आरक्षक ज्ञानेंद्र मिश्रा की अनूठी पहल: बेजुबानों की सुरक्षा के लिए बांधी रेडियम पट्टियां
भिण्ड के आरक्षक ज्ञानेंद्र मिश्रा ने रात में सड़क हादसों को रोकने के लिए गायों को रेडियम पट्टी बांधी है। उनकी इस पहल की खूब सराहना हो रही है।

द क्लिफ न्यूज़ | भिण्ड | 22 अगस्त 2026
देहात कोतवाली में तैनात आरक्षक ज्ञानेंद्र मिश्रा ने अपनी पुलिस की वर्दी के पीछे छिपी मानवीय संवेदनाओं को एक अनूठी पहल के माध्यम से समाज के सामने प्रस्तुत किया है। उन्होंने रात के अंधेरे में सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों से होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए एक अभिनव अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत, आरक्षक मिश्रा ने आवारा गायों के गले और सींगों पर रेडियम की पट्टियां बांधी हैं, जो वाहन की रोशनी पड़ते ही दूर से ही चमक उठेंगी।
यह पहल विशेष रूप से उन सड़कों और राजमार्गों पर महत्वपूर्ण है जहाँ रात के समय मवेशियों की उपस्थिति अक्सर वाहन चालकों के लिए खतरनाक साबित होती है। अंधेरे में इन मवेशियों को देख पाना मुश्किल होता है, जिसके परिणामस्वरूप गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। इन दुर्घटनाओं में न केवल कीमती जानें जाती हैं, बल्कि बेजुबान पशु भी इसका शिकार हो जाते हैं। आरक्षक मिश्रा की इस छोटी सी पहल का उद्देश्य वाहन चालकों को समय रहते सड़क पर मवेशी होने की सूचना देना है, ताकि वे अपनी गति नियंत्रित कर सकें और दुर्घटनाओं से बचा जा सके।
कर्तव्यनिष्ठा और समाजसेवा का संगम
देहात कोतवाली में अपनी नियमित पुलिस ड्यूटी के प्रति समर्पण, समय की पाबंदी और सतर्कता के लिए जाने जाने वाले ज्ञानेंद्र मिश्रा अपने खाली समय को समाज सेवा के कार्यों में लगाते हैं। उनकी यह मानवीय और जनहितकारी सोच स्थानीय नागरिकों, पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा सराही जा रही है। यह पहल कर्तव्य निर्वहन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व के बीच एक उत्कृष्ट संतुलन का उदाहरण है।
'असली प्रतिफल है जान बचाना'
आरक्षक ज्ञानेंद्र मिश्रा का मानना है कि पुलिस का कार्य केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा, "यदि एक छोटी सी पहल से किसी इंसान या बेजुबान जीव की जान बचती है, तो यही मेरी ड्यूटी का असली प्रतिफल है।" उनकी यह टिप्पणी पुलिसबल के सेवाभाव और सामाजिक जिम्मेदारी को रेखांकित करती है।
