4500 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण पर रोक की मांग, सीएम को पत्र
फर्रुखाबाद में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के लिए 4,500 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की अपील की है।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 12 अगस्त 2026
फर्रुखाबाद जिले में प्रस्तावित एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक गलियारा परियोजना के लिए लगभग 4,500 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का मुद्दा अब मुख्यमंत्री के जनता दरबार तक पहुंच गया है। किसान नेताओं और अधिवक्ताओं ने परियोजना पर पुनर्विचार करने और बहुफसली, सिंचित व उपजाऊ भूमि को अधिग्रहण से बचाने की पुरजोर मांग की है।
इस संबंध में किसान नेता एवं अधिवक्ता अशोक कटियार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र सौंपकर परियोजना के लिए चिह्नित क्षेत्र में शामिल बड़ी मात्रा में कृषि भूमि, बाग-बगीचों और किसानों की आजीविका के प्रमुख आधार को बचाने की अपील की है। पत्र में कहा गया है कि यह भूमि न केवल किसानों के लिए बल्कि खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। औद्योगिक विकास की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, कटियार ने सुझाव दिया है कि इसके लिए अत्यधिक उपजाऊ भूमि के बजाय वैकल्पिक, कम उपजाऊ या बंजर भूमि का चयन किया जाना चाहिए।
प्रस्तावित परियोजना का दायरा और किसानों की चिंता
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे में कायमगंज तहसील क्षेत्र के असगरपुर, नगला नान, अमिलैया आशानंद, बैरमपुर, चिलसरा, बचलैया सहित एक दर्जन से अधिक गांवों की भूमि शामिल है। इन ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कृषि कार्य किया जाता है और भूमि अधिग्रहण की संभावनाओं ने किसानों के बीच अपनी जमीन और आजीविका को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।
अशोक कटियार ने अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि परियोजना के लिए असिंचित, बंजर, अनुपजाऊ अथवा कम उपजाऊ भूमि को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित किया जाना चाहिए। इससे औद्योगिक विकास की योजना को आगे बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की कीमती उपजाऊ जमीन को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
भूमि अधिग्रहण कानून के अनुपालन की मांग
किसान नेता ने अपने पत्र में भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग भी उठाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों के वैधानिक अधिकारों, उचित प्रतिकर, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन से जुड़े सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए और किसी भी तरह की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
इसके अतिरिक्त, बहुफसली और उपजाऊ भूमि को चिह्नित किए जाने के मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा किसानों को अनावश्यक मानसिक परेशानी से बचाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने का भी अनुरोध किया गया है।
संतुलित औद्योगिक विकास की वकालत
अशोक कटियार ने फर्रुखाबाद की आलू उत्पादन में प्रदेश में महत्वपूर्ण स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कृषि भूमि को सुरक्षित रखते हुए औद्योगिक विकास की योजना तैयार की जाए, तो किसानों की आजीविका और जिले के औद्योगिक विकास, दोनों के हितों में एक स्वस्थ संतुलन स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जनहित, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए प्रस्तावित औद्योगिक गलियारा परियोजना पर पुनर्विचार कर एक सकारात्मक और दूरगामी निर्णय लेने की अपील की है।
