40 के बाद थायरॉइड और पेरिमेनोपॉज़ के लक्षण: भ्रम से बचें
40 वर्ष के बाद महिलाओं में थायरॉइड और पेरिमेनोपॉज़ के लक्षण समान हो सकते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। दोनों के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है।

द क्लिफ न्यूज़ | 22 अगस्त 2026
महिलाओं में 40 वर्ष की आयु पार करने के बाद शरीर में कई महत्वपूर्ण हार्मोनल बदलावों का दौर शुरू हो जाता है। इस दौरान पेरिमेनोपॉज़, जो रजोनिवृत्ति से पहले का संक्रमणकाल है, अत्यंत सामान्य है। हालांकि, इसी उम्र के आसपास थायरॉइड संबंधी विकार भी उत्पन्न हो सकते हैं। दोनों ही स्थितियों के कई लक्षण आपस में मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण कई बार भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है और लक्षणों को गलत समझा जा सकता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, थायरॉइड विकार मुख्य रूप से थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन में कमी (हाइपोथायरायडिज्म) या अधिकता (हाइपरथायरायडिज्म) से संबंधित होते हैं। ये थायरॉइड हार्मोन शरीर की लगभग हर कोशिका और अंग के कार्य को प्रभावित करते हैं, चयापचय दर, हृदय गति, शरीर के तापमान और पाचन को नियंत्रित करते हैं। वहीं, पेरिमेनोपॉज़ की स्थिति महिला हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में अनियमित उतार-चढ़ाव के कारण उत्पन्न होती है, जिसमें एस्ट्रोजन का स्तर अक्सर घटता है।
लक्षणों में समानता और भिन्नता
थायरॉइड रोग किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन पेरिमेनोपॉज़ आमतौर पर 40 से 55 वर्ष की आयु के बीच शुरू होता है। दोनों ही स्थितियों के सामान्य लक्षणों में थकान, नींद की समस्या, मूड में बदलाव, चिंता, वजन में परिवर्तन और मासिक धर्म की अनियमितता शामिल हो सकती है। ये समानताएं अक्सर सटीक निदान को जटिल बना देती हैं।
हाइपरथायरायडिज्म के विशिष्ट लक्षणों में बिना कारण वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना, गर्मी अधिक लगना, घबराहट, चिंता और हाथों में कंपन शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर, हाइपोथायरायडिज्म में अक्सर वजन बढ़ना, कब्ज, ठंड लगना, त्वचा का सूखापन और ऊर्जा की कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। पेरिमेनोपॉज़ में अनियमित मासिक धर्म चक्र, हॉट फ्लैशेस (अचानक गर्मी लगना), रात को पसीना आना, योनि का सूखापन और मूड स्विंग्स मुख्य लक्षण होते हैं।
महिलाओं में थायरॉइड की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक आम है, और अनुमान है कि लगभग 8 में से 1 महिला को अपने जीवनकाल में थायरॉइड संबंधी कोई न कोई विकार होता है। इन दोनों हार्मोनल बदलावों के बीच अंतर को समझना और सही समय पर चिकित्सा सहायता लेना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि लक्षणों को गलत तरीके से न समझा जाए और उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
