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80 वर्ष आयु पर 20% अतिरिक्त पेंशन: मप्र शासन की पुनर्विचार याचिका खारिज

मध्य प्रदेश के पेंशनरों को 80 साल की उम्र पूरी होने पर 20% अतिरिक्त पेंशन मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है, जिससे पेंशनर्स की जीत हुई है।

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80 वर्ष आयु पर 20% अतिरिक्त पेंशन: मप्र शासन की पुनर्विचार याचिका खारिज

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 8 सितंबर 2026

मध्य प्रदेश के उन पेंशनरों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है जो 80 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं। राज्य सरकार द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद, उच्च न्यायालय ग्वालियर के उस निर्णय की प्रामाणिकता फिर से स्थापित हो गई है, जो 80 वर्ष की आयु में प्रवेश की तारीख से 20% अतिरिक्त पेंशन का लाभ प्रदान करने का आदेश देता है। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस फैसले का स्वागत करते हुए राज्य सरकार से तत्काल आदेश जारी कर इस लाभ को सभी पात्र पेंशनरों पर समान रूप से लागू करने की मांग की है।

पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने बताया कि ग्वालियर उच्च न्यायालय ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए 80 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पेंशनरों को 20% अतिरिक्त पेंशन देने का आदेश दिया था। इस फैसले के विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP(C) 2414/2024) दायर की थी, जिसे 17 सितंबर 2024 को न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके बाद, राज्य सरकार ने एक बार फिर पुनर्विचार याचिका (Review Petition Diary No.59076/2024) दायर की, जिसे 20 मार्च 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने भी खारिज कर दिया।

न्यायिक निर्णय से पेंशनरों को मिला अधिकार

एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार की दोनों याचिकाओं को खारिज करने के बाद, उच्च न्यायालय ग्वालियर का मूल निर्णय (रिट याचिका क्रमांक-7424/2022) अब पूरी तरह से प्रभावी हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा उठाए गए विवाद का न्यायिक समाधान हो चुका है, इसलिए वृद्ध पेंशनरों को उनके वैधानिक और न्यायिक अधिकार के लिए बार-बार न्यायालय की शरण लेने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। एसोसिएशन का मानना है कि शासन को सभी पात्र पेंशनरों पर इस निर्णय को समान रूप से लागू करना चाहिए, बजाय इसके कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से न्याय के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़े।

तत्काल आदेश जारी करने की मांग

भोपाल जिले के अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय को पेंशनरों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अतिशीघ्र आदेश जारी किए जाएं ताकि पेंशनरों को उनका देय लाभ मिल सके। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संतोष ठाकुर, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, सचिव रामगोपाल माथुर, यशवंत सिंह बैस, संयुक्त सचिव शकुन्तला वर्मा, एवं कार्यकारिणी सदस्य संगीता श्रीवास्तव और अनिल पाण्डे ने भी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करने और पूर्व में वंचित रहे सभी पेंशनरों को एरियर का भुगतान समय-सीमा में करने की अपील की है।