गौतम नगर में चोरी का खुलासा: वीडियो गेम की लत में पड़ोसी के घर से 95 हजार के गहने ले गए दो नाबालिग
गौतम नगर पुलिस ने दो नाबालिग लड़कों द्वारा पड़ोस के घर से चोरी किए गए लगभग 95,000 रुपये मूल्य के सोने–चांदी के गहनों की बरामदगी...

गौतम नगर पुलिस ने दो नाबालिग लड़कों द्वारा पड़ोस के घर से चोरी किए गए लगभग 95,000 रुपये मूल्य के सोने–चांदी के गहनों की बरामदगी करते हुए मामले का सफलतापूर्वक समाधान किया है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों ने यह चोरी महंगे वीडियो गेम और गेमिंग कंसोल खरीदने के लिए की थी। यह घटना समाज में बढ़ती डिजिटल लत और उससे जुड़े जोखिमों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शिकायत पर शुरू हुई जांच
घटना की जानकारी तब सामने आई जब 30 वर्षीय शाहज़ेब खान, जो राम्भा नगर में रहते हैं, ने 22 नवंबर को पुलिस को सूचना दी कि उनके लकड़ी के अलमारी में रखे गहने अचानक गायब हो गए हैं। चोरी हुए सामान में एक सोने की अंगूठी, दो सोने की चूड़ियां, एक नकली अंगूठी, चांदी की पायल और तीन चांदी की बिछिया शामिल थीं।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगाले और स्थानीय स्तर पर पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक जांच में शक की सुई पड़ोस में रहने वाले दो किशोरों पर गई।
नए बस स्टैंड से पकड़े गए आरोपी बच्चे
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने दोनों नाबालिगों को नए बस स्टैंड क्षेत्र से खोज निकाला। गौतम नगर पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान बच्चों ने स्वीकार किया कि उनका इरादा किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने का नहीं था। वे केवल वीडियो गेम की लत को पूरा करने के लिए गहने बेच कर पैसे जुटाना चाहते थे।
अधिकारी के अनुसार, “किशोरों ने बताया कि वे ऑनलाइन वीडियो गेम और नए कंसोल खरीदने के लिए काफी समय से पैसे तलाश रहे थे। आवेग में आकर उन्होंने गलत कदम उठाया।”
पूरे गहने बरामद, मामला बाल कल्याण समिति को सौंपा
किशोरों के बयान के आधार पर पुलिस ने सभी चोरी हुए सामान को बरामद कर लिया है। बरामदगी में करीब 95,000 रुपये मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण शामिल हैं। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
दोनों नाबालिगों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया गया है, जहां उनके पुनर्वास और परामर्श की व्यवस्था की जाएगी।
डिजिटल लत पर उठे गंभीर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों और किशोरों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग निर्भरता कई बार उन्हें जोखिम भरे व्यवहार की ओर धकेल देती है। डिजिटल सुरक्षा पर कार्य करने वाले मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, माता-पिता की जागरूकता और बच्चों पर उचित निगरानी आवश्यक है ताकि ऐसे मामलों को रोका जा सके।
