अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नियम-आधारित व्यवस्था पर भारत का जोर, यूएनसीआईटीआरएएल सम्मेलन का समापन
नई दिल्ली में यूएनसीआईटीआरएएल की 60वीं वर्षगांठ पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न। विदेश मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट और यूएनसीआईटीआरएएल के साथ मिलकर किया आयोजन।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026
संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (यूएनसीआईटीआरएएल) की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस उच्च-स्तरीय सम्मेलन का आयोजन भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय और यूएनसीआईटीआरएएल के साथ संयुक्त रूप से किया था। समापन सत्र को विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने संबोधित किया, जिन्होंने वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए एक नियम-आधारित व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया।
सचिव दलेला ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के क्रमिक विकास और आधुनिकीकरण में भारत के निरंतर योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने वैश्विक व्यापार और वाणिज्य व्यवस्था को संचालित करने वाले कानूनी ढांचे को अधिक सुदृढ़, नियमों पर आधारित और न्यायसंगत बनाने के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया। दलेला ने कहा कि यूएनसीआईटीआरएएल के साथ भारत का दशकों पुराना सहयोग इस बात का प्रमाण है कि भारत हमेशा से एक पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुकूल कानूनी वातावरण तैयार करने का पक्षधर रहा है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला पर मंथन
तीन दिनों तक चले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में दुनिया भर से आए प्रख्यात न्यायविदों, कानूनी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और हितधारकों ने भाग लिया। इस मंच पर भू-राजनीतिक अस्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधान और तेजी से हो रहे डिजिटल बदलावों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों में एकरूपता और स्थिरता लाने पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में डिजिटल अर्थव्यवस्था, सीमा-पार दिवाला प्रक्रिया (इन्सॉल्वेंसी), अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) और मध्यस्थता तंत्र में सुधार जैसे ज्वलंत विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
भारत की बढ़ती भूमिका
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 26 जुलाई की देर शाम एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बताया था कि यूएनसीआईटीआरएएल की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर, विदेश मंत्रालय ने भारत के सुप्रीम कोर्ट और यूएनसीआईटीआरएएल के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस सम्मेलन के समापन सत्र में सेक्रेटरी (इकोनॉमिक रिलेशंस) सुधाकर दलेला ने भाग लिया। यह अवसर अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के विकास में यूएनसीआईटीआरएएल के साथ भारत के योगदान और सहयोग पर विचार करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण था।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए एक नियम-आधारित कानूनी संरचना की आवश्यकता पर बल दिया था, जिसे सचिव दलेला के समापन वक्तव्य से और अधिक मजबूती मिली। इस सफल आयोजन ने न केवल अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित किया है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि भविष्य के व्यापार कानूनों को विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) की विकासात्मक प्राथमिकताओं के अनुरूप अधिक समावेशी बनाया जाना चाहिए।
