महिला आरक्षण विधेयक पेश: परिसीमन चिंताओं के बीच संसद में 33% आरक्षण पर बहस
केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश किया है, जिसका उद्देश्य विधायिकाओं में 33% महिला आरक्षण है। परिसीमन विधेयक भी पेश किया गया है।

मुख्य बातें
क्या हुआ: केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश किया, जिसमें विधानमंडलों में 33% महिला आरक्षण और एक परिसीमन विधेयक शामिल है।
महत्व क्यों: इससे संसद और राज्य विधानसभाओं की संरचना में मौलिक बदलाव हो सकता है, जिससे राजनीति में महिलाओं को सशक्त बनाया जा सकता है।
लोगों के लिए क्या बदलाव: यदि पारित हो जाता है, तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, संभवतः 2027 की जनगणना परिसीमन के बाद।
कौन प्रभावित: पूरे भारत की महिलाएं, राजनीतिक दल और अलग-अलग जनसंख्या वृद्धि दर वाले राज्य प्रभावित होंगे।
विपक्ष के बीच ऐतिहासिक विधेयक पेश
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, आधिकारिक तौर पर महिला आरक्षण विधेयक, का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक 2026 पेश किया।
गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने संवैधानिक ढांचे को बदलने का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध जताया। लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष को पूरी बहस के दौरान आपत्तियां पेश करने के लिए पर्याप्त समय का आश्वासन दिया।
महिला आरक्षण विधेयक का विवरण
प्रस्तावित परिवर्तनों से लोकसभा में वर्तमान 543 सीटों से बढ़कर लगभग 850 सीटें हो सकती हैं। लगभग 283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
यह कोटा 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास के बाद प्रभावी होगा, जिससे इसका कार्यान्वयन 2034 तक विलंबित हो सकता है।
परिसीमन दुविधा
परिसीमन में प्रत्येक जनगणना के बाद संविधान के अनुच्छेद 82 द्वारा अनिवार्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से बनाना शामिल है। सरकार का लक्ष्य प्रति राज्य सीटों के अनुपात को बदले बिना 2029 के आम चुनावों में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना है।
एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश करेंगे।
विपक्ष की चिंताएं और उत्तर-दक्षिण विभाजन
विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन करता है लेकिन 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले इसे परिसीमन से जोड़ने का विरोध करता है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा:
लोकसभा में तीन विधेयक लाए जा रहे हैं। पैकेजिंग और मार्केटिंग महिला आरक्षण है, लेकिन बुनियादी बातें परिसीमन से जुड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि "इन विधेयकों का असली इरादा शरारती, उनकी सामग्री भ्रामक और उनका नुकसान बहुत बड़ा है।" विपक्ष मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में से एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित करने की मांग करता है, जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए कोटा हो। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने परिसीमन विधेयक का विरोध करते हुए दक्षिणी राज्यों के लिए कम प्रतिनिधित्व की आशंका जताई।
सरकार का रुख और नंबर गेम
सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक संतुलित है और हर राज्य और समुदाय की चिंताओं को दूर करता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा:
लेकिन 33% आरक्षण देने के बाद इतिहास रचा जाएगा। भारत पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल कायम करेगा कि हम महिलाओं के लिए कितना बड़ा कदम उठा रहे हैं, और इसका कोई विरोध नहीं होना चाहिए।
उन्होंने परिसीमन से किसी भी क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की अफवाहों को भी खारिज कर दिया। संवैधानिक संशोधन विधेयकों के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। लोकसभा में यह 360 वोट है। एनडीए के पास 293 हैं। राज्यसभा में जादुई आंकड़ा 163 है, जबकि एनडीए के पास 142 से अधिक सदस्य हैं। रिजिजू का कहना है कि सैद्धांतिक रूप से महिला आरक्षण के लिए व्यापक समर्थन है।
आगे क्या देखना है
संसदीय बहस जारी रहेगी, जिसमें परिसीमन विधेयक की बारीकियों और विभिन्न राज्यों पर इसके संभावित प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सरकार दोनों सदनों में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश करेगी।
