सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों ने ली शपथ, कुल संख्या बढ़कर हुई 37; लंबित मामलों को निपटाने में मिलेगी मदद
सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ जजों की संख्या 37 हो गई है, जिससे लंबित मामलों को तेजी से निपटाया जा...

मुख्य हाइलाइट्स (Top Summary)
क्या हुआ: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने सुप्रीम कोर्ट के पांच नए जजों को पद की शपथ दिलाई, जिससे अदालत में कार्यरत जजों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: अदालत की इस बढ़ी हुई क्षमता का उद्देश्य 93,000 से अधिक लंबित मामलों के भारी बैकलॉग को तेजी से निपटाना है।
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा: वरिष्ठ अधिवक्ता वी.एस. मोहना की नियुक्ति से कोर्ट में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। वह बार (वकालत) से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली देश की दूसरी महिला बन गई हैं।
कौन प्रभावित होगा: भारतीय न्यायिक प्रशासन, वकील और देश के वे नागरिक जो शीर्ष अदालत में अपने जटिल मामलों के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
लंबित मामलों को निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का विस्तार
2 जून, 2026 को भारत के सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों को शामिल किया गया, जिसके बाद बेंच में अब केवल एक सीट खाली बची है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने नवनियुक्त जजों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
अदालत का यह महत्वपूर्ण विस्तार केंद्र सरकार के उस फैसले के बाद हुआ है, जिसमें सीजेआई को छोड़कर सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 कर दिया गया था। यह बदलाव 16 मई, 2026 को लागू किए गए सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 के जरिए किया गया है।
वर्तमान में कोर्ट में 93,000 से अधिक मामले लंबित हैं, और इस नए अध्यादेश का उद्देश्य अदालती कार्यवाही में तेजी लाना है। इसके साथ ही, इसका उद्देश्य शीर्ष अदालत को नियमित रूप से विशेष संविधान पीठों (Constitution Benches) का गठन करने में मदद करना भी है।
महिला प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय संतुलन को मिला बढ़ावा
नवनियुक्त जजों में वरिष्ठ अधिवक्ता वी.एस. मोहना का नाम शामिल है, जिनकी नियुक्ति न्यायिक इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर है। वह वर्तमान बेंच में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के बाद दूसरी महिला जज बन गई हैं।
इसके साथ ही, जस्टिस मोहना सीधे बार (वकालत) से सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली देश की दूसरी महिला बनी हैं। इससे पहले साल 2018 में जस्टिस इन्दु मल्होत्रा सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में नियुक्त होने वाली पहली महिला बनी थीं।
ये नियुक्तियां सीजेआई सूर्य कांत की अगुवाई वाले कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों के पहले दौर का हिस्सा हैं। इस कॉलेजियम में जस्टिस विक्रम नाथ, जे.के. माहेश्वरी, बी.वी. नागरत्ना और एम.एम. सुंदरेश शामिल थे। कॉलेजियम ने 27 मई को इन नामों की सिफारिश की थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने 1 जून को इसकी अधिसूचना जारी की।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भारत की राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) से विचार-विमर्श के बाद संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत इन जजों की नियुक्ति की है।
ये हैं सुप्रीम कोर्ट के 5 नए न्यायाधीश
नवनियुक्त जज अपने साथ लंबा और विविध न्यायिक अनुभव लेकर आए हैं:
- जस्टिस शील नागू: सुप्रीम कोर्ट आने से पहले वह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। उन्होंने 2011 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अपने न्यायिक करियर की शुरुआत की थी और 2024 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने थे।
- जस्टिस श्री चंद्रशेखर: वे इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। साल 2013 में उन्हें झारखंड हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया था, जहां वे बाद में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी रहे। पिछले साल उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का कार्यभार संभाला था।
- जस्टिस संजीव सचदेवा: वे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवा दे रहे थे। साल 2013 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में नियुक्त किया गया था और उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट दोनों में वकालत का मजबूत अनुभव हासिल किया है।
- जस्टिस अरुण पल्ली: वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने 1988 में अपनी वकालत शुरू की, 2007 में वरिष्ठ अधिवक्ता बने और 2013 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त हुए।
- वी.एस. मोहना (वरिष्ठ अधिवक्ता): उन्होंने 1988 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, कोयंबटूर से कानून की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने जस्टिस इन्दु मल्होत्रा और वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन के अधीन काम किया और साल 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया।
आगे क्या होने वाला है
नए जजों के शामिल होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट को इस साल होने वाले कई रिटायरमेंट के लिए तैयार रहना होगा। जस्टिस पंकज मिथल 6 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, उनके बाद जस्टिस जे.के. माहेश्वरी 28 जून को, जस्टिस संजय करोल 28 अगस्त को और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा 29 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे।
ये समय पर की गई नियुक्तियां सीजेआई कांत के कार्यकाल के दौरान बेंच की संख्या को स्थिर रखने में मदद करेंगी, जिनका कार्यकाल फरवरी 2027 में उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति तक रहेगा।
