दो साल में 29,000 प्रोफेशनल्स का पलायन: पाकिस्तान में ‘ब्रेन ड्रेन’ ने खोली सत्ता के दावों की पोल
इस्लामाबाद:पाकिस्तान इस समय गंभीर ‘टैलेंट एक्सोडस’ के दौर से गुजर रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते दो वर्षों में लगभग 29,000 डॉक्टर, इंजीनियर और...

इस्लामाबाद:
पाकिस्तान इस समय गंभीर ‘टैलेंट एक्सोडस’ के दौर से गुजर रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते दो वर्षों में लगभग 29,000 डॉक्टर, इंजीनियर और अकाउंटेंट देश छोड़ चुके हैं। बिगड़ती अर्थव्यवस्था, राजनीतिक अनिश्चितता और सीमित अवसरों के बीच पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स का यह पलायन अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता प्रतिष्ठान की नीतियों और बयानों पर तीखी बहस का कारण बन गया है।
सरकारी रिपोर्ट ने दिखाई असली तस्वीर
पाकिस्तान के ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन एंड ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट (BEOE) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 महीनों में करीब
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5,000 डॉक्टर,
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11,000 इंजीनियर, और
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13,000 अकाउंटेंट
देश छोड़कर विदेशों में काम करने चले गए।
रिपोर्ट बताती है कि पलायन अब केवल श्रमिक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि व्हाइट-कॉलर और हाई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स भी बड़ी संख्या में पाकिस्तान छोड़ रहे हैं।
‘ब्रेन गेन’ बनाम हकीकत
इन आंकड़ों ने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के हालिया बयान को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अगस्त में अमेरिका में पाकिस्तानी प्रवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्किल्ड प्रोफेशनल्स के विदेश जाने को ‘ब्रेन ड्रेन’ नहीं, बल्कि ‘ब्रेन गेन’ बताया था।
अब सरकारी डेटा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हीं के बयान को लेकर तीखी आलोचना और व्यंग्य देखने को मिल रहा है।
राजनीति, इंटरनेट और अर्थव्यवस्था का जुड़ाव
पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने इस रिपोर्ट को साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जब तक राजनीति ठीक नहीं होगी, अर्थव्यवस्था भी पटरी पर नहीं आएगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान दुनिया के बड़े फ्रीलांसिंग हब्स में से एक है, लेकिन बार-बार इंटरनेट शटडाउन के कारण देश को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और लाखों फ्रीलांस नौकरियां जोखिम में हैं।
मेडिकल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित
विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे गंभीर असर पाकिस्तान के हेल्थकेयर सिस्टम पर पड़ा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2011 से 2024 के बीच नर्सों के पलायन में 2,000% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। डॉक्टरों और नर्सों के बाहर जाने से पहले से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों पर दबाव और बढ़ गया है।
सरकार की सख्ती, लेकिन समाधान नहीं
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहबाज शरीफ सरकार ने एयरपोर्ट्स पर निगरानी कड़ी कर दी है। 2025 में अब तक 66,000 से अधिक यात्रियों को विदेश जाने से रोका गया, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है।
इसके अलावा, खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रों से अवैध प्रवास और भीख मांगने के मामलों में पाकिस्तानियों के डिपोर्ट होने की घटनाएं भी बढ़ी हैं। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने अधूरे दस्तावेजों वाले यात्रियों और तथाकथित ‘पेशेवर भिखारियों’ के विदेश जाने पर रोक की घोषणा की है।
सोशल मीडिया पर सरकार और सेना प्रमुख निशाने पर
इन घटनाक्रमों के बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स ने सेना प्रमुख के ‘ब्रेन गेन’ वाले बयान को लेकर तीखे तंज कसे हैं। कुछ यूजर्स ने कहा कि जिस देश में रिसर्च फंडिंग, इंडस्ट्री और नौकरियों का अभाव हो, वहां प्रतिभा को रोका नहीं जा सकता।
पीटीआई समर्थकों और स्वतंत्र विश्लेषकों का कहना है कि एयरपोर्ट पर सख्ती से नहीं, बल्कि स्थिर राजनीति, सुरक्षित माहौल और पेशेवर अवसरों से ही ब्रेन ड्रेन को रोका जा सकता है।
क्यों अहम है यह मुद्दा
विश्लेषकों के अनुसार, बड़े पैमाने पर प्रतिभा पलायन पाकिस्तान की दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक स्थिरता के लिए खतरा है। हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और फाइनेंस जैसे सेक्टर्स में स्किल्ड मैनपावर की कमी देश के विकास को और धीमा कर सकती है। साथ ही, सत्ता के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ता अंतर जनता के भरोसे को कमजोर करता जा रहा है।
