54 देशों में 'सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले' संपन्न, भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव प्रदर्शित
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 54 देशों में आयोजित 'सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले' सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जो भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 17 अगस्त 2026
भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के इतिहास में एक अभूतपूर्व अध्याय जुड़ गया है, जब देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में 'सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले' का आयोजन किया गया। यह अपनी तरह का पहला आयोजन था, जिसने समय और भौगोलिक दूरियों की सीमाओं को लांघकर 54 देशों को एक साथ जोड़ा। इस आयोजन के माध्यम से भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और शांति, विकास व अखंडता के संदेश को दुनिया भर में पहुंचाया गया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह 'सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले' भारत की सीमाओं से बाहर आयोजित की गई एक अनूठी पहल थी। फिजी से लेकर अमेरिका तक, विभिन्न टाइम ज़ोन में फैले इन 54 देशों में भारतीय राष्ट्रध्वज ने एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक अपनी यात्रा पूरी की। इस रिले का उद्देश्य दुनिया भर में फैले भारतीय समुदाय और भारत के मित्रों को एक सूत्र में पिरोना था, ताकि वे राष्ट्र के प्रति अपने जुड़ाव को और गहरा कर सकें।
वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक साख का प्रदर्शन
इस अनोखे अभियान का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक साख को मजबूत करना और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना था। विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत इस यात्रा का ताना-बाना बुना गया था। सूर्य की पहली किरण के साथ ही प्रशांत महासागर में स्थित फिजी की राजधानी सुवा से इस रिले का आरंभ हुआ।
इसके बाद, समय की गति के साथ तालमेल बिठाते हुए यह यात्रा न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी देशों और यूरोप से होते हुए आगे बढ़ी। लगभग 19 घंटे की इस निर्बाध यात्रा के दौरान, दुनिया भर के 54 प्रमुख राजनयिक मिशनों ने सिलसिलेवार ढंग से ध्वजारोहण किया। इस ऐतिहासिक रिले का समापन अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित सैन फ्रांसिस्को में भारत के महावाणिज्य दूतावास में हुआ।
भविष्य की वैश्विक कूटनीति का संकेत
तिरंगा रिले की यह गूंज भविष्य में भारत के दूरगामी वैश्विक प्रभाव की ओर इशारा करती है। विभिन्न महाद्वीपों के देशों को एक सूत्र में पिरोने वाली इस यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत की सांस्कृतिक साख आज सीमाओं से परे जाकर 'ग्लोबल साउथ' की एक मजबूत आवाज के रूप में स्थापित हो चुकी है।
यह भव्य प्रदर्शन आने वाले समय में दुनिया भर में रह रहे करोड़ों प्रवासी भारतीयों के मन में अपनी मातृभूमि के प्रति गौरव के भाव को और गहरा करेगा। साथ ही, यह 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने के लिए उन्हें आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर एक नया भावनात्मक संबल प्रदान करेगा।
