89% रेलवे स्टेशनों पर न्यूनतम सुविधाओं का अभाव, ऑडिट रिपोर्ट ने खोली पोल
देशभर के 512 रेलवे स्टेशनों की ऑडिट रिपोर्ट में 458 स्टेशनों पर यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाओं की गंभीर कमी पाई गई है। पेयजल गुणवत्ता, स्वच्छता, चिकित्सा सुविधा और दिव्यांगजनों के इंतजाम पर उठे सवाल।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 अगस्त 2026
रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच एक हालिया ऑडिट रिपोर्ट ने जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश भर के 16 रेलवे जोन के 512 चयनित गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 458 स्टेशन, यानी कुल स्टेशनों का 89 प्रतिशत से अधिक, यात्रियों के लिए निर्धारित न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं में एक या उससे अधिक कमी से जूझ रहे हैं। केवल 54 स्टेशन ही ऐसे पाए गए, जहां जांच के दौरान सभी आवश्यक सुविधाएं न्यूनतम मानकों के अनुरूप मिलीं।
यह रिपोर्ट सिर्फ सुविधाओं की कमी की ओर ही इशारा नहीं करती, बल्कि कई स्टेशनों पर पीने के पानी की गुणवत्ता, शौचालयों की स्थिति, चिकित्सा सुविधाओं, दिव्यांग यात्रियों के लिए इंतजाम, निर्माण कार्यों में देरी और यात्री सुविधाओं के लिए आवंटित बजट के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त करती है।
बुनियादी सुविधाओं में भारी कमी
रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की बुनियादी जरूरतों में पंखे, पीने का साफ पानी, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, सुलभ शौचालय, प्लेटफॉर्म शेड और वाटर कूलर जैसी सुविधाएं प्रमुख हैं। लेकिन ऑडिट में बड़ी संख्या में स्टेशनों पर इन सुविधाओं का निर्धारित स्तर नहीं पाया गया।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जांचे गए स्टेशनों में लगभग 42 प्रतिशत पर पंखों की कमी या उनकी अपर्याप्तता देखी गई। करीब 40 प्रतिशत स्टेशनों पर वाटर कूलर की व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं थी। लगभग 27 प्रतिशत स्टेशनों पर पीने के पानी के नल या तो अपर्याप्त थे या अनुपस्थित पाए गए, जबकि करीब 22 प्रतिशत स्टेशनों पर मूत्रालयों की सुविधा में कमी दर्ज की गई। चिंता की बात यह है कि यह कमी सिर्फ छोटे स्टेशनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिक आय और यात्री संख्या वाले कई बड़े स्टेशनों पर भी आवश्यक सुविधाओं में खामियां पाई गई हैं।
पेयजल की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता
रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी को लेकर सामने आई स्थिति ने यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी चिंता बढ़ा दी है। जांच के दौरान कई स्थानों पर पेयजल के नमूनों में कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया और ई-कोलाई जैसे हानिकारक जीवाणुओं की मौजूदगी का पता चला। कुछ स्टेशनों पर वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में भी बैक्टीरियल प्रदूषण पाया गया। पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की मात्रा को लेकर भी कई स्थानों पर निर्धारित मानकों का पालन नहीं हुआ। यह स्थिति दर्शाती है कि केवल पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पानी की नियमित जांच, वाटर कूलर की सफाई और जलापूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी भी अत्यंत आवश्यक है।
चिकित्सा और दिव्यांग सुविधाओं में अभाव
ऑडिट में चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। करीब 441 स्टेशनों पर आपातकालीन चिकित्सा कक्ष या अनुशंसित मेडिकल बॉक्स जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं पाई गईं। ऐसे में किसी आपात स्थिति में यात्रियों को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं, खासकर बुजुर्ग यात्रियों, बच्चों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले यात्रियों के लिए।
इसी प्रकार, दिव्यांग यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में भी व्यापक कमी सामने आई। कई स्टेशनों पर रैंप, दिव्यांग-अनुकूल शौचालय, सुगम पेयजल व्यवस्था, लिफ्ट, टैक्टाइल पाथ और उचित सूचना प्रणाली जैसी सुविधाएं या तो अधूरी थीं या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थीं। इससे उन यात्रियों को विशेष परेशानी होती है, जिन्हें स्टेशन परिसर में आवाजाही के लिए अधिक सहायता की आवश्यकता होती है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि कई स्टेशनों पर ये सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद उनका रखरखाव या संचालन प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा था।
