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भारत ने ₹52,000 करोड़ के उन्नत सैन्य साजो-सामान के लिए रक्षा सौदों को मंजूरी दी

भारत ने ₹52,000 करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी दी, जिससे सेना की मारक क्षमता और तकनीकी बढ़त बढ़ेगी।

Jul 4
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भारत ने ₹52,000 करोड़ के उन्नत सैन्य साजो-सामान के लिए रक्षा सौदों को मंजूरी दी

मुख्य बिंदु

क्या हुआ: भारत के रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) ने लगभग ₹52,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है।

क्यों महत्वपूर्ण है: यह महत्वपूर्ण निवेश भारत के सशस्त्र बलों की युद्धक तत्परता और तकनीकी बढ़त को काफी हद तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

क्या बदलाव: सेना को ड्रोन, एंटी-टैंक मिसाइल और वायु रक्षा प्रणाली सहित उन्नत हथियार प्रणालियाँ मिलेंगी, जिससे परिचालन क्षमताएं बढ़ेंगी।

कौन प्रभावित: भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना, सभी के शस्त्रागार में महत्वपूर्ण उन्नयन देखे जाएंगे।

सेना के शस्त्रागार को बढ़ावा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने रक्षा खरीद के लिए लगभग ₹52,000 करोड़ के एक बड़े पैकेज को मंजूरी दी है। यह निर्णय भारत की सैन्य शाखाओं की युद्धक क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने वाला है।

भारतीय सेना के लिए, कई महत्वपूर्ण अधिग्रहणों को मंजूरी दी गई है। इनमें आकाश तरंग एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल है, जिसे हवाई खतरों का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अतिरिक्त, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) और मीडियम-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) जमीनी बलों को मजबूत करेंगे।

सेना की क्षमताओं को और बढ़ाने के लिए वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) और टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम भी शामिल होंगे। खरीद में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमताओं से लैस जेट-संचालित कामिकेज़ ड्रोन भी शामिल हैं, जो एक घातक स्ट्राइक विकल्प प्रदान करते हैं।

नौसेना और वायु सेना के उन्नयन

भारतीय नौसेना को भी अपने समुद्री अभियानों को मजबूत करने के लिए नए उपकरण मिलने वाले हैं। स्वीकृतियों में मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइंस (MIGM) और नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) शामिल हैं। MIGM शत्रुतापूर्ण समुद्री गतिविधियों को प्रतिबंधित करने में महत्वपूर्ण होंगे, जबकि NSUAS उन्नत सेंसर तकनीक के माध्यम से बढ़ी हुई निगरानी क्षमताएं प्रदान करेगा। नौसेना इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम भी खरीदेगी, जो उसकी परिचालन दक्षता में योगदान देगा।

भारतीय वायु सेना का आधुनिकीकरण फिक्स्ड-विंग हाई-एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) की नियोजित खरीद के साथ जारी रहेगा। ये उन्नत प्लेटफ़ॉर्म खुफिया, निगरानी, ​​टोही (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग सहित विस्तारित मिशनों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

सामरिक अनिवार्यताएँ

रक्षा मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि ये खरीदियाँ तीनों सेवाओं में परिचालन तत्परता को और मजबूत करने के लक्ष्य के साथ रणनीतिक रूप से संरेखित हैं। आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत रक्षा प्रणालियों की प्रेरण में तेजी लाना एक मुख्य उद्देश्य है।

रक्षा मंत्रालय ने कहा, "अनुमोदन में सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए उन्नत हथियारों और सैन्य प्रणालियों की एक श्रृंखला शामिल है।"

आकाश तरंग प्रणाली का उद्देश्य उभरते ड्रोन खतरों के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान करना है। MPATGM पैदल सेना इकाइयों को दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों का अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए सशक्त बनाएगा, जबकि MRSAM मध्यम दूरी के हवाई हमलों के खिलाफ रक्षा को बढ़ाएगा। V-SHORADS, उन्नत मल्टी-स्पेक्ट्रल सेंसर से लैस, अल्पकालिक वायु रक्षा क्षमताओं में सुधार करेगा। नए कामिकेज़ ड्रोन अधिक घातक और लागत प्रभावी स्ट्राइक समाधान का वादा करते हैं। एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम से युद्ध के मैदान में टैंकों की उत्तरजीविता में काफी सुधार होने की उम्मीद है।

आगे क्या देखें

आने वाले महीनों में इन उन्नत प्रणालियों की प्रेरण के लिए विस्तृत समय-सीमा की उम्मीद है। आगे की घोषणाओं में इन महत्वपूर्ण रक्षा अधिग्रहणों के लिए विशिष्ट निर्माताओं और उत्पादन कार्यक्रम का विवरण दिया जा सकता है।