भोपाल में मतदाता सूची संशोधन की रफ्तार तेज़: 66% डिजिटाइजेशन पूरा, बेरेसिया सबसे आगे
भोपाल ज़िले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची अपडेट करने का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सोमवार तक 66% से...

भोपाल ज़िले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची अपडेट करने का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सोमवार तक 66% से अधिक एन्यूमरेशन फ़ॉर्म (EFs) का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है, जबकि बेरेसिया विधानसभा क्षेत्र 93% की प्रगति के साथ शीर्ष पर है। चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को समयबद्ध रखने के लिए समयसीमा को एक सप्ताह बढ़ाते हुए 11 दिसंबर तक बढ़ाया है।
डिजिटाइजेशन की प्रगति: कौन आगे, कौन पीछे?
ज़िला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, सात विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटाइजेशन की स्थिति अलग-अलग है।
-
बेरेसिया – 93.10%
-
हुज़ूर – 69.05%
-
भोपाल उत्तर – 67.99%
-
नरेला – 62.68%
-
भोपाल मध्य – 58.64%
-
गोविंदपुरा – 58.25%
-
भोपाल दक्षिण-पश्चिम – 54.47% (सबसे कम)
यह अंतर विभिन्न इलाकों में फ़ॉर्म संग्रहण और सत्यापन की कठिनाइयों को दर्शाता है। अधिकारियों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में पते बदलने और नागरिकों के अनुपलब्ध रहने के कारण संकलन कार्य अपेक्षाकृत धीमा रहता है।
फ़ॉर्म वितरण लगभग पूरा, पर 5% फ़ॉर्म अब भी ‘अनकलेक्टेबल’
जिले में 98.99% फ़ॉर्म वितरण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। बावजूद इसके, करीब 1.03 लाख फ़ॉर्म (4.86%) ऐसे हैं जिन्हें कलेक्ट नहीं किया जा सका।
-
भोपाल मध्य में अनकलेक्टेबल फ़ॉर्म का प्रतिशत सबसे ज़्यादा — 7.16%
-
नरेला में सबसे कम — 3.28%
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, ये वे फ़ॉर्म हैं जहां मतदाता पते पर उपलब्ध नहीं थे या फ़ॉर्म जमा नहीं कर पाए। यह स्थिति मतदाता सूची की शुद्धता को प्रभावित कर सकती है, इसलिए अधिकारी इन पतों की दोबारा जाँच कराने की तैयारी में हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रक्रिया?
भारत में हर साल बड़ी संख्या में मतदाता पते बदलते हैं, नए मतदाता जुड़ते हैं और पुराने नाम हटाए जाते हैं। ऐसे में, विशेष गहन पुनरीक्षण:
-
चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाता है
-
डुप्लिकेट या गलत प्रविष्टियों को हटाने में मदद करता है
-
लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित करता है
-
भविष्य में होने वाले किसी भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव के लिए सटीक मतदाता सूची तैयार करता है
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में माइग्रेशन और किरायेदारों की अदला-बदली के कारण सूची को अपडेट रखना चुनौतीपूर्ण होता है। डिजिटाइजेशन से यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनती है।
अधिकारियों का दावा: समयसीमा से पहले पूरा होगा काम
उप ज़िला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि टीमों को तेज़ी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं और अधिकांश डेटा एंट्री अंतिम चरण में है।
उनके अनुसार, “डिजिटाइजेशन में तेजी लाई गई है और निर्धारित समय से पहले काम पूरा कर लिया जाएगा।”
मतदाताओं की संख्या: कौन-सा क्षेत्र सबसे बड़ा?
2025 की मतदाता सूची के अनुसार:
-
कुल मतदाता: 21.25 लाख
-
सबसे ज़्यादा मतदाता — गोविंदपुरा (4.01 लाख)
-
सबसे कम — भोपाल दक्षिण-पश्चिम (2.34 लाख)
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि बड़े शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या विविधता और घनत्व अधिक होने से अद्यतन कार्य जटिल होता है।
