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सेंसेक्स में 830 अंकों की भारी उछाल! अमेरिकी-ईरान समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, निफ्टी भी ऊपर

अमेरिकी-ईरान शांति समझौते की संभावना से सेंसेक्स 830 अंक ऊपर, निफ्टी में भी उछाल। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई कम होने की...

May 25
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सेंसेक्स में 830 अंकों की भारी उछाल! अमेरिकी-ईरान समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, निफ्टी भी ऊपर

मुख्य बातें

सेंसेक्स में 830 अंकों का उछाल आया और निफ्टी भी 230 अंक ऊपर चढ़ा, जिसके पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरें हैं।

अमेरिका-ईरान के बीच समझौता होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता कम हो सकती है।

कच्चे तेल की कीमतें कम होने से भारत में ईंधन की लागत घट सकती है और संभावित रूप से महंगाई भी कम हो सकती है। इससे भारतीय इक्विटी बाजार में निवेशकों, ईंधन पर निर्भर उपभोक्ताओं और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।

बाजार में शुरुआती उछाल

भारतीय इक्विटी बेंचमार्क सोमवार को तेजी के साथ खुले, जिसके पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बढ़ती आशा थी।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 800 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि निफ्टी में 200 अंक से अधिक की तेजी आई।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई और इस महीने पहली बार यह 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा था।

अमेरिकी कच्चे तेल में 8% से अधिक की गिरावट आई, जबकि ब्रेंट क्रूड 5% से अधिक गिर गया, जिसके पीछे अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती संभावना है।

विशेषज्ञ विश्लेषण: बॉन्ड बाजार की चिंताएं

जिराफ के सह-संस्थापक विनीत अग्रवाल ने भारतीय बॉन्ड बाजार की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा, "भारतीय बॉन्ड बाजार इस सप्ताह सतर्क रहा, 10-वर्षीय जी-सेक उपज 7% से ऊपर के उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा है, जिसके पीछे वैश्विक महंगाई और भू-राजनीतिक अनिश्चितता की लगातार चिंताएं हैं।"

अग्रवाल ने कहा कि ईरान-अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने आयातित मुद्रास्फीति के जोखिमों के बारे में बाजारों को चिंतित रखा है, जिससे विश्व स्तर पर आक्रामक मौद्रिक सहजता की गुंजाइश सीमित हो गई है।

अमेरिकी ट्रेजरी की पैदावार में तेज वृद्धि, अमेरिका में 10-वर्षीय उपज 4.5% से ऊपर रहने से भारत सहित उभरते बाजार ऋण धारणा पर भी असर पड़ा है।

स्थिर घरेलू तरलता स्थितियों के बावजूद, निवेशक उच्च वैश्विक पैदावार और ऊर्जा की कीमतों के कारण सतर्क हैं जो बॉन्ड बाजारों पर दबाव डाल रहे हैं।

भविष्य का बाजार दृष्टिकोण

अग्रवाल के अनुसार, भारतीय उपज वक्र से पता चलता है कि बाजारों को उम्मीद है कि दरें लंबे समय तक ऊंची रहेंगी। व्यापारी भविष्य की दिशा के लिए कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की टिप्पणी और घरेलू मुद्रास्फीति के रुझानों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

आगे क्या देखना है

निवेशक अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के विकास और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर इसके प्रभाव पर बारीकी से नजर रखेंगे।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की टिप्पणी और आगामी घरेलू मुद्रास्फीति के आंकड़े भी आने वाले दिनों में बाजार की धारणा को आकार देने में महत्वपूर्ण होंगे।