AIIMS भोपाल से प्लाज़्मा चोरी का बड़ा खुलासा: 1,123 यूनिट बरामद, ₹8.57 लाख नकद जब्त – अंतरराज्यीय गिरोह बेनकाब
तीन हफ्तों की जांच में खुला देशभर फैला प्लाज़्मा नेटवर्क AIIMS भोपाल से चोरी हुए ताज़ा जमे प्लाज़्मा (Fresh Frozen Plasma) मामले में पुलिस ने...

तीन हफ्तों की जांच में खुला देशभर फैला प्लाज़्मा नेटवर्क
AIIMS भोपाल से चोरी हुए ताज़ा जमे प्लाज़्मा (Fresh Frozen Plasma) मामले में पुलिस ने बुधवार को बड़ा पर्दाफाश किया।
बागसेवनिया पुलिस ने एक अंतरराज्यीय गिरोह को बेनकाब करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 1,123 यूनिट प्लाज़्मा (लगभग ₹11.72 लाख मूल्य), ₹8.57 लाख नकद, और ₹27,000 का डीप फ्रीज़र जब्त किया गया।
डीसीपी ज़ोन-2 विवेक सिंह के अनुसार, यह सफलता थाने के प्रभारी निरीक्षक अमित सोनी के नेतृत्व में की गई सघन जांच के बाद मिली।
कैसे हुआ था प्लाज़्मा चोरी का खुलासा
घटना 29 सितंबर को सामने आई थी, जब AIIMS के ब्लड बैंक से बड़ी मात्रा में प्लाज़्मा यूनिट्स गायब पाई गईं। प्रारंभिक जांच में आउटसोर्स कर्मचारी अंकित केलकर और एक अन्य व्यक्ति पर शक हुआ।
पूछताछ में केलकर ने कबूल किया कि उसने चोरी की साजिश अपने दो परिचितों अमित जाटव (25) और लकी पाठक (30) के साथ रची थी। तीनों पहले एक निजी ब्लड बैंक में साथ काम कर चुके थे।
केलकर का AIIMS के साथ अनुबंध 30 सितंबर को समाप्त होने वाला था, और इसी वजह से उसने चोरी की योजना बनाई। उसने 1,150 यूनिट FFP प्लाज़्मा चुरा लिया।
चोरी से लेकर बिक्री तक – पूरा गिरोह बेनकाब
पुलिस ने जांच में पाया कि केलकर और उसके साथियों ने चोरी किया प्लाज़्मा दीपक पाठक (35) को बेचा। दीपक ने इसे आगे श्याम बदगुजर (27) और करन चव्हाण (25) तक पहुँचाया — दोनों इंदौर और औरंगाबाद के ब्लड बैंक कर्मचारियों के रूप में काम करते थे।
इन लोगों ने प्लाज़्मा को ₹5,800 प्रति लीटर की दर से बेचने का सौदा किया था। पुलिस ने बाद में बदगुजर और चव्हाण को गिरफ्तार कर 224 लीटर (1,123 यूनिट) प्लाज़्मा बरामद किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी इसे फार्मास्यूटिकल कंपनियों को एल्ब्यूमिन और अन्य दवाओं के उत्पादन में उपयोग के लिए बेचने की योजना बना रहे थे।
तकनीकी जानकारी का गलत इस्तेमाल
तीन साल से AIIMS में काम कर रहे केलकर को ब्लड बैंक की सुरक्षा प्रणाली, प्रवेश द्वारों और स्टोरेज सेक्शन की पूरी जानकारी थी। उसने इसी जानकारी का दुरुपयोग करते हुए सुरक्षा व्यवस्थाओं को चकमा देकर प्लाज़्मा चोरी किया।
डीसीपी विवेक सिंह ने कहा,
“केलकर ने संस्थान की संरचना और प्रक्रिया की जानकारी का फायदा उठाया। यह संगठित अपराध का मामला है जिसमें अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।”
जब्त सामग्री
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1,123 यूनिट FFP प्लाज़्मा: अनुमानित मूल्य ₹11.72 लाख
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₹8.57 लाख नकद: अवैध बिक्री से प्राप्त रकम
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1 डीप फ्रीज़र: प्लाज़्मा स्टोरेज के लिए इस्तेमाल किया गया उपकरण
पांच राज्यों तक फैला नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि चोरी किया गया प्लाज़्मा भोपाल, इंदौर, नासिक, औरंगाबाद और बीड (महाराष्ट्र) तक सप्लाई किया जा रहा था।
अधिकारियों को शक है कि इस नेटवर्क में अन्य निजी ब्लड बैंक कर्मी और बिचौलिये भी शामिल हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया,
“हम यह पता लगाने में जुटे हैं कि किन-किन दवा कंपनियों या डीलरों तक यह अवैध प्लाज़्मा पहुँचा था। सभी संभावित ठिकानों पर छापे की कार्रवाई जारी है।”
स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल
यह खुलासा न केवल पुलिस के लिए बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली के लिए भी चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्लाज़्मा जैसे संवेदनशील जैव-उत्पाद की चोरी और अवैध बिक्री से संक्रमण, गलत उपयोग और ब्लड बैंकिंग सिस्टम पर भरोसे का संकट पैदा हो सकता है।
स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ डॉ. रितिका शर्मा ने कहा,
“प्लाज़्मा का अनुचित भंडारण या अवैध बिक्री मरीजों के जीवन के लिए घातक हो सकता है। ऐसे मामलों में अस्पताल प्रबंधन और नियामक संस्थाओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
निष्कर्ष
AIIMS भोपाल प्लाज़्मा चोरी मामला यह दर्शाता है कि चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा और ऑडिट व्यवस्था कितनी कमजोर है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक और लॉजिस्टिक कड़ी को खंगाल रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है।
