500 साल पुरानी विरासत सहेजेगा चौधरी परिवार, संगठन को मजबूत करने का संकल्प
इटावा-औरैया के छह घरा चौधरी परिवार ने 500 वर्ष पुरानी विरासत को सहेजने और संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया। एकता, सामाजिक सरोकारों पर गहन विचार-विमर्श।

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 20 जुलाई 2026
इटावा से औरैया तक फैले छह घरा चौधरी परिवार ने अपनी 500 वर्षों की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने और संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया है। 19 जुलाई 2026 को इटावा में आयोजित एक गरिमामय पारिवारिक बैठक में परिवार के सदस्यों ने एकजुटता, सामाजिक सरोकारों और अगली पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने पर गहन विचार-विमर्श किया। इस बैठक में परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को बनाए रखने और संगठनात्मक शक्ति को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।
इस महत्वपूर्ण पारिवारिक सभा के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भिंड से चार बार विधायक रहे चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी थे। उन्होंने परिवार की एकता और सामाजिक उत्तरदायित्वों के निर्वहन के महत्व पर प्रकाश डाला। भारत विकास परिषद के क्षेत्रीय संयोजक और चौधरी कल्याण सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरिनारायण चतुर्वेदी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने परिवार की लंबी परंपराओं और उनके संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
एकता और विरासत के संरक्षण पर विशेष जोर
बैठक में वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि किसी भी परिवार की असली शक्ति उसकी आंतरिक एकता, मजबूत संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति उसकी निष्ठा में निहित होती है। चौधरी परिवार के सदस्यों ने सामूहिक रूप से यह प्रण लिया कि वे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को बनाए रखने और इसकी संगठनात्मक शक्ति को निरंतर बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करते रहेंगे। मुख्य अतिथि चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी की उपस्थिति को परिवार के लिए एक गौरव का क्षण माना गया, और उपस्थित लोगों ने उनके अनुभव और मार्गदर्शन को समाज के लिए नई दिशा प्रदान करने वाला बताया।
कार्यक्रम के संयोजक अरविंद चौधरी, जो भारत विकास परिषद इटावा मित्र शाखा के अध्यक्ष, संस्कार भारती इटावा के पूर्व जिलाध्यक्ष और योग गुरु पतंजलि समिति हरिद्वार से जुड़े हैं, ने सभी अतिथियों और परिवारजनों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने परिवार के ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान में उसकी भूमिका पर भी अपने विचार रखे। वरिष्ठ पत्रकार के.के. चतुर्वेदी और राष्ट्रीय कवि रोहित चौधरी ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का संचालन किया, जिससे बैठक का माहौल जीवंत और प्रेरणादायक बना रहा।
500 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक विरासत पर चर्चा
बैठक में चौधरी परिवार के समृद्ध इतिहास पर भी विस्तार से चर्चा हुई। परिवार के सदस्यों ने बताया कि छह घरा चौधरी परिवार की जड़ें लगभग 500 वर्ष पुरानी हैं। उनकी उपस्थिति जसवंतनगर, करहल, इटावा, बकेवर, ताखा, चकरनगर, महेवा, अजीतमल, भीखेपुर और औरैया जैसे क्षेत्रों तक फैली हुई है। यह दर्शाता है कि परिवार का प्रभाव और प्रसार समय के साथ काफी विस्तृत हुआ है।
परिवारजनों ने अपने पूर्वजों के इतिहास को साझा करते हुए बताया कि वे मूल रूप से राजस्थान के करौली स्टेट स्थित खटनावली गांव से चंबल क्षेत्र की इस पट्टी में आए थे। यहां आने के बाद, उन्होंने वर्षों से अपनी सामाजिक पहचान, विशिष्ट परंपराओं और 'चौधराहट' की गरिमा को सफलतापूर्वक बनाए रखा है। यह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि परिवार को अपनी संस्कृति और मूल्यों के प्रति एक गहरी प्रतिबद्धता प्रदान करती है।
परिवारजनों की सक्रिय सहभागिता
इस ऐतिहासिक पारिवारिक बैठक में औरैया और इटावा क्षेत्र के बड़ी संख्या में परिवार के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। औरैया से उपस्थित प्रमुख सदस्यों में प्रभाष चौधरी, अनिल चौधरी, नीरज चौधरी (मुन्ना), आलोक चौधरी, और तिलक डिग्री कॉलेज औरैया के अजय चतुर्वेदी शामिल थे। इन सदस्यों ने परिवार की एकता और प्रगति में अपने महत्वपूर्ण योगदान का आश्वासन दिया।
इटावा से आए गणमान्य व्यक्तियों में वरिष्ठ समाजसेवी और पूर्व भाजपा जिला महामंत्री रामकुमार त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद शर्मा, अनिल चौधरी (सतोरा, नगला गहलोत), पूर्व प्रधान मुकेश चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षाविद डॉ. सुशील सम्राट, प्रमोद दुबे, पूर्व जिला पंचायत सदस्य बंटी चौधरी, सेक्शन इंजीनियर वैभव चौधरी, तरुण चौधरी, ऋषि त्रिपाठी, और अश्विनी त्रिपाठी जैसे कई प्रतिष्ठित लोग शामिल थे। इन सभी ने बैठक में भाग लेकर परिवार के प्रति अपनी निष्ठा और सहयोग व्यक्त किया।
बैठक के अंत में, सभी उपस्थित परिवारजनों ने एक-दूसरे का अभिनंदन किया और भविष्य में भी सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और परिवार की समृद्धि के लिए मिलकर कार्य करने का दृढ़ संकल्प दोहराया। सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए इस महत्वपूर्ण आयोजन का समापन हुआ, जिसने परिवार को अपनी विरासत को संरक्षित रखने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया।
