दिल्ली की हवा फिर बेहद जहरीली, AQI 392 पर पहुंचा; 19 इलाकों में ‘गंभीर’ हालात
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रविवार सुबह (28 दिसंबर 2025) को दिल्ली का औसत एयर...

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रविवार सुबह (28 दिसंबर 2025) को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 392 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। यह जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने दी है।
19 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर ‘गंभीर’ स्थिति
CPCB के ‘समीर ऐप’ के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी के 19 निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई। इनमें आनंद विहार सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाका रहा, जहां AQI 444 रिकॉर्ड किया गया। शेष स्टेशनों पर भी हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ स्तर पर बनी रही।
AQI का पैमाना क्या कहता है
CPCB के मानकों के अनुसार:
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0–50: अच्छी
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51–100: संतोषजनक
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101–200: मध्यम
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201–300: खराब
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301–400: बहुत खराब
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401–500: गंभीर
विशेषज्ञों का कहना है कि 300 से ऊपर का AQI बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक होता है।
ठंड, नमी और स्थिर हवा ने बढ़ाई परेशानी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, रविवार सुबह दिल्ली का न्यूनतम तापमान 6.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.5 डिग्री कम है। सुबह 8:30 बजे आर्द्रता 71 प्रतिशत रही, जिससे प्रदूषक कण हवा में फंसे रहे।
मौसम विभाग ने दिन में अधिकतम तापमान करीब 21 डिग्री सेल्सियस रहने और आसमान साफ रहने का अनुमान जताया है, लेकिन हवा की रफ्तार कम रहने से प्रदूषण में तुरंत राहत की संभावना कम बताई जा रही है।
स्वास्थ्य पर असर और विशेषज्ञों की चेतावनी
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, ठंड के मौसम में पराली अवशेष, वाहन उत्सर्जन और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले प्रदूषक तत्व मिलकर स्मॉग की स्थिति बनाते हैं। लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेना फेफड़ों, हृदय और आंखों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है।
नागरिकों के लिए सलाह
स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि:
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सुबह-शाम खुले में व्यायाम से बचें
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मास्क का उपयोग करें
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बच्चों और बुजुर्गों को घर के अंदर रखें
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सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
क्यों अहम है यह स्थिति
दिल्ली में लगातार बिगड़ती हवा न सिर्फ एक पर्यावरणीय संकट है, बल्कि जनस्वास्थ्य और शहरी जीवन के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रदूषण के स्थायी समाधान—जैसे उत्सर्जन नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा और निर्माण नियमों का सख्त पालन—नहीं होते, तब तक सर्दियों में ऐसे हालात बार-बार सामने आते रहेंगे।
