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AI बना हैकर्स का नया हथियार: साइबर अपराधों में आई तेजी, बढ़ा खतरा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) साइबर सुरक्षा में जहां एक ओर वरदान साबित हो रही है, वहीं दूसरी ओर हैकर्स के लिए भी यह बड़ा अवसर बन गई है। 2026 के मामलों ने दर्शाया है कि AI अब हमलों की योजना, सोशल इंजीनियरिंग और स्वचालित गतिविधियों में भी तेज और घातक हो रही है।

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AI बना हैकर्स का नया हथियार: साइबर अपराधों में आई तेजी, बढ़ा खतरा

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 13 सितंबर 2026

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहाँ एक ओर साइबर सुरक्षा को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करने की क्षमता रखती है, वहीं इसका अनैतिक और आपराधिक उपयोग साइबर अपराधियों और हैकर्स के लिए एक बड़ा अवसर भी उत्पन्न कर रहा है। वर्ष 2026 में सामने आए विभिन्न मामलों और रिपोर्ट्स ने इस बात की पुष्टि की है कि AI की भूमिका अब केवल फर्जी संदेशों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साइबर हमलों की योजना बनाने, लक्षित व्यक्तियों की पहचान करने, सोशल इंजीनियरिंग को अधिक प्रभावी बनाने और यहाँ तक कि स्वचालित साइबर गतिविधियों को भी गति देने में महत्वपूर्ण हो गई है। यूरोपोल द्वारा जारी 2026 की साइबरक्राइम आकलन रिपोर्ट में भी इस बात को रेखांकित किया गया है कि अपराधी जनरेटिव AI और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल धोखाधड़ी और सोशल इंजीनियरिंग को और अधिक व्यापक एवं परिष्कृत बनाने के लिए कर रहे हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) द्वारा जारी 2025 की इंटरनेट क्राइम रिपोर्ट के अनुसार, AI से जुड़े साइबर अपराधों की 22,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिसके परिणामस्वरूप पीड़ितों को लगभग 893 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भारी नुकसान हुआ। AI की सहायता से तैयार किए जा रहे डीपफेक वीडियो, आवाज की हूबहू नकल और फर्जी पहचान का इस्तेमाल अब ठगी को और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे आम लोगों के लिए धोखेबाजों को पहचानना अत्यंत कठिन हो गया है।

AI-आधारित फिशिंग: एक गंभीर और बढ़ता खतरा

AI-आधारित फिशिंग हमले तेजी से एक गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। पारंपरिक फिशिंग संदेशों में अक्सर भाषा संबंधी त्रुटियाँ या वर्तनी की गलतियाँ होती थीं, जिन्हें आसानी से पहचाना जा सकता था। हालाँकि, AI हमलावरों को ऐसे संदेश तैयार करने में सक्षम बना रही है जो अधिक स्वाभाविक, व्यक्तिगत और विश्वसनीय लगते हैं। यह क्षमता विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि यह कर्मचारियों, ग्राहकों और यहाँ तक कि वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान की नकल करके धोखाधड़ी को अंजाम देना आसान बना देती है। इस प्रकार के परिष्कृत हमलों से संगठनों की सुरक्षा और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुँच सकता है।

AI एजेंट्स का उदय: स्वचालित हमलों की चिंता

साइबर अपराध के क्षेत्र में सबसे चिंताजनक बदलाव AI एजेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल में देखा जा रहा है। अगस्त 2026 में सामने आई एक प्रमुख जांच में लगभग 700 AI एजेंट्स द्वारा समन्वित एक गतिविधि का खुलासा हुआ, जिसने Hugging Face जैसे प्रमुख सिस्टम को निशाना बनाया। इस घटना ने इस गंभीर चिंता को जन्म दिया है कि भविष्य में साइबर हमलों में मानव निर्देशों पर निर्भरता काफी कम हो सकती है और स्वचालित गतिविधियाँ अधिक प्रमुख हो जाएंगी। ये AI एजेंट्स स्वतंत्र रूप से कार्य करने, कमजोरियों का पता लगाने और हमले शुरू करने में सक्षम हो सकते हैं, जिससे हमलों की गति और पैमाना अभूतपूर्व रूप से बढ़ सकता है।

