BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
Regional

अमरवाड़ा की महिलाओं ने हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखा, प्रतिमा विसर्जन संपन्न

अमरवाड़ा की महिलाओं ने पति की लंबी उम्र के लिए हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखा। व्रत के बाद शिव-पार्वती की प्रतिमाओं व पूजन सामग्री...

Few hours ago
2 मिनट में पढ़ें
संवाददाता: प्रहलाद सूर्यवंशी
अमरवाड़ा की महिलाओं ने हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखा, प्रतिमा विसर्जन संपन्न

अमरवाडा | संवाददाता: प्रहलाद सूर्यवंशी

द क्लिफ न्यूज़ | अमरवाडा | 15 सितंबर 2026

अमरवाड़ा नगर में सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ सुप्रसिद्ध हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखा। इस दौरान महिलाएं पूरे दिन निर्जल रहीं और उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती की कथा सुनी। रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण के साथ भक्तिमय वातावरण बना रहा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।

परंपरा के अनुसार, व्रत के दूसरे दिन मंगलवार को महिलाओं ने पारण किया और सामूहिक रूप से विसर्जन के लिए निकलीं। पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी महिलाओं ने अपने सिर पर विशेष पूजन सामग्री से भरी टोकरियों को धारण किया, जिसमें फूल, बेलपत्र और अन्य पूजित वस्तुएं शामिल थीं। सुबह से हो रही हल्की बारिश के बावजूद महिलाओं का उत्साह बना रहा, जो उनकी गहरी आस्था का प्रतीक था।

तीज व्रत का विसर्जन अनुष्ठान

मान्यता है कि हरितालिका तीज व्रत के समापन पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाओं के साथ-साथ संपूर्ण पूजन सामग्री का किसी पवित्र जल स्रोत, जैसे कि तालाब में विसर्जन किया जाता है। इसी धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए, महिलाओं का समूह नगर के जल स्थल पर पहुंचा। विधि-विधान के साथ पूजा सामग्री और प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न किया गया।

विसर्जन के दौरान महिलाएं पारंपरिक लोकगीत गाती रहीं, जिसने पूरे वातावरण को एक भक्तिमय और सांस्कृतिक रंगत प्रदान की। इस अनुष्ठान के माध्यम से उन्होंने अपने अखंड सौभाग्य और परिवार के समग्र कल्याण के लिए ईश्वर से मंगल कामना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व का था, बल्कि इसने नगर की सांस्कृतिक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इस पर्व की महत्ता को और बढ़ाया।