जबलपुर के नेहरी गांव में दूषित पानी से 72 लोग बीमार, वाल्व लीक होने से पेयजल में मिली गंदगी
जबलपुर जिले के बड़गी क्षेत्र स्थित नेहरी गांव में दूषित पेयजल की आपूर्ति से बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया। गांव के लगभग 72 लोगों...

जबलपुर जिले के बड़गी क्षेत्र स्थित नेहरी गांव में दूषित पेयजल की आपूर्ति से बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया। गांव के लगभग 72 लोगों में दस्त, उल्टी और पेट दर्द जैसी शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग और पीएचई की टीमों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।
🔍 कैसे हुआ जलसंकट? गड्ढे में डूबे वाल्व से घुसी गंदगी
जांच में सामने आया कि गांव की मुख्य पेयजल पाइपलाइन के एक लीक हो रहे वाल्व के आसपास जमा गंदगी पानी में मिल गई। वाल्व गहरे गड्ढे में होने के कारण उसमें से पाइपलाइन में प्रेशर ड्रॉप के दौरान बाहरी प्रदूषक खिंचकर अंदर पहुँच गए, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो गया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पाइपलाइन में लीक होने पर आसपास की मिट्टी, बैक्टीरिया, वायरस और अन्य रसायन पानी में प्रवेश कर सकते हैं। इस तरह की संदूषण से डायरिया, उल्टी और पेट में तेज दर्द जैसे तीव्र लक्षण उभरते हैं।
🏥 स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि जैसे ही शिकायतें मिलीं, टीमों ने गांव में जाकर सर्वे किया। उन्होंने कहा:
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लीक वाल्व की मरम्मत कर दी गई है।
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स्वास्थ्य विभाग डोर-टू-डोर सर्वे कर रहा है।
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बीमारों को तुरंत दवाइयाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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क्लोरीन टैबलेट और पाउडर हर घर को वितरित किया गया है, ताकि लोग पानी को स्वयं शुद्ध कर सकें।
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गंभीर मरीजों को अस्पताल भेजा जा रहा है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि ग्रामीणों में घबराहट जरूर है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है।
💧 स्वास्थ्य विभाग की सलाह: उबला या क्लोरीनयुक्त पानी ही पिएं
अधिकारियों ने ग्रामीणों को अगले कुछ दिनों तक विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:
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केवल उबला हुआ या क्लोरीन मिलाकर शुद्ध किया गया पानी ही उपयोग करें।
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बच्चों और बुजुर्गों को किसी भी तरह का संदिग्ध पानी बिल्कुल न पिलाएँ।
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यदि दस्त, उल्टी या तेज पेट दर्द के लक्षण दिखें तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें।
📌 क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
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जलस्रोतों के दूषित होने से ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य पर त्वरित और व्यापक प्रभाव पड़ता है।
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पाइपलाइन की नियमित देखरेख न होने पर भविष्य में भी इसी तरह के पानी जनित रोगों के प्रकोप की आशंका रहती है।
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यह घटना ग्रामीण पेयजल संरचना की कमजोरियों और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की जरूरत को उजागर करती है।
