मुख्य सचिव बनकर 4.45 करोड़ की स्वीकृति दिलाने का प्रयास – भोपाल के युवक सहित तीन गिरफ्तार
मध्य प्रदेश में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। भोपाल के एक युवक ने खुद को राज्य का मुख्य सचिव बताकर सिंगरौली कलेक्टर पर...

मध्य प्रदेश में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। भोपाल के एक युवक ने खुद को राज्य का मुख्य सचिव बताकर सिंगरौली कलेक्टर पर ₹4.45 करोड़ के स्कूल विद्युतीकरण प्रस्ताव को मंजूरी देने का दबाव बनाया। ट्रूकॉलर पर कॉलर आईडी में ‘Chief Secretary, MP’ दिखने से शक गहराया, जिसके बाद कलेक्टर ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जांच में फर्जीवाड़े का पूरा जाल खुल गया।
कॉलर ने बनाया कलेक्टर को निशाना
घटना 25 अक्टूबर की है। सिंगरौली कलेक्टर गौरव बेनल को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को “मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश” बताया। उसने दावा किया कि जिले के 93 स्कूलों में आंतरिक विद्युतीकरण कार्य के लिए ₹4.45 करोड़ की योजना लंबित है और इसे शीघ्र स्वीकृत किया जाए। कलेक्टर को कॉलर की बातचीत पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी।
भोपाल से पकड़ा गया मास्टरमाइंड
जांच में कॉल का स्रोत भोपाल निकला। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सचिन मिश्रा (24) को गिरफ्तार किया। वह कंप्यूटर साइंस में स्नातक है और तकनीकी रूप से दक्ष बताया जा रहा है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि सचिन के साथ उसके पिता बी. पी. मिश्रा और सहयोगी सचिंद्र तिवारी भी इस साजिश में शामिल थे।
पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की, जिसमें पता चला कि उन्होंने रूरल इंजीनियरिंग सर्विसेज, सिंगरौली के कार्यपालन यंत्री के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे, ताकि प्रस्ताव को वैध दिखाया जा सके।
93 स्कूलों में कार्य स्वीकृत कराने की थी साजिश
आरोपियों की योजना तीन जनपद पंचायत क्षेत्रों — बैढन, देवसर और चित्रांगी — में 93 सरकारी स्कूलों के आंतरिक विद्युतीकरण कार्य की मंजूरी दिलाने की थी। इसके लिए उन्होंने कुल ₹4.45 करोड़ की लागत का प्रस्ताव तैयार किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी इस प्रस्ताव के जरिए सरकारी धन की अवैध मंजूरी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे थे।
पुलिस ने किया फर्जीवाड़ा बेनकाब
सिंगरौली के वैढन थाने में आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह साइबर और दस्तावेजी फर्जीवाड़े का संयुक्त मामला है, जिसमें आरोपी डिजिटल टूल्स का उपयोग कर प्रशासनिक अधिकारियों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे थे।
सिंगरौली एसपी ने कहा कि “कलेक्टर की सतर्कता से एक बड़ी धोखाधड़ी टल गई। ऐसे मामलों में सरकारी अधिकारियों को कॉल और दस्तावेज की सत्यता की जांच अवश्य करनी चाहिए।”
डिजिटल युग में नई चुनौतियाँ
यह मामला दिखाता है कि तकनीकी साधनों जैसे Truecaller ID spoofing और डिजिटल फर्जीवाड़े के जरिए अपराधी प्रशासनिक प्रणाली को भी निशाना बना रहे हैं। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के मामले सरकारी संचार प्रणाली की सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता दर्शाते हैं।
