अखिलेश का मायावती पर पलटवार: 'सपा गठबंधन तोड़ती नहीं, सहयोगी खुद अलग होते हैं'
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बसपा प्रमुख मायावती के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी गठबंधन को पूरी ईमानदारी से निभाती है, सहयोगियों का साथ नहीं छोड़ती।

द क्लिफ न्यूज़ | लखनऊ | 22 अगस्त 2026
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती द्वारा गठबंधन निभाने को लेकर लगाए गए आरोपों का जोरदार खंडन किया है। उन्होंने कहा कि सपा कभी भी गठबंधन तोड़ने की पहल नहीं करती, बल्कि अपने सहयोगियों का पूरी निष्ठा और मजबूती के साथ अंत तक साथ निभाती है। यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार ऐसे अवसर आए हैं जब सहयोगी दल स्वयं ही पार्टी से अलग होने का रास्ता चुन लेते हैं।
यह प्रतिक्रिया मायावती द्वारा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान पर दी गई थी, जिसमें उन्होंने अपने पूर्व सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) और उसके नेता जयंत चौधरी के लिए 'चवन्नी से रुपया बनाने' जैसी टिप्पणी का प्रयोग किया था। मायावती ने इस टिप्पणी को अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक बताते हुए अखिलेश यादव से न केवल आरएलडी, जयंत चौधरी और चौधरी चरण सिंह के परिवार से, बल्कि पूरे जाट समाज से माफी मांगने की मांग की थी। बसपा प्रमुख ने सपा के 'चाल, चरित्र और चेहरे' पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक सहयोगियों के साथ उचित व्यवहार नहीं करती है।
गठबंधन निभाने की सपा की प्रतिबद्धता का दावा
मायावती के इन गंभीर आरोपों के जवाब में अखिलेश यादव ने लखनऊ में अपने पिता और सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के गुरु उदय प्रताप सिंह की पुस्तक ‘अभिनंदन ग्रंथ’ के विमोचन कार्यक्रम के दौरान कहा कि आज के दौर में सच बोलना भी एक चुनौती बन गया है, और सत्य को अक्सर गलत समझा जाने लगता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब समाजवादी पार्टी किसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन करती है, तो वह उस रिश्ते को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता से निभाती है। उन्होंने कहा, “सपा किसी को छोड़कर नहीं जाती, बल्कि कई बार लोग खुद पार्टी से अलग होकर चले जाते हैं।”
अखिलेश यादव का यह बयान आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह घटनाक्रम प्रदेश में तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी दलों के बीच संभावित तालमेल को लेकर चल रही अटकलों के बीच सामने आया है। जहां एक ओर सपा अपने सहयोगी दलों के साथ समन्वय को मजबूत करने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुराने गठबंधनों और नेताओं के प्रति सार्वजनिक बयानों से राजनीतिक गरमाहट बढ़ गई है।
भाजपा पर भी साधा निशाना, सीटों की मांग
इस बीच, अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी निशाना साधा और सहयोगी दलों को 120 सीटें देने की मांग उठाई। इस बयान को विपक्षी गठबंधन के भीतर आगामी चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा पर रणनीतिक दबाव बनाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। यह दर्शाता है कि सपा न केवल अपने आंतरिक गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, बल्कि व्यापक विपक्षी एकता के एजेंडे में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश में है।
जयंत चौधरी के संबंध में अखिलेश यादव की पूर्व टिप्पणी, उस पर मायावती की तीखी प्रतिक्रिया और अब अखिलेश के पलटवार ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच के जटिल संबंधों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि राज्य की राजनीति में सत्ता की लड़ाई के साथ-साथ पुराने रिश्तों और नए राजनीतिक समीकरणों का ताना-बाना भी बुना जा रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन बयानबाजियों का आगामी चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ता है और क्या यह विभिन्न दलों के बीच किसी नए गठबंधन या दरार का कारण बनता है।
