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अमेरिका में आईटी छंटनी: हजारों भारतीय पेशेवर लौटे, वीज़ा नियम बने बड़ी बाधा

अमेरिका में बढ़ती टेक छंटनी और सख्त वीज़ा नियमों के चलते पिछले कुछ सालों में हजारों भारतीय आईटी पेशेवर भारत लौट चुके हैं। 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म करने और ग्रीन कार्ड बैकलॉग जैसे मुद्दों ने वापसी को मजबूर किया है।

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अमेरिका में आईटी छंटनी: हजारों भारतीय पेशेवर लौटे, वीज़ा नियम बने बड़ी बाधा

द क्लिफ न्यूज़ | 3 सितंबर 2026

अमेरिका में बड़े पैमाने पर हो रही टेक कंपनियों की छंटनी और वहां सख्त होते वीजा नियमों के कारण पिछले कुछ वर्षों में हजारों भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पेशेवरों को अपनी नौकरी गँवाने के बाद स्वदेश लौटना पड़ा है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 15,000 से अधिक भारतीय और 2024 में लगभग 9,700 पेशेवर अमेरिका छोड़कर भारत वापस आ चुके हैं, और यह सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।

इन भारतीय पेशेवरों की घर वापसी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें नौकरी छूटने के बाद मिलने वाली मोहलत का खत्म होना, ग्रीन कार्ड के लिए लंबा इंतजार और वर्क परमिट से जुड़े नियमों में सख्ती प्रमुख हैं।

नौकरी छूटने पर 60-दिन की ग्रेस पीरियड की समाप्ति का खतरा

वर्तमान में, यदि कोई H-1B वीजा धारक अपनी नौकरी खो देता है, तो उसे नया प्रायोजक (Sponsor) ढूंढने के लिए 60 दिनों की मोहलत मिलती है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन इस 60-दिन की मोहलत को पूरी तरह से समाप्त करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो नौकरी छूटते ही संबंधित पेशेवर को अमेरिका छोड़ना अनिवार्य हो जाएगा, जिससे उनके लिए अमेरिका में रुके रहने के विकल्प सीमित हो जाएंगे।

ग्रीन कार्ड के लिए 179 साल का लंबा इंतजार

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में 10 लाख से अधिक भारतीय रोज़गार-आधारित (Employment-based) ग्रीन कार्ड के बैकलॉग में फंसे हुए हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार, EB-2 श्रेणी के तहत भारतीय आवेदकों का प्रतीक्षा समय लगभग 179 साल तक पहुंच गया है। इस अत्यधिक लंबी प्रतीक्षा अवधि के कारण स्थायी निवास (PR) की उम्मीदें लगभग समाप्त हो रही हैं, जो कई पेशेवरों को भारत लौटने के लिए प्रेरित कर रहा है।

वर्क परमिट (EAD) नियमों में कड़ाई

अमेरिका में वर्क परमिट से जुड़े नियमों में आई सख्ती भी भारतीय पेशेवरों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है। H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथी को मिलने वाले H-4 EAD (वर्क परमिट) को समाप्त करने का प्रस्ताव एक बार फिर सामने आया है, जिससे दोहरी आय वाले परिवारों पर गंभीर संकट आ सकता है। इसके अतिरिक्त, वीजा रिन्यूअल लंबित होने पर मिलने वाला 540 दिनों का ऑटोमैटिक वर्क परमिट एक्सटेंशन भी बंद हो चुका है। इसके कारण, वीजा नवीनीकरण में देरी होने पर पेशेवरों को तुरंत काम बंद करना पड़ता है।

वीजा कैंसिलेशन और रिजेक्शन का बढ़ता सिलसिला

हाल के दिनों में, अमेरिका द्वारा शरण (Asylum) मांगने वाले लोगों के B1/B2 (बिजनेस और टूरिस्ट) वीजा का बड़े पैमाने पर कैंसिलेशन भी किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के दायरे में 70,000 से अधिक भारतीय नागरिक भी जांच और संभावित प्रभाव के तहत आ सकते हैं, जिससे उनकी अमेरिका में रहने की स्थिति और अनिश्चित हो गई है। इन सभी कारणों के मद्देनजर, हजारों भारतीय टेक पेशेवर, जो छंटनी का शिकार हुए हैं, अब अमेरिका में रुकने के बजाय भारत के उभरते हुए टेक हब जैसे बेंगलुरु और हैदराबाद का रुख कर रहे हैं।