवासी आर्यिका श्री स्वर्णश्री माताजी (गृहस्थ जीवन में सोना देवी) ने भी इसी विधि से समाधि मरण प्राप्त किया था।

गुरुवार को भले ही त्यौहारों का मौसम चल रहा हो, लेकिन आरोन के जैन समाज ने इस दुखद अवसर पर शोक स्वरूप अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। सल्लेखना, जैन धर्म में मृत्यु के निकट आने पर स्वेच्छा से अन्न-जल का त्याग कर शरीर को कृश करते हुए आत्म-चिंतन और ईश्वर का स्मरण करते हुए देह त्यागने की एक धार्मिक प्रक्रिया है, जिसे मोक्ष प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।

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