अगस्त 2026: सावन, तीज, रक्षाबंधन संग दो ग्रहणों का अनूठा संगम
अगस्त 2026 में सावन सोमवार, तीज, नाग पंचमी, ओणम, रक्षाबंधन जैसे त्योहार मनाए जाएंगे। वहीं, 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 28 को चंद्र ग्रहण भी होगा।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 1 अगस्त 2026
वर्ष 2026 का अगस्त माह भारतीय पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। यह महीना न केवल कई प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों का साक्षी बनेगा, बल्कि खगोलीय घटनाओं की दृष्टि से भी यह विशेष है, क्योंकि इसमें दो ग्रहणों का दुर्लभ संयोग भी पड़ रहा है। भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन माह के साथ-साथ इस महीने में हरियाली तीज, नाग पंचमी, ओणम और रक्षाबंधन जैसे बड़े पर्वों को बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा।
धार्मिक अनुष्ठानों के बीच, 12 अगस्त को एक पूर्ण सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को एक आंशिक चंद्र ग्रहण होने वाला है, जो इस महीने को और भी महत्वपूर्ण बना रहा है। यह खगोलीय और धार्मिक घटनाओं का संगम देश भर में उत्साह का माहौल तैयार कर रहा है।
सावन माह और प्रमुख व्रतों का कैलेंडर
अगस्त 2026 में सावन मास के चार सोमवार पड़ रहे हैं, जो भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। इस दौरान जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की विशेष परंपरा निभाई जाती है। सावन के सोमवारों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी इस महीने में पड़ेंगे।
अगस्त 2026 में सावन और प्रमुख व्रत-त्योहारों की तिथियां इस प्रकार हैं:
- 3 अगस्त (सोमवार): सावन का पहला सोमवार व्रत
- 10 अगस्त (सोमवार): सावन का दूसरा सोमवार और सोम प्रदोष व्रत
- 11 अगस्त (मंगलवार): सावन शिवरात्रि
- 12 अगस्त (बुधवार): सावन/हरियाली अमावस्या
- 15 अगस्त (शनिवार): हरियाली तीज (स्वतंत्रता दिवस के साथ)
- 17 अगस्त (सोमवार): सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी
- 24 अगस्त (सोमवार): सावन का चौथा सोमवार
- 26 अगस्त (बुधवार): ओणम का पावन पर्व
- 28 अगस्त (शुक्रवार): रक्षाबंधन एवं श्रावण पूर्णिमा
सावन मास, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना है और यह भगवान शिव को समर्पित है। इस पूरे महीने भक्त भगवान शिव की विशेष आराधना करते हैं, जिसमें सोमवार का विशेष महत्व होता है। अगस्त 2026 में, सावन मास के चार सोमवार क्रमशः 3, 10, 17 और 24 अगस्त को पड़ रहे हैं। इन दिनों में भक्त सूर्योदय से पूर्व स्नान करके, शिव मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल अर्पित करते हैं। जलाभिषेक के साथ-साथ रुद्राभिषेक और शिव चालीसा का पाठ भी किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, 10 अगस्त को सावन का दूसरा सोमवार सोम प्रदोष व्रत के साथ पड़ रहा है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा, जो शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। अगले दिन, 12 अगस्त को सावन/हरियाली अमावस्या का संयोग बन रहा है, जो पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण है।
रक्षाबंधन 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
भाई-बहन के अटूट प्रेम और रक्षा के बंधन का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में, पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे से प्रारंभ होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे तक रहेगा। सनातन परंपरा में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
राखी बांधने के शुभ मुहूर्त का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। 27 अगस्त को भद्रा काल समाप्त हो जाएगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है। इसके पश्चात, 28 अगस्त को सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 09:48 बजे तक का समय राखी बांधने के लिए सबसे उत्तम और शुभ माना जा रहा है। इस अवधि में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी और उनकी दीर्घायु व सुख-समृद्धि की कामना करेंगी, वहीं भाई अपनी बहनों को रक्षा का वचन देंगे।
