भोपाल की हवा दिल्ली के बराबर ‘खतरनाक’: एक हफ्ते में AQI 77 से 270 पहुंचा, ठंड, धूल और निर्माण कार्य बने बड़ी वजह
राजधानी भोपाल की हवा पिछले एक सप्ताह में खतरनाक स्तर तक गिर गई है। 5 नवंबर को जहां शहर का समग्र एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI)...

राजधानी भोपाल की हवा पिछले एक सप्ताह में खतरनाक स्तर तक गिर गई है। 5 नवंबर को जहां शहर का समग्र एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 77 था—जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है—वहीं 13 नवंबर तक यह बढ़कर 270 पर पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी का स्तर है। यह तेजी भोपाल को देश की राजधानी दिल्ली के करीब ला खड़ा करती है, जहां सर्दियों में प्रदूषण अपने चरम पर रहता है।
सर्दी, ठंडी हवाएं और बाहरी प्रदूषण—त्रिकोण में फंसा शहर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, हवाओं की दिशा बदलने के साथ सर्दी की शुरुआत भोपाल की एयर क्वालिटी पर सीधा असर डाल रही है। इस मौसम में पंजाब और दिल्ली की ओर से आने वाली ठंडी हवाएं मध्य प्रदेश की ओर बहती हैं, जिससे AQI में औसतन 20% तक बढ़ोतरी दर्ज होती है।
CPCB अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय तक इस वायु गुणवत्ता में रहने से अधिकांश लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है।
धूल और सड़कें बनी बड़ी समस्या
शहर के कई हिस्सों में टूटी सड़कों और निर्माण कार्यों से उड़ रही धूल हवा में महीन कणों (PM10, PM2.5) की मात्रा बढ़ा रही है।
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धूल उड़ाने वाले वाहन
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निर्माण स्थलों से फैलता मलबा
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बिना ढंके डंपर
ये सभी घटक सर्दी में नमी के साथ मिलकर हवा को भारी और जहरीला बना देते हैं।
सर्द रातों में अलाव, टायर-प्लास्टिक जलाना भी बढ़ा रहा खतरा
ठंड बढ़ने के साथ लोग रात के समय अलाव जलाते हैं। लेकिन लकड़ी, कचरा, प्लास्टिक और पुराने टायरों का जलना हवा में विषैले तत्त्वों की मात्रा बढ़ा देता है।
बारिश के दौरान AQI थोड़ा घटता है, लेकिन बारिश रुकते ही ढीली मिट्टी और मलबा फिर हवा में उड़ने लगता है, जिससे स्तर तेजी से ऊपर चला जाता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार—
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भोपाल में बढ़ती ठंड के साथ तापमान में गिरावट “इन्वर्शन” की स्थिति पैदा करती है, जिसमें प्रदूषक जमीन के पास ही फंस जाते हैं।
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टूटे और धूलभरे मार्ग बड़े योगदानकर्ता बनकर उभरे हैं।
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निर्माण गतिविधियों की निगरानी कमजोर होने से PM स्तर लगातार ऊपर जा रहा है।
भोपाल के लिए खतरे की घंटी
तेजी से गिरती एयर क्वालिटी न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह शहर के भविष्य की शहरी योजना के लिए एक गंभीर संकेत है।
CPCB ने सलाह दी है कि—
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अस्थमा, हृदय रोग और बुजुर्ग लोग खास सावधानी रखें।
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सुबह-शाम की सैर कम करें।
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निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय लागू किए जाएं।
