अगस्त में दो ग्रहण: 12 को सूर्य, 28 को चंद्र ग्रहण, भारत में नहीं दिखेंगे
अगस्त 2026 में विश्व में दो बड़े खगोलीय घटनाएं होने वाली हैं। 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण पड़ेगा। हालांकि,...

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 10 अगस्त 2026
अगस्त माह में विश्व स्तर पर खगोल प्रेमियों के लिए दो महत्वपूर्ण घटनाएं होने वाली हैं। ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को एक खग्रास सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त 2026 को एक पूर्ण चंद्र ग्रहण घटित होगा। ये दोनों ग्रहण भारतीय समयानुसार घटित होंगे, लेकिन दुर्भाग्यवश, ये भारत में दृश्यमान नहीं होंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार, 12 अगस्त को होने वाला सूर्य ग्रहण एक खग्रास ग्रहण होगा। इसका प्रारंभ भारतीय मानक समय के अनुसार रात्रि 9:02 बजे होगा और मोक्ष रात्रि 1:26 बजे होगा। यह ग्रहण पश्चिमी यूरोप, पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, ग्रीनलैंड, प्रशांत महासागर, आइसलैंड, अफ्रीका के पश्चिमोत्तर भाग, कनाडा के उत्तरी क्षेत्र और रूस जैसे देशों में दिखाई देगा। सूर्य ग्रहण के पूर्ण खग्रास होने के कारण, प्रभावित क्षेत्रों में कुछ समय के लिए पूर्ण अंधकार छा जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध का विषय
इसके ठीक 16 दिन बाद, 28 अगस्त 2026 को, श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर एक पूर्ण चंद्र ग्रहण पड़ेगा। यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। यह एशिया, यूरोप, अटलांटिक महासागर, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अफ्रीका, अमेरिका और ग्रीनलैंड सहित विस्तृत भौगोलिक क्षेत्रों में दृश्यमान होगा। ग्रहण का प्रारंभ भारतीय समयानुसार दिन में 8:04 बजे होगा और मोक्ष दिन में 11:22 बजे होगा। दोनों ही ग्रहणों का भारत में दिखाई न देना इस बात का संकेत है कि यहां सूतक आदि के कोई नियम मान्य नहीं होंगे।
ज्योतिषीय व्याख्या और संभावित प्रभाव
पंडित विनोद गौतम ने 15 दिन के अंतराल में दो ग्रहणों के पड़ने को चिंताजनक बताया है। उनके अनुसार, यह स्थिति शुभ नहीं मानी जाती और इससे प्रभावित क्षेत्रों में विध्वंसक भूकंप, प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट की आशंका बढ़ जाती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा से निकलने वाली ऊर्जा शक्ति बाधित होती है, जिसका प्रभाव पृथ्वी पर प्रकृति, जीव-जंतुओं और मानव जीवन पर पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप सुनामी और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इन ग्रहणों का विश्व परिदृश्य में शोध का विषय बनना निश्चित है।
