अमेरिकी राजदूत के कश्मीर बयान पर पाकिस्तान में बवाल, राजनयिक तलब
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जिसके बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

द क्लिफ न्यूज़ | इस्लामाबाद | 20 अगस्त 2026
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर को भारत का 'महत्वपूर्ण हिस्सा' बताए जाने वाले बयान ने पाकिस्तान में तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। इस टिप्पणी के जवाब में, पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पाकिस्तान ने गोर के बयान को गैर-जिम्मेदाराना और तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर की अपनी पहली यात्रा के दौरान श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के उपरांत मीडिया से बातचीत करते हुए, उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता की भी सराहना की और कहा कि यहां की पर्यटन क्षमता को वैश्विक पटल पर लाने की आवश्यकता है। गोर ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में सुधार का भी उल्लेख किया और कहा कि केंद्र तथा राज्य प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठाए गए हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए जारी अपनी यात्रा संबंधी चेतावनी की समीक्षा पर विचार कर सकता है।
पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी राजनयिक को तलब
अमेरिकी राजदूत के बयान के कुछ ही घंटों के भीतर, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स नताली बेकर को तलब किया। पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी पर औपचारिक रूप से अपना विरोध व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताने वाली टिप्पणी को “तथ्यात्मक रूप से गलत” करार दिया। पाकिस्तान का कहना है कि वह जम्मू-कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र मानता है और गोर की टिप्पणी को स्वीकार नहीं करता। पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के अंतिम दर्जे का निर्धारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए।
अमेरिका के पुराने रुख से भिन्न टिप्पणी
पाकिस्तान ने अपने विरोध में यह भी कहा कि सर्जियो गोर की यह टिप्पणी कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे रुख के अनुरूप नहीं है। इस्लामाबाद ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए अमेरिकी प्रशासन से इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा जताई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तथा पर्यटन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं बढ़ रही हैं।
मुख्यमंत्री से मुलाकात और पर्यटन पर जोर
अमेरिकी राजदूत के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ उनकी मुलाकात भी काफी अहम रही। दोनों के बीच जम्मू-कश्मीर की वर्तमान स्थिति, भारत-अमेरिका संबंधों और क्षेत्र में विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों का समाधान भारत की आंतरिक राजनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए। ऐसे में, अमेरिकी राजदूत की यात्रा और उनके बयान को कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गोर ने जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता की प्रशंसा करते हुए कहा कि अमेरिकी पर्यटक भी इस क्षेत्र की यात्रा करने में रुचि ले सकते हैं। उन्होंने क्षेत्र में मौजूद पर्यटन और अन्य अवसरों की ओर भी इशारा किया। अमेरिका की मौजूदा यात्रा सलाह में जम्मू-कश्मीर के लिए सुरक्षा संबंधी चेतावनी शामिल है, जिसे गोर ने क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार को देखते हुए समीक्षा योग्य बताया है।
कूटनीतिक गरमाहट में वृद्धि
सर्जियो गोर के बयान के बाद, जम्मू-कश्मीर का मुद्दा एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। भारत लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न अंग बताता रहा है, जबकि पाकिस्तान इस क्षेत्र को विवादित क्षेत्र घोषित करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। इस परिप्रेक्ष्य में, अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। पाकिस्तान द्वारा अमेरिकी राजनयिक को तलब किए जाने से यह संकेत मिल रहे हैं कि इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