अगस्त 2026 में दो ग्रहणों का योग
धार्मिक उत्सवों के इस माह में दो महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं, यानी ग्रहणों का होना, इसे और भी विशेष बना रहा है। यह संयोग दुर्लभ माना जाता है। इन ग्रहणों की तारीखें और संभावित प्रभाव इस प्रकार हैं:
पूर्ण सूर्य ग्रहण (12 अगस्त 2026): यह ग्रहण सावन अमावस्या के दिन पड़ेगा, जो कि 12 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। हालांकि, यह ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप, उत्तरी अमेरिका और आर्कटिक क्षेत्रों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। भारत में इसके दिखाई न देने के कारण, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल प्रभावी नहीं होगा। अतः, भारत में इस ग्रहण से संबंधित कोई विशेष धार्मिक अनुष्ठान या परहेज करने की आवश्यकता नहीं होगी।
आंशिक चंद्र ग्रहण (28 अगस्त 2026): यह ग्रहण श्रावण पूर्णिमा, जो कि रक्षाबंधन का दिन है, यानी 28 अगस्त 2026 को घटित होगा। भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण सुबह लगभग 06:53 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। परंतु, भारत में यह ग्रहण दिन के समय होने के कारण दिखाई नहीं देगा। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण केवल तभी प्रभावी माना जाता है जब वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे। इसलिए, सूर्य ग्रहण की तरह ही, इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा। इसका अर्थ है कि रक्षाबंधन के सभी पारंपरिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा या नकारात्मक प्रभाव के सम्पन्न हो सकेंगे।
मुख्य पर्वों का महत्व
हरियाली तीज (15 अगस्त): सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह कठिन व्रत रखती हैं। यह पर्व प्रकृति के हरे-भरे श्रृंगार का भी उत्सव है, जब चारों ओर हरियाली छा जाती है। महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनकर, मेहंदी लगाकर और झूले झूलकर इस पर्व को मनाती हैं। इस वर्ष हरियाली तीज स्वतंत्रता दिवस के साथ पड़ रही है, जो इसे एक अतिरिक्त राष्ट्रीय उल्लास प्रदान करेगा।
नाग पंचमी (17 अगस्त): यह पर्व नाग देवताओं की पूजा के लिए समर्पित है। हिन्दू धर्म में नागों को पूजनीय माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने से कालसर्प दोष का निवारण होता है और जीवन में सुरक्षा व समृद्धि प्राप्त होती है। इस दिन नागों को दूध पिलाने की भी परंपरा है।
ओणम (26 अगस्त): यह दक्षिण भारत, विशेषकर केरल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उल्लासपूर्ण सांस्कृतिक उत्सव है। ओणम का पर्व पौराणिक राजा महाबली के स्वागत में मनाया जाता है, जिनकी वापसी का यह पर्व प्रतीक है। इस दौरान पुष्प कोलम (रंगोली), पारंपरिक खेल, नौका दौड़ और विस्तृत दावत (ओणम सद्या) का आयोजन किया जाता है। यह फसल उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।
रक्षाबंधन (28 अगस्त): यह पर्व भाई-बहन के पवित्र और स्नेहपूर्ण रिश्ते को समर्पित है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र (राखी) बांधकर उनकी सुख-समृद्धि, लंबी आयु और उनके जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करने की कामना करती हैं। इसके बदले में, भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उन्हें सदैव उनकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। यह एक ऐसा पर्व है जो पारिवारिक संबंधों को और भी मजबूत बनाता है।
संक्षेप में, अगस्त 2026 भक्ति, परंपराओं, सांस्कृतिक उल्लास और खगोलीय घटनाओं के एक अनूठे संगम के साथ पूरे देश में आस्था, प्रेम और उत्साह का संचार करेगा। सावन के पवित्र महीने में पड़ने वाले त्योहार और ग्रहणों का यह अनूठा मेल वर्ष 2026 के अगस्त माह को अत्यंत स्मरणीय बना देगा।