निर्माण कार्यों में देरी और बजट का अनुचित उपयोग
यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए रेलवे द्वारा कराए जा रहे निर्माण और विकास कार्यों की गति भी सवालों के घेरे में है। 2019-20 से 2023-24 के दौरान 395 यात्री सुविधा कार्यों की समीक्षा में पाया गया कि लगभग 59 प्रतिशत कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे नहीं हो सके। केवल 41 प्रतिशत कार्य ही तय समय पर पूरे किए जा सके, जबकि कई परियोजनाओं में एक वर्ष से लेकर चार वर्ष या उससे अधिक तक की देरी हुई। काम में देरी के पीछे खराब योजना, सामग्री की उपलब्धता में परेशानी, कुशल श्रमिकों की कमी और ठेकेदारों से जुड़ी समस्याएं जैसे कारण सामने आए।
इसके अतिरिक्त, यात्री सुविधाओं के लिए आवंटित बजट के उपयोग पर भी सवाल उठाए गए हैं। 2019-20 से 2023-24 के बीच यात्री सुविधाओं के लिए उपलब्ध बजट का 36 से 44 प्रतिशत तक हिस्सा कई वर्षों में खर्च नहीं हो पाया। यह स्थिति दर्शाती है कि समस्या केवल धन की कमी की नहीं है, बल्कि योजना बनाने, प्राथमिकता तय करने, काम शुरू कराने, निगरानी करने और परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने की प्रक्रिया में भी खामियां दिखाई देती हैं।
स्वच्छता व्यवस्था में भी गंभीर कमियां
स्टेशन परिसर की स्वच्छता व्यवस्था भी जांच के दायरे में रही। कई स्टेशनों पर शौचालयों की हालत खराब मिली; कहीं सीटें टूटी थीं तो कहीं दरवाजे खराब। कुछ स्थानों पर शौचालयों की नियमित सफाई और रखरखाव की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। प्रतीक्षालय, फुटओवर ब्रिज और प्लेटफॉर्म के आसपास भी सफाई से जुड़ी कमियां दर्ज की गईं। कई स्थानों पर पान और गुटखे के दाग दिखाई दिए, जबकि कुछ स्टेशनों पर खुले में शौच की स्थिति भी सामने आई। ऐसे हालात यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ स्टेशन की स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी चुनौती पैदा करते हैं।
मध्य प्रदेश के प्रमुख स्टेशनों की स्थिति
मध्य प्रदेश के रेलवे स्टेशनों की स्थिति भी इस तस्वीर से अछूती नहीं है। प्रदेश के प्रमुख रेलवे केंद्रों में शामिल भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और रतलाम जैसे स्टेशनों पर विभिन्न यात्री सुविधाओं से जुड़ी कमियां दर्ज की गईं। वहीं, इंदौर रेलवे स्टेशन उन चुनिंदा 54 स्टेशनों में शामिल रहा, जहां जांच के दौरान निर्धारित न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के स्तर पर कोई कमी नहीं पाई गई। हालांकि, यह आकलन केवल ऑडिट में जांचे गए विशेष न्यूनतम मानकों के आधार पर किया गया था।
समस्या प्रणालीगत, समाधान की तत्काल आवश्यकता
ऑडिट में सामने आए आंकड़े स्पष्ट रूप से इंगित करते हैं कि रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की कमी किसी एक स्टेशन या रेलवे जोन की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक और प्रणालीगत समस्या है। रेलवे के पास निर्धारित मानक, बजट और निगरानी की व्यवस्था होने के बावजूद, बड़ी संख्या में स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव क्रियान्वयन व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
रोजाना करोड़ों यात्रियों को सेवा प्रदान करने वाले रेलवे के लिए स्टेशन पर उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि यात्री सेवा का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। पानी, शौचालय, बैठने की जगह, पंखे, चिकित्सा सहायता और दिव्यांग यात्रियों के लिए रैंप जैसी सुविधाओं का समय पर उपलब्ध होना यात्रियों की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ऑडिट रिपोर्ट रेलवे के सामने एक स्पष्ट चुनौती पेश करती है। अब जरूरत केवल नई योजनाओं की घोषणा की नहीं, बल्कि पहले से निर्धारित सुविधाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, बजट का प्रभावी इस्तेमाल करने और हर स्टेशन पर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की है, ताकि करोड़ों यात्रियों को उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें।
