जर्मनी–जापान में युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए मध्यप्रदेश का बड़ा कदम: ‘सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड’ मॉडल से पहली बार 600 युवाओं की विदेश में प्लेसमेंट योजना
मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रव्यापी स्तर पर सामाजिक कल्याण में निवेश को नई गति देने के लिए ‘सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड’ (SIB) मॉडल पर आधारित अपना पहला...

मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रव्यापी स्तर पर सामाजिक कल्याण में निवेश को नई गति देने के लिए ‘सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड’ (SIB) मॉडल पर आधारित अपना पहला प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस पायलट परियोजना के तहत पिछड़े वर्गों के 600 युवाओं को जापान और जर्मनी में रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा—और इसका पूरा भुगतान सरकार तभी करेगी, जब लक्ष्य हासिल हो जाएगा।
क्या है सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड? सरकार का भुगतान केवल परिणाम मिलने पर
सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड कोई पारंपरिक बॉन्ड नहीं, बल्कि परिणाम-आधारित अनुबंध है।
इस मॉडल में—
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निजी निवेशक या सामाजिक उद्यम पहले निवेश करते हैं,
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लक्ष्य के अनुसार सामाजिक परिणाम हासिल होते ही सरकार भुगतान करती है,
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लक्ष्य पूरे न होने पर निवेशकों को कोई भुगतान नहीं मिलता।
यह मॉडल उस सोच पर आधारित है कि सामाजिक क्षेत्र में निजी पूंजी और विशेषज्ञता का उपयोग करके सरकार बेहतर परिणाम हासिल कर सके।
मध्यप्रदेश यह मॉडल लागू करने वाला देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
600 युवाओं की विदेश प्लेसमेंट—पहली परियोजना की रूपरेखा
पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार:
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पहली परियोजना में कुल 600 उम्मीदवार चुने जाएंगे—
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300 जापान,
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300 जर्मनी के लिए।
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नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NSDC) को साझेदार बनाया जाएगा।
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चयनित युवाओं को:
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स्किल डेवलपमेंट,
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पर्सनैलिटी डेवलपमेंट,
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संबंधित देशों की भाषा प्रशिक्षण,
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और वीज़ा–डॉक्यूमेंटेशन सहित पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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पूरी प्रक्रिया में लगभग एक वर्ष का समय लगने का अनुमान है।
महत्वपूर्ण यह है कि सरकार निवेशकों या एजेंसी को भुगतान सिर्फ तब करेगी, जब जापान और जर्मनी की दूतावासें लिखित प्रमाण देंगी कि उम्मीदवार वास्तव में वहाँ नियुक्त किए जा चुके हैं।
20 करोड़ से कम लागत, 100 करोड़ का समर्पित बजट
पहला प्रोजेक्ट सरकार को 20 करोड़ रुपये से कम में पूरा होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने SIB मॉडल के लिए 100 करोड़ रुपये का अलग बजट निर्धारित किया है।
काबीना की 18 नवंबर की बैठक में:
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स्कीम के नियमों में संशोधन,
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वित्त विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी,
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और परियोजना कार्यान्वयन विभाग को तकनीकी एजेंसियों के चयन का अधिकार दिया गया।
इसके साथ ही बजट को सामाजिक न्याय विभाग से स्थानांतरित कर वित्त विभाग के अधीन लाया गया, जिससे फंडिंग प्रक्रिया और निगरानी अधिक सुव्यवस्थित हो सके।
सोशल स्टॉक एक्सचेंज से जुड़ा पहला प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट को सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) में सूचीबद्ध एक संस्था के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है।
SSE की अवधारणा को केंद्र सरकार ने 2019–20 के बजट भाषण में पेश किया था, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे SEBI के तहत एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बताया था, जहाँ सामाजिक उद्यम—
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इक्विटी,
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डेट,
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या म्यूचुअल फंड जैसी इकाइयों के माध्यम से
पूंजी जुटा सकें।
मध्यप्रदेश इस मॉडल का उपयोग रोजगार, कौशल विकास और सामाजिक उन्नयन को जोड़कर करने वाला पहला राज्य बन रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?–व्यापक परिप्रेक्ष्य और संभावित प्रभाव
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विदेश में रोजगार के अवसर:
जापान और जर्मनी स्वास्थ्य सेवा, तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्रों में विदेशी प्रशिक्षित युवाओं को बड़े पैमाने पर नियुक्त कर रहे हैं। -
राज्य की बेरोज़गारी चुनौती:
मध्यप्रदेश के युवाओं के लिए वैश्विक नौकरी बाजार तक सीधा पहुंच एक प्रमुख अवसर है। -
परिणाम-आधारित गवर्नेंस का मजबूत मॉडल:
सरकार तब तक भुगतान नहीं करेगी जब तक वास्तविक प्लेसमेंट न हो—यह मॉडल भ्रष्टाचार, प्रक्रिया में देरी और संसाधनों की बर्बादी को कम करता है। -
कौशल विकास उद्योग के लिए नया बाजार:
निजी फर्मों को उच्च गुणवत्ता वाली स्किल ट्रेनिंग देने के लिए प्रतिस्पर्धा मिलेगी।
आगे क्या?
राज्य सरकार 600 उम्मीदवारों के चयन के लिए जल्द ही राज्य-स्तरीय स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू करेगी।
इसके बाद प्रशिक्षण एजेंसी भाषा और कौशल प्रशिक्षण शुरू करेगी।
पूरी परियोजना को स्टेट स्टियरिंग कमेटी मॉनिटर करेगी।
राज्य का लक्ष्य है कि यह पायलट सफल होने पर विदेश रोजगार और कौशल विकास से जुड़ी अन्य परियोजनाएँ भी इसी मॉडल पर लागू की जा सकें।
