AI निर्णयों की जिम्मेदारी से नहीं बचेंगे बैंक: RBI गवर्नर
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैंकों को AI के इस्तेमाल पर सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि बैंक किसी भी गलत फैसले के लिए AI को दोषी नहीं ठहरा सकते।

द क्लिफ न्यूज़ | मुंबई | 12 अगस्त 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैंकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाने का निर्देश दिया है। मुंबई में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक किसी भी अनुचित या गलत निर्णय की जिम्मेदारी AI मॉडल, एल्गोरिदम या तकनीक पर नहीं डाल सकते। ग्राहकों, ऑडिटर या नियामकों के समक्ष यह दलील स्वीकार्य नहीं होगी कि निर्णय किसी मशीन ने लिया था।
गवर्नर मल्होत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि बैंकों को AI-आधारित प्रणालियों में मजबूत मानवीय निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। उनका मानना है कि AI का उपयोग मानव निर्णय क्षमता को प्रतिस्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि उसे अधिक प्रभावी और बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
'मॉडल ने फैसला लिया' तर्क अस्वीकार्य
बैंकिंग क्षेत्र में AI का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। क्रेडिट मूल्यांकन, धोखाधड़ी का पता लगाना, जोखिम प्रबंधन, ग्राहक सेवा और विभिन्न अन्य परिचालन प्रक्रियाओं में एल्गोरिदम-आधारित प्रणालियों का उपयोग आम हो गया है। इस बढ़ते प्रचलन के बीच, RBI गवर्नर ने साफ किया है कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के बावजूद, अंतिम जिम्मेदारी हमेशा बैंक की ही होगी। यदि किसी AI प्रणाली द्वारा ग्राहक के संबंध में कोई गलत निर्णय लिया जाता है, तो बैंक यह कहकर अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकता कि निर्णय 'मॉडल' ने लिया था।
इसका सीधा अर्थ यह है कि बैंकिंग संस्थानों को AI-संचालित निर्णय प्रणालियों के साथ-साथ पर्याप्त नियंत्रण और जवाबदेही की एक मजबूत व्यवस्था भी विकसित करनी होगी। यह सुनिश्चित करेगा कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवीय निरीक्षण और नैतिक मानकों का भी ख्याल रखा जाए।
हर स्तर पर आवश्यक मानवीय हस्तक्षेप
AI मॉडल को विकसित और लागू करते समय, बैंकों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वे महत्वपूर्ण निर्णयों में सार्थक मानवीय निगरानी की गुंजाइश बनाए रखें। केवल मॉडल से प्राप्त आउटपुट को अंतिम निर्णय मान लेना कई जोखिमों को जन्म दे सकता है। मानवीय हस्तक्षेप की व्यवस्था बैंकों को असामान्य या संदिग्ध मामलों की गहन समीक्षा करने की सुविधा प्रदान करती है। इससे ऐसे निर्णयों को रोका जा सकता है, जिनमें मॉडल ने गलत डेटा, अपूर्ण जानकारी या अप्रत्याशित परिस्थितियों के आधार पर निष्कर्ष निकाला हो।
मानवीय विवेक और अनुभव AI द्वारा प्रदान किए गए डेटा विश्लेषण के पूरक के रूप में कार्य करते हैं, जिससे अधिक संतुलित और सटीक निर्णय लिए जा सकते हैं। यह विशेष रूप से उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां ग्राहक की वित्तीय या व्यक्तिगत स्थिति जटिल होती है।
AI, मानव निर्णय का विकल्प नहीं
RBI गवर्नर का स्पष्ट संदेश यह भी रहा कि बैंकिंग क्षेत्र में AI को मानवीय निर्णय क्षमता के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका प्राथमिक उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए। AI बड़ी मात्रा में डेटा का तेजी से विश्लेषण करने और पैटर्न की पहचान करने में सहायक हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णयों में मानवीय विवेक और संस्थागत जिम्मेदारी की भूमिका सर्वोपरि बनी रहेगी।
