भोपाल-इंदौर मेट्रोपॉलिटन विकास योजना पर सुस्ती: 75 दिन बाद भी नियम अधिसूचित नहीं, प्राधिकरण गठन अटका
नियमों के बिना अटका अधिनियम का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश में पारित ‘मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रीय नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025’ पर अमल की प्रक्रिया फिलहाल ठप पड़ी है।...

नियमों के बिना अटका अधिनियम का क्रियान्वयन
मध्यप्रदेश में पारित ‘मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रीय नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025’ पर अमल की प्रक्रिया फिलहाल ठप पड़ी है। विधानसभा से मंजूरी को 75 दिन से अधिक बीत चुके हैं, मगर राज्य सरकार ने अब तक इसके नियम तैयार नहीं किए हैं और न ही मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण या नियोजन समितियों का गठन किया है।
अधिनियम का उद्देश्य भोपाल और इंदौर जैसे महानगरीय क्षेत्रों में संवेदनशील, सुनियोजित और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। इसके तहत इन क्षेत्रों की भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुसार दीर्घकालिक विकास योजनाएँ तैयार की जानी हैं।
इंदौर थोड़ा आगे, भोपाल अब भी प्रारंभिक स्तर पर
शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग (UADD) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने पहले कदम के रूप में एक परामर्शदाता फर्म नियुक्त की है, जिसने महानगरीय क्षेत्र की सीमाएँ परिभाषित करने संबंधी प्रारंभिक रिपोर्ट भी जमा कर दी है।
इसके विपरीत, भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) अब जाकर परामर्शदाता का चयन कर पाया है। अधिकारी के अनुसार, “नियम अधिसूचित होने के बाद ही अधिनियम के तहत कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो पाएगा।”
आगामी कदम और अपेक्षाएँ
अधिकारियों ने संकेत दिया कि अधिनियम के नियम अगले कुछ महीनों में अधिसूचित किए जा सकते हैं। इसके बाद दोनों महानगरों में मेट्रोपॉलिटन नियोजन समितियाँ और क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण गठित होंगे।
राज्य मंत्रिमंडल ने 20 मई 2025 को इस अधिनियम को मंजूरी दी थी, जिसके तहत दो प्रमुख क्षेत्र—
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इंदौर-उज्जैन-देवास-धार मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र, और
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भोपाल-सीहोर-रायसेन-विदिशा-ब्यावरा (राजगढ़) मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र
—की पहचान की गई थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की थी कि ये समितियाँ स्थानीय जरूरतों और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाएँ तैयार करेंगी। इन योजनाओं में परिवहन, आवास, पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक समेकन जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
क्यों अहम है यह अधिनियम
राज्य सरकार का मानना है कि इस कानून के जरिए महानगरों में अनियोजित विस्तार, अव्यवस्थित ट्रैफिक और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों से निपटा जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसे सही समय पर लागू किया जाए तो यह अधिनियम राज्य की शहरी नीतियों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
शहरी विकास विशेषज्ञ डॉ. अजय मिश्रा के अनुसार, “भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में क्षेत्रीय दृष्टिकोण से विकास योजनाएँ न होने के कारण संसाधनों का संतुलन बिगड़ता है। यह अधिनियम उस असंतुलन को दूर करने की क्षमता रखता है, बशर्ते इसे समयबद्ध रूप से लागू किया जाए।”
निष्कर्ष
राज्य सरकार की मंशा भले ही स्पष्ट हो, लेकिन नियमों और संस्थागत ढांचे की अनुपस्थिति ने इस महत्वपूर्ण पहल की गति को धीमा कर दिया है। यदि आने वाले महीनों में नियम अधिसूचित नहीं हुए, तो मेट्रोपॉलिटन विकास का यह महत्वाकांक्षी खाका केवल कागज़ों तक सीमित रह सकता है।
