अन्ना हजारे और डॉ. राजगोपाल की पुणे में शांति-अहिंसा पर सार्थक चर्चा
पुणे में अन्ना हजारे और डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. ने विश्व शांति, अहिंसा को वैश्विक अभियान बनाने और चंबल को शांति का केंद्र बनाने पर...

Pune | संवाददाता: दिनेश सिकरवार
द क्लिफ न्यूज़ | पुणे | 14 सितंबर 2026
विश्व भर में युद्धों, हिंसक संघर्षों और नफरत के बढ़ते दौर के बीच, पुणे में दो प्रमुख गांधीवादी समाजसेवियों, अन्ना हजारे और महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा के अध्यक्ष डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. के बीच एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मुलाकात संपन्न हुई। इस आत्मीय संवाद का मुख्य एजेंडा विश्व शांति, अहिंसा, सामाजिक समरसता और सद्भावना को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना रहा। दोनों नेताओं ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्यों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया को हथियारों की प्रतिस्पर्धा के बजाय महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए सत्य और प्रेम के मार्ग पर चलने की नितांत आवश्यकता है।
हाल ही में अस्वस्थता से उबरने के बाद अन्ना हजारे ने विशेष रूप से डॉ. राजगोपाल से भेंट की। उन्होंने डॉ. राजगोपाल को 'पदयात्रा गांधी' के रूप में संबोधित करते हुए दशकों से आदिवासियों और वंचितों के लिए उनके समर्पण और सेवा कार्यों की हृदय से सराहना की। अन्ना हजारे ने डॉ. राजगोपाल के कार्यों को प्रेरणादायक बताया और उनके सेवाभाव को नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल करार दिया।
चंबल को शांति का वैश्विक केंद्र बनाने का संकल्प
इस मुलाकात के दौरान चंबल अंचल में शांति स्थापित करने के प्रयासों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। अन्ना हजारे ने स्वर्गीय डॉ. एस.एन. सुब्बाराव 'भाई जी' को स्मरण करते हुए 14 अप्रैल 1972 को चंबल के डाकुओं द्वारा हिंसा से अहिंसा की ओर परिवर्तन के ऐतिहासिक आत्मसमर्पण को एक अद्भुत उदाहरण बताया। उन्होंने चंबल को विश्व शांति का एक प्रमुख केंद्र विकसित करने के संकल्प को अपना पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया। अन्ना हजारे ने इस बात पर जोर दिया कि जौरा की धरती से उठने वाला शांति का संदेश आज की वैश्विक आवश्यकता है, जो दुनिया को सकारात्मक दिशा दे सकता है।
आगामी कार्यक्रम में अन्ना हजारे की भागीदारी
डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. ने अन्ना हजारे को आगामी वर्ष जौरा में आयोजित होने वाले दस्यु आत्मसमर्पण दिवस के कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया। अन्ना हजारे ने इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार कर लिया और स्वास्थ्य अनुकूल रहने पर जौरा आने तथा वहां के युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने की अपनी इच्छा व्यक्त की। इस अवसर पर अन्ना हजारे ने अपनी दो महत्वपूर्ण पुस्तकें ‘मेरा गांव मेरा तीर्थ’ और ‘अनुभव के बोल’ भी डॉ. राजगोपाल को भेंट कीं, जो उनके जीवन दर्शन और विचारों का सार प्रस्तुत करती हैं।
गांधीवादी विचारधारा का वैश्विक प्रसार
दोनों गांधीवादी नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि गांधीवादी विचारधारा को प्रभावी ढंग से वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए विभिन्न संगठनों और शांति कार्यकर्ताओं का एकजुट होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अहिंसा और सद्भावना को अंतरराष्ट्रीय जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया, ताकि विश्व में स्थायी शांति की स्थापना हो सके। अन्ना हजारे ने महात्मा गांधी सेवा आश्रम के कार्यकर्ताओं को हर संभव मार्गदर्शन और सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि जब भी उन्हें आवश्यकता हो, वे नि:संकोच उनके पास आ सकते हैं।
मुंबई में हुई यह मुलाकात केवल दो प्रख्यात व्यक्तियों का मिलन नहीं थी, बल्कि यह हिंसा से जूझ रही दुनिया के समक्ष शांति का एक नया रोडमैप तैयार करने की दिशा में एक अत्यंत सार्थक और महत्वपूर्ण पहल है। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य गांधीवादी अहिंसा के सिद्धांतों को एक व्यापक वैश्विक अभियान का रूप देना है। यदि इस पहल को युवाओं और सामाजिक संस्थाओं का व्यापक समर्थन प्राप्त होता है, तो चंबल की भूमि से उत्पन्न यह शांति का संदेश पूरी मानवता के लिए एक अधिक सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह ऐतिहासिक भेंट भविष्य में शांति और अहिंसा के लिए कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए निश्चित रूप से नई ऊर्जा का संचार करेगी।