रूसी साइबर अपराधियों द्वारा AI कोडिंग असिस्टेंट का दुरुपयोग

एक अन्य मामले में, 2026 में रूसी भाषी साइबर अपराधियों के एक समूह ने AI कोडिंग असिस्टेंट का उपयोग करके कम से कम सात विभिन्न कंपनियों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। जांच के दौरान यह पता चला कि हमलावरों ने AI सिस्टम को इस तरह से प्रशिक्षित किया कि वे अपने दुर्भावनापूर्ण कार्यों को सुरक्षित सिमुलेशन के रूप में प्रस्तुत कर सकें, जिससे वे अक्सर सुरक्षा प्रणालियों की सीमाओं को पार करने में सफल रहे। इस तरीके ने सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए AI-संचालित खतरों का पता लगाना और उन्हें रोकना और भी जटिल बना दिया है।

भारत में AI से जुड़े साइबर जोखिम पर बढ़ती चिंता

भारत में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े साइबर जोखिमों को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। Proofpoint द्वारा किए गए 2026 के CISO सर्वे के अनुसार, 93% भारतीय मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (CISOs) ने मानव व्यवहार को अपनी संस्था की साइबर सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी कमजोरी माना है। इसी सर्वे में, 92% CISOs ने AI से उत्पन्न होने वाले जोखिमों के प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वीकार की है। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए, 91% संगठनों ने कर्मचारियों द्वारा जनरेटिव AI टूल्स के उपयोग को या तो सीमित कर दिया है या पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। यह आंकड़े देश भर में AI के सुरक्षित उपयोग को लेकर गंभीरता को दर्शाते हैं।

AI: सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक दोधारी तलवार

यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि AI केवल अपराधियों का ही हथियार नहीं है। यही उन्नत तकनीक सुरक्षा एजेंसियों और कंपनियों को संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने, संभावित खतरों की लगातार निगरानी करने, फर्जी संदेशों की प्रामाणिकता की जाँच करने और साइबर हमलों पर त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया देने में भी मदद कर रही है। AI की यह दोहरी प्रकृति एक जटिल चुनौती प्रस्तुत करती है।

सुरक्षित AI उपयोग और मानव नियंत्रण की आवश्यकता

वर्तमान परिदृश्य में, AI को पूरी तरह से रोकना न तो संभव है और न ही वांछनीय। असली चुनौती AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने, मजबूत निगरानी प्रणालियों को लागू करने और किसी भी स्वचालित गतिविधि पर मानव नियंत्रण बनाए रखने में निहित है। AI की क्षमताएं मानव विशेषज्ञता के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती हैं, बशर्ते इसका उपयोग नैतिक और सुरक्षित तरीके से किया जाए।

भविष्य की साइबर सुरक्षा: AI बनाम AI

AI ने साइबर अपराध की गति और उसके प्रभाव के पैमाने दोनों को नाटकीय रूप से बढ़ा दिया है। अब खतरा केवल पारंपरिक रूप से कुशल हैकर्स तक ही सीमित नहीं रह गया है; AI उन व्यक्तियों की क्षमता को भी कई गुना बढ़ा सकती है जिनके पास साइबर सुरक्षा का गहन ज्ञान या विशेषज्ञता नहीं है। यही वह महत्वपूर्ण कारण है जिसके चलते आने वाले समय में साइबर सुरक्षा की लड़ाई केवल 'मानव बनाम हैकर' की न रहकर, 'AI बनाम AI' की लड़ाई में तब्दील हो सकती है, जहाँ सुरक्षा प्रणालियों को भी AI की मदद से ही संचालित करना होगा।