अलर्क सिंह लल्ला: राजनीति में युवाओं की सक्रिय भागीदारी से सुधरेगी व्यवस्था
गढ़ी के भावी प्रधान अलर्क सिंह लल्ला ने राजनीति के प्रति नकारात्मक सोच पर प्रहार किया है। उन्होंने युवाओं को आगे आकर जनसेवा करने और...

गोण्डा | संवाददाता: बी पी त्रिपाठी
द क्लिफ न्यूज़ | गोण्डा | 25 अक्टूबर 2026
गढ़ी के भावी प्रधान अलर्क सिंह लल्ला ने राजनीति के प्रति समाज में बरसों से चली आ रही नकारात्मक सोच पर गहरा कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि समाज में यह धारणा गहरी पैठ बना चुकी है कि राजनीति सभ्य और अच्छे परिवारों के बच्चों के लिए नहीं है। अक्सर जब कोई युवा जनसेवा की इच्छा जताता है, तो उसे पढ़ाई या करियर पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देकर हतोत्साहित किया जाता है। यह प्रवृत्ति युवाओं को सक्रिय राजनीतिक भागीदारी से दूर करती है, जबकि आज के दौर में उनकी ऊर्जा और नए विचारों की महती आवश्यकता है।
अच्छे घरों के बच्चों को राजनीति से दूर रखने की सोच बदलनी होगी
अलर्क सिंह लल्ला के अनुसार, इस दबी-छिपी मानसिकता का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि जब शिक्षित और योग्य युवा राजनीति से दूरी बना लेते हैं, तब व्यवस्था की बागडोर अयोग्य हाथों में चली जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हम समाज और देश की तस्वीर बदलना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत अपने घरों से करनी होगी। परिवार की पहली जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि उनके बच्चे, चाहे वे किसी भी क्षेत्र में रुचि दिखाएं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। विशेषकर यदि रुचि जनसेवा और राजनीति में हो, तो उसे सकारात्मक दिशा दी जानी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह सोच अत्यंत हानिकारक है कि राजनीति केवल कुछ खास लोगों के लिए ही है या यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ केवल वही लोग जाते हैं जिनका कोई अन्य विकल्प नहीं बचता। जबकि हकीकत यह है कि राजनीति एक ऐसा मंच है जहाँ से देश और समाज के लिए बड़े परिवर्तन लाए जा सकते हैं। यदि अच्छे घरों के, सुशिक्षित और समर्पित युवा इस क्षेत्र में आएंगे, तो वे निश्चित रूप से व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बना सकते हैं।
योग्य युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने से ही मजबूत व्यवस्था संभव है
पंचायत चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक, किसी भी स्तर पर यदि बच्चा राजनीति में रुचि ले रहा है, तो उसे रोकने के बजाय प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे वे आगे बढ़कर ईमानदारी से जनता की सेवा कर पाएंगे। उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए ताकि वे राजनीतिक प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकें और उसमें सकारात्मक योगदान दे सकें। यह केवल युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि अपने बच्चे राजनीति में नहीं आना चाहते, तो भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में समाज के किसी भी अन्य योग्य उम्मीदवार का समर्थन करें, जिसमें समाज के लिए कुछ बेहतर करने का जज्बा हो। जब हम हर स्तर पर सही और काबिल लोगों का साथ देंगे, तभी एक जिम्मेदार और मजबूत व्यवस्था का निर्माण संभव हो पाएगा। यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम ऐसे नेताओं को चुनें जो वास्तव में जनता की सेवा करने की क्षमता रखते हों और जिनमें देश को आगे ले जाने का विजन हो। युवाओं की यह सक्रिय भागीदारी ही भविष्य में देश के विकास का आधार बनेगी और राजनीतिक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाएगी, जिससे एक सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण होगा।
