भोपाल में सख्त हुई निगम प्रशासन की सफाई मुहिम, एक दिन में ₹97,900 का जुर्माना वसूला गया
निर्माण मलबा और कचरा फेंकने वालों पर भोपाल नगर निगम का बड़ा एक्शन, कमिश्नर संस्कृती जैन के निर्देशों के बाद 15 दिन में शहर से...
निर्माण मलबा और कचरा फेंकने वालों पर भोपाल नगर निगम का बड़ा एक्शन, कमिश्नर संस्कृती जैन के निर्देशों के बाद 15 दिन में शहर से हटेगा पूरा सीएंडडी वेस्ट।
शहर की सड़कों पर चला सफाई का सर्जिकल स्ट्राइक
भोपाल नगर निगम (BMC) ने रविवार को स्वच्छता अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए निर्माण एवं विध्वंस (C&D) मलबा और कचरा फेंकने वालों पर सख्त जुर्माना लगाया। निगम ने एक ही दिन में कुल ₹97,900 का जुर्माना वसूला, जिसमें अकेले ₹52,250 की वसूली 40 मामलों में की गई जहाँ ठेकेदारों और नागरिकों को सार्वजनिक स्थलों पर मलबा डालते पकड़ा गया।
यह अभियान कमिश्नर संस्कृती जैन के हालिया निर्देशों का हिस्सा है, जिनमें उन्होंने सभी जोनों को 15 दिन के भीतर शहर से निर्माण मलबा हटाने और सड़क झाड़ने के बाद तत्काल कचरा उठाने का आदेश दिया था।
सबसे ज्यादा मामले ज़ोन 14 में दर्ज
निगम के आंकड़ों के अनुसार, ज़ोन 14 में सबसे अधिक 13 मामले दर्ज किए गए, जिनमें ₹17,500 का जुर्माना लगाया गया। इसके बाद ज़ोन 10 में ₹11,000 और ज़ोन 18 में ₹6,000 का दंड वसूला गया।
अधिकारियों का कहना है कि कई बार निर्माण कार्यों के दौरान ठेकेदार जानबूझकर सड़कों के किनारे मलबा डाल देते हैं, जिससे न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित होती है बल्कि धूल प्रदूषण और यातायात बाधाएं भी बढ़ती हैं।
कचरा फैलाने वालों पर भी कार्रवाई
निर्माण मलबे के अलावा, निगम की स्वास्थ्य शाखा ने सामान्य सफाई उल्लंघनों पर भी त्वरित एक्शन लिया। रविवार को 212 मामलों में ₹45,650 के स्पॉट फाइन लगाए गए। इनमें सड़क पर कचरा फेंकना, गंदगी फैलाना और डस्टबिन का उपयोग न करना जैसी शिकायतें शामिल थीं।
स्वच्छता निरीक्षक दलों ने बताया कि यह कार्रवाई न केवल दंडात्मक है बल्कि नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास है।
कमिश्नर के निर्देशों से तेज़ हुई कार्रवाई
हाल ही में आयोजित स्मार्ट सिटी बोर्ड बैठक में कमिश्नर संस्कृती जैन ने साफ कहा था कि “शहर की साफ-सफाई पर कोई समझौता नहीं होगा। मलबा हटाना और सफाई व्यवस्था में सुधार प्राथमिकता है।”
उन्होंने यह भी निर्देश दिया था कि सड़क झाड़ने के तुरंत बाद कचरा उठाया जाए ताकि दृश्य रूप से स्वच्छता बनी रहे और धूल उड़ने की समस्या घटे।
शहर की हवा और छवि दोनों दांव पर
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण मलबा और खुले में पड़ा कचरा, भोपाल जैसी बढ़ती आबादी वाले शहरों में धूल प्रदूषण और सांस संबंधी बीमारियों का बड़ा कारण बन रहा है। साफ-सुथरा शहर न केवल नागरिक स्वास्थ्य बल्कि पर्यटन और निवेश के लिए भी सकारात्मक छवि बनाता है।
एक स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा, “निगम की कार्रवाई सही दिशा में है, लेकिन इसे निरंतरता के साथ लागू करना ज़रूरी है ताकि शहर स्थायी रूप से स्वच्छ रह सके।”
आगे की योजना
निगम प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि ठेकेदार या नागरिक मलबा या कचरा फेंकते पाए गए तो उनसे दोगुना जुर्माना वसूला जाएगा और संबंधित निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोका भी जा सकता है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि जल्द ही सभी ज़ोनों में सीएंडडी वेस्ट कलेक्शन प्वाइंट्स की पहचान कर उन्हें सक्रिय किया जाएगा, ताकि लोगों को वैध निस्तारण का विकल्प मिल सके।
