मध्य प्रदेश में मतदाता सूची का बड़ा पुनरीक्षण: 44 दिन की कवायद के बाद 41.8 लाख नाम हटने के संकेत
मध्य प्रदेश में मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए कराए गए 44 दिन के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) के बाद...

मध्य प्रदेश में मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए कराए गए 44 दिन के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में करीब 41.8 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना है। यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 7.2 प्रतिशत है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, ड्राफ्ट सूची इस महीने के अंत तक प्रकाशित की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 4 नवंबर से 18 दिसंबर तक चले इस अभियान में राज्य के 5.74 करोड़ से अधिक मतदाताओं का सत्यापन किया गया। करीब 65,000 बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने शहरों, कस्बों और गांवों में घर-घर जाकर मतदाता विवरण की जांच की। आयोग ने समय-सीमा बढ़ाकर अधिकारियों को डेटा की गहन जांच का अवसर दिया।
CEO कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यह अभ्यास इसलिए अहम था क्योंकि राज्य में पिछले दो दशकों में तेज शहरीकरण, बड़े पैमाने पर पलायन और जनसांख्यिकीय बदलाव देखे गए हैं।
किन कारणों से हट सकते हैं नाम
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, जिन 41.8 लाख नामों को हटाने के लिए चिन्हित किया गया है, उनमें—
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8.4 लाख मतदाता मृत पाए गए,
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8.4 लाख मतदाता घर पर अनुपस्थित मिले,
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22.5 लाख मतदाता अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं,
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और 2.5 लाख मतदाता एक से अधिक पते पर पंजीकृत पाए गए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे, जिनकी स्थिति बार-बार सत्यापन के बाद भी स्पष्ट रूप से अपात्र पाई गई।
शहरों में सबसे ज्यादा असर
ड्राफ्ट सूची में शहरी क्षेत्रों में नाम कटने का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक है।
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भोपाल: 21.25 लाख मतदाताओं में से करीब 4.3 लाख (20.23%) नाम हटने की आशंका।
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इंदौर: 28.67 लाख में से 4.4 लाख (15.34%) नाम चिन्हित।
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ग्वालियर: 16.49 लाख में से 2.5 लाख (15.16%)।
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जबलपुर: 19.25 लाख में से 2.4 लाख (12.46%)।
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े शहरों में नौकरी, शिक्षा और व्यवसाय के कारण तेज पलायन इसकी प्रमुख वजह है।
9 लाख मतदाताओं को नोटिस
इस प्रक्रिया में लगभग 9 लाख ऐसे मतदाता भी सामने आए, जिनका विवरण 2003 में हुए पिछले SIR के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। इनके नाम ड्राफ्ट सूची में बने रहेंगे, लेकिन निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी उन्हें नोटिस जारी करेंगे। इन मतदाताओं को निर्वाचन आयोग द्वारा तय 11 में से किसी एक वैध दस्तावेज को प्रस्तुत करना होगा। ऐसा न करने पर फरवरी में प्रकाशित होने वाली अंतिम सूची से उनके नाम हट सकते हैं।
पारदर्शिता और अधिकारों पर जोर
CEO कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि राज्य में 99.6 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त और डिजिटाइज किए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य किसी भी पात्र मतदाता को बाहर करना नहीं, बल्कि फर्जी, दोहरे और गलत नामों को हटाकर सूची को विश्वसनीय बनाना है।
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद नागरिकों को दावा और आपत्ति दर्ज करने का पूरा अवसर मिलेगा।
क्यों है यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ मतदाता सूची न केवल निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है, बल्कि इससे चुनावी सुरक्षा, संसाधनों की बेहतर योजना और लोकतांत्रिक भरोसा भी मजबूत होता है। लंबे समय बाद हुए इस गहन पुनरीक्षण ने राज्य में बदलते जनसांख्यिकीय रुझानों को भी उजागर किया है।