AI की क्षमताएं डेटा-संचालित अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकती हैं, लेकिन नैतिक विचार, सहानुभूति और दीर्घकालिक रणनीतिक सोच जैसे पहलू मानव निर्णय में निहित हैं, जिन्हें AI वर्तमान में दोहरा नहीं सकता।
ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सर्वोपरि
बैंकिंग में AI के उपयोग का सीधा प्रभाव ग्राहकों पर पड़ता है। यदि किसी मॉडल के आधार पर ऋण आवेदन अस्वीकृत किया जाता है, जोखिम का आकलन किया जाता है, या किसी ग्राहक के खाते के संबंध में कोई कार्रवाई की जाती है, तो ऐसे निर्णयों के पीछे एक उचित प्रक्रिया और स्पष्ट जवाबदेही का होना अनिवार्य है। ग्राहकों के लिए यह समझना भी आवश्यक है कि उनके संबंध में लिए गए निर्णय के पीछे कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई है। केवल जटिल तकनीकी मॉडल का हवाला देकर बैंक किसी भी निर्णय को उचित नहीं ठहरा सकते।
पारदर्शिता ग्राहकों का अधिकार है, और AI-संचालित निर्णय प्रक्रिया में इसे सुनिश्चित करना बैंकों की जिम्मेदारी है।
ऑडिट और नियामकीय निगरानी की भूमिका
AI-आधारित बैंकिंग प्रणालियों के बढ़ते प्रसार के साथ, ऑडिट और नियामकीय निगरानी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके AI मॉडल स्थापित नियमों और जोखिम प्रबंधन ढांचे के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। मॉडल में उपयोग किए जाने वाले डेटा, उसके परिणामों और निर्णय प्रक्रिया की निरंतर निगरानी के लिए एक सुदृढ़ व्यवस्था स्थापित करना आवश्यक होगा। यह किसी भी प्रकार की गलती या पक्षपातपूर्ण परिणाम की स्थिति में उसकी पहचान और सुधार को संभव बनाएगा।
यह सुनिश्चित करता है कि AI का उपयोग निष्पक्ष, सुरक्षित और नियामक दिशानिर्देशों के अनुपालन में हो।
AI से बैंकिंग दक्षता में वृद्धि, जोखिम प्रबंधन भी महत्वपूर्ण
AI का विवेकपूर्ण उपयोग बैंकिंग क्षेत्र को अधिक तेज, कुशल और ग्राहक-केंद्रित बनाने में सहायक हो सकता है। धोखाधड़ी की पहचान, उन्नत ग्राहक सहायता, प्रभावी जोखिम विश्लेषण और बड़ी मात्रा में वित्तीय डेटा की प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में AI अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, इसके साथ कुछ अंतर्निहित तकनीकी जोखिम भी जुड़े हुए हैं। गलत डेटा इनपुट, मॉडल में खामियां, साइबर सुरक्षा जोखिम और गलत अनुमान बैंकिंग निर्णयों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए, AI द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभों के साथ-साथ उसके संभावित जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है।
अंतिम निष्कर्ष: जिम्मेदारी हमेशा बैंक की
RBI गवर्नर का संदेश मूल रूप से बैंकिंग क्षेत्र में जिम्मेदार AI के इस्तेमाल पर केंद्रित रहा। तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, उसके माध्यम से लिए गए फैसलों की जवाबदेही संस्थान से समाप्त नहीं होगी। बैंकों को AI मॉडल में मानव निगरानी, सुदृढ़ जोखिम नियंत्रण, पर्याप्त पारदर्शिता और स्पष्ट जवाबदेही की व्यवस्था को मजबूत करना होगा। आने वाले समय में, बैंकिंग क्षेत्र में AI के बढ़ते उपयोग के साथ, यह सिद्धांत और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा कि 'मशीनें निर्णय ले सकती हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी हमेशा इंसान और संस्था की ही रहेगी'।
