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रेलवे के खाने में सफाई के लिए आईआरसीटीसी का बड़ा कदम; 800 बेस किचन में लगाए एआई और 2,300 से ज्यादा कैमरे

भारतीय रेलवे (आईआरसीटीसी) ने यात्रियों को सुरक्षित और साफ भोजन देने के लिए अपने 800 से अधिक बेस किचन को एआई कैमरा नेटवर्क से जोड़...

Jun 4
4 मिनट में पढ़ें
रेलवे के खाने में सफाई के लिए आईआरसीटीसी का बड़ा कदम; 800 बेस किचन में लगाए एआई और 2,300 से ज्यादा कैमरे

मुख्य बातें (Top Summary):

  • क्या हुआ: आईआरसीटीसी ने भोजन की साफ-सफाई की 24 घंटे निगरानी के लिए 800 से अधिक बेस किचन को एआई-संचालित कैमरा नेटवर्क से जोड़ा है।
  • यह क्यों मायने रखता है: यह ऑटोमैटिक सिस्टम कीड़ों-मकौड़ों, गंदगी और कर्मचारियों द्वारा नियमों के उल्लंघन का तुरंत पता लगा लेता है।
  • क्या बदलेगा: रेल यात्रियों को यात्रा के दौरान अधिक सुरक्षित, कड़ी निगरानी में तैयार और साफ-सुथरा भोजन मिलेगा।
  • कौन प्रभावित होगा: भारतीय रेलवे नेटवर्क पर यात्रा करने वाले रोजाना लाखों यात्री और आईआरसीटीसी के रसोई संचालक।

रेलवे के भोजन के लिए हाई-टेक वॉर रूम

भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने अपनी निगरानी प्रणाली को काफी मजबूत किया है। नई दिल्ली में बने एक केंद्रीय वॉर रूम से अब देश भर के 800 से अधिक बेस किचन में सक्रिय 2,394 एआई-आधारित कैमरों की निगरानी की जा रही है।

यह ऑटोमैटिक सिस्टम तब लागू किया गया है जब आईआरसीटीसी बड़े पैमाने पर काम करते हुए रोजाना लगभग 18 लाख भोजन (मील) परोस रहा है। इसका मतलब है कि वंदे भारत और राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों सहित 1,453 ट्रेनों में सालाना लगभग 60 करोड़ भोजन परोसे जा रहे हैं।

कीड़े-मकौड़ों और नियमों के उल्लंघन की पहचान

यह एआई सिस्टम एक ऑटोमैटिक इंस्पेक्टर की तरह काम करता है, जो खाद्य सुरक्षा से जुड़े नौ अलग-अलग तरह के उल्लंघनों की पहचान करने में सक्षम है। यह चूहे, कॉकरोच और केवल 7 से 8 मिलीमीटर जितने छोटे कीड़ों का भी पता लगा सकता है।

इसके अलावा, ये कैमरे कर्मचारियों के व्यवहार पर भी नजर रखते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि रसोई में काम करने वाले लोग हेयरनेट (सिर को ढकने वाली जाली) और पारदर्शी दस्ताने पहनें। साथ ही, समय-समय पर पोछा लगाने और साफ-सफाई की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाती है।

आईआरसीटीसी के एक अधिकारी ने बताया कि सबसे ज्यादा उल्लंघन कर्मचारियों द्वारा ठीक से हेयरनेट न पहनने का सामने आता है। यह सिस्टम रोजाना औसतन 350 अलर्ट भेजता है, और अकेले पिछले महीने में ही इसने 13,550 अलर्ट दर्ज किए हैं।

इन अलर्ट का क्षेत्रीय विवरण दिखाता है कि नियमों के उल्लंघन के मामले कहाँ सबसे ज्यादा थे:

  • उत्तरी क्षेत्र (Northern Region): 4,123 टिकट
  • पूर्वी क्षेत्र (Eastern Region): 3,205 टिकट
  • पश्चिमी क्षेत्र (Western Region): 2,687 टिकट
  • दक्षिण मध्य क्षेत्र (South Central Region): 2,226 टिकट
  • दक्षिणी क्षेत्र (Southern Region): 1,309 टिकट

त्वरित कार्रवाई और त्रुटि की गुंजाइश

जैसे ही सिस्टम किसी गड़बड़ी को पकड़ता है, यह तुरंत रसोई प्रबंधक को अलर्ट भेज देता है। यदि समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह मामला बड़े अधिकारियों तक पहुंच जाता है, जिसके तहत दो घंटे के भीतर जुर्माना या सुधार की उम्मीद की जाती है।

बेहद सटीक होने के बावजूद, इस सिस्टम में गलत अलर्ट की दर 10 प्रतिशत है। उदाहरण के लिए, यदि किसी शेफ का हेयरनेट थोड़ा ऊपर खिसक जाता है, तो सख्त एआई कोड इसे पूरी तरह से नियम का उल्लंघन मान लेता है।

मौसम के बदलाव के दौरान गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस समय खाना खराब होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। नियमों को कड़ाई से लागू करने के लिए, रेल मंत्रालय ने हाल ही में वंदे भारत ट्रेन में खराब गुणवत्ता वाला दही परोसने के लिए आईआरसीटीसी पर 10 लाख रुपये और एक निजी ठेकेदार पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

"इसका उद्देश्य रियल-टाइम में नियमों का पालन, गुणवत्ता नियंत्रण और तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित खानपान सेवाएं मिल सकें।"

आगे किस पर रहेगी नज़र

आईआरसीटीसी इस एआई नेटवर्क का लगातार विस्तार करने की योजना बना रहा है, जिसमें अधिक रसोइयों को जोड़ना और गड़बड़ियों की एक बड़ी सूची को सिस्टम में शामिल करना शामिल है। अब विश्लेषकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या ये सख्त निगरानी उपाय यात्रियों की खानपान संबंधी शिकायतों को कम कर पाते हैं, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में 6,645 दर्ज की गई थीं।