35 के बाद महिलाओं का हेल्दी एजिंग प्लान: हड्डियों-जोड़ों की सुरक्षा और मांसपेशियों का मजबूती
35 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों को देखते हुए, हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए सक्रिय जीवनशैली, संतुलित आहार और स्वस्थ वजन बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

द क्लिफ न्यूज़ | 9 सितंबर 2026
महिलाओं में 35 वर्ष की आयु के बाद शरीर में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने लगते हैं, जिनका सीधा असर उनकी हड्डियों, जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर के वजन पर पड़ सकता है। इन परिवर्तनों के मद्देनजर, भविष्य में हड्डियों की कमजोरी, मांसपेशियों की कमी और जोड़ों से संबंधित समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए इस उम्र से ही एक सक्रिय जीवनशैली अपनाना, पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन डी और कैल्शियम युक्त आहार लेना तथा स्वस्थ वजन बनाए रखना आवश्यक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 'हेल्दी एजिंग' की तैयारी बुढ़ापे का इंतजार करने के बजाय, सक्रिय रूप से समय रहते ही शुरू कर देनी चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वयस्कों को प्रति सप्ताह कम से कम 150 से 300 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि या 75 से 150 मिनट की उच्च तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसके साथ ही, सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायामों को शामिल करना चाहिए। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत को कम करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सक्रिय जीवनशैली और व्यायाम का महत्व
एक सुनियोजित व्यायाम योजना को अपनाकर महिलाएं अपनी हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बना सकती हैं। सप्ताह की शुरुआत 30 से 40 मिनट की तेज सैर और 15 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से की जा सकती है। अगले दिन, कोर, कूल्हे और ग्लूटियल मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायामों के साथ स्ट्रेचिंग को शामिल किया जा सकता है। सप्ताह के मध्य में तेज गति से चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी गतिविधियां की जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त, पैरों, पीठ और हाथों के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी महत्वपूर्ण है। सप्ताह के अंत में, स्ट्रेंथ, संतुलन और अपनी पसंदीदा मनोरंजक गतिविधियों के लिए समय निकाला जा सकता है, जबकि एक दिन हल्की सैर, स्ट्रेचिंग या रिकवरी के लिए रखा जा सकता है।
हालांकि, रोजाना कदमों की एक निश्चित संख्या सभी महिलाओं के लिए समान रूप से लागू नहीं होती। गतिविधि का स्तर प्रत्येक महिला की फिटनेस, आयु, जोड़ों की स्थिति और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों के आधार पर तय होना चाहिए। यदि किसी दर्द या चिकित्सीय समस्या के कारण गतिविधि सीमित हो जाती है, तो शरीर पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना चाहिए और किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे बेहतर होता है।
जोड़ों की मजबूती के लिए विशेष व्यायाम
विशेष रूप से घुटनों और कूल्हों की मजबूती के लिए क्वाड्रिसेप्स और ग्लूटियल मांसपेशियों को मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए सप्ताह में दो से तीन बार सिट-टू-स्टैंड, मिनी-स्क्वाट, स्टेप-अप, ग्लूट ब्रिज, करवट लेकर हिप एब्डक्शन और काफ रेज जैसे व्यायाम किए जा सकते हैं। इसके साथ ही, हैमस्ट्रिंग और क्वाड्रिसेप्स की स्ट्रेचिंग से जोड़ों की गतिशीलता (मोबिलिटी) बनाए रखने में मदद मिलती है। इन अभ्यासों का मुख्य उद्देश्य घुटनों पर पड़ने वाले भार को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि मांसपेशियों को मजबूत बनाकर जोड़ों की कार्यक्षमता, स्थिरता और शरीर के समग्र संतुलन को बेहतर बनाना है।
कमर दर्द से बचाव और प्रबंधन
निचली कमर के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए कोर की सहनशक्ति और कूल्हे की मांसपेशियों की मजबूती पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। बर्ड-डॉग, डेड-बग, मॉडिफाइड प्लैंक, साइड प्लैंक, ग्लूट ब्रिज और हिप-हिंज प्रैक्टिस जैसी कसरतों को नियमित दिनचर्या में शामिल किया जाना चाहिए। हिप-फ्लेक्सर स्ट्रेचिंग और हैमस्ट्रिंग मोबिलिटी को बढ़ाना भी लाभकारी होता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि लगातार बने रहने वाले कमर दर्द की स्थिति में पूरी तरह निष्क्रिय हो जाने के बजाय, उचित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ वजन बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि, गंभीर या असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन करवाना आवश्यक है।
चोटों से बचाव के लिए वार्म-अप का महत्व
किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि, जैसे दौड़ना, खेलकूद या कठिन व्यायाम शुरू करने से पहले 5 से 10 मिनट का वार्म-अप करना अनिवार्य है। इसमें हल्की सैर, डायनामिक लेग स्विंग्स, हिप सर्कल्स, टखने की गतिशीलता (एंकल मोबिलिटी) और मिनी-स्क्वाट्स जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। ये शरीर को गतिविधि के लिए तैयार करती हैं और चोट के जोखिम को कम करती हैं। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद अचानक तेज दौड़ना, कूदना या भारी वजन उठाना मांसपेशियों में खिंचाव या अन्य चोटों का कारण बन सकता है। इसलिए, व्यायाम की तीव्रता को धीरे-धीरे बढ़ाना एक सुरक्षित तरीका है।
संतुलित आहार: हड्डियों और मांसपेशियों का पोषण
हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में आहार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक सरल 'प्लेट मॉडल' का पालन किया जा सकता है, जिसमें आधी प्लेट सब्जियां और सलाद, एक-चौथाई प्लेट प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ और शेष एक-चौथाई प्लेट में साबुत अनाज, मिलेट, रोटी या चावल शामिल हों। इसके अतिरिक्त, फलों का सेवन और उपयुक्त डेयरी उत्पाद या उनके विकल्प को भी आहार में शामिल किया जाना चाहिए। एक स्वस्थ और सक्रिय वयस्क के लिए, सामान्यतः प्रतिदिन शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम लगभग 1.0 से 1.2 ग्राम प्रोटीन का लक्ष्य रखना उपयोगी हो सकता है। दालें, चने, राजमा, सोया, टोफू, पनीर, दही, दूध, अंडे, मछली, चिकन, मेवे और बीज प्रोटीन के उत्कृष्ट स्रोत हैं। हालांकि, किडनी की गंभीर बीमारी जैसी विशेष स्वास्थ्य स्थितियों में प्रोटीन की मात्रा का निर्धारण किसी डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह से ही किया जाना चाहिए।
40 के बाद मांसपेशियों का संरक्षण
40 वर्ष की आयु के बाद मांसपेशियों को बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि मजबूत मांसपेशियां शरीर के संतुलन, गतिशीलता और जोड़ों की स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इस प्रकार, 35 वर्ष की आयु के बाद ही 'हेल्दी एजिंग' की तैयारी शुरू करना एक समझदारी भरा कदम है। मजबूत हड्डियां और स्वस्थ जोड़ केवल दवाओं के सहारे नहीं, बल्कि नियमित शारीरिक गतिविधियों, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त प्रोटीन युक्त संतुलित पोषण और स्वस्थ वजन के एक सुनियोजित संयोजन से ही सुरक्षित रखे जा सकते हैं।
