दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच के बीच अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कसता गया; 25 साल पुराने भोपाल ठगी मामले में VC के भाई हमूद सिद्दीकी की तलाश दोबारा तेज
फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े विवादों में नया मोड़ सामने आया है। दिल्ली के 10/11 कार बम धमाके की बहु-एजेंसी जांच के दौरान पुलिस...

फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े विवादों में नया मोड़ सामने आया है। दिल्ली के 10/11 कार बम धमाके की बहु-एजेंसी जांच के दौरान पुलिस को पता चला है कि यूनिवर्सिटी के कुलपति जवाद अहमद सिद्दीकी के भाई — हमूद अहमद सिद्दीकी — न सिर्फ महू और इंदौर में दर्ज धोखाधड़ी मामलों में वांछित थे, बल्कि भोपाल पुलिस 1999 के एक बड़े निवेश घोटाले में भी उनकी तलाश कर रही है। उन पर 5,000 रुपये का इनाम और स्थायी गिरफ्तारी वारंट लंबित है।
25 साल पुराना निवेश घोटाला: भोपाल में भी था मामला दर्ज
शाहजहानाबाद पुलिस ने 1999 में उस समय FIR दर्ज की थी, जब हमूद और उसके साथी लोगों को तय समय में निवेश राशि दोगुनी करने का लालच देकर पैसे ले उड़े थे।
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शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की
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हमूद कुछ ही समय में भोपाल से फरार हो गया
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अदालत ने उसके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वह पिछले दो दशक से अधिक समय से फरार था और उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही थी।
महू–इंदौर निवेश घोटाला: फर्जी बैंक खोलकर सैकड़ों लोगों से ठगी
इंदौर पुलिस ने रविवार को हमूद को हैदराबाद से गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि:
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उसने महू क्षेत्र में एक फर्जी निजी बैंक खोला
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सैकड़ों लोगों से जमा राशि लेकर “पैसा दोगुना” करने का झांसा दिया
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घोटाला उजागर होते ही वह परिवार सहित फरार हो गया
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लगभग 25 साल तक पुलिस से बचता रहा
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हैदराबाद में वह नई पहचान के साथ काम कर रहा था
इंदौर पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद भोपाल पुलिस को पुराने मामलों की जानकारी भेज दी है।
तालैया थाने में भी दर्ज है दूसरा मामला
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि सिद्दीकी भाइयों पर 2001 में तालैया थाने में भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था।
तालैया पुलिस अब पुराने केस फाइल और रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि आगे की कार्रवाई का खाका तैयार किया जा सके।
ED की कार्रवाई: भाई जवाद भी गिरफ्तार
हमूद का मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि उसका भाई, अल-फलाह यूनिवर्सिटी के VC जवाद अहमद सिद्दीकी, पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्त में है।
जवाद के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है, जिससे विश्वविद्यालय की गतिविधियां पहले से ही निगरानी में थीं।
पूरी जांच को दिल्ली ब्लास्ट मामले से जोड़कर देखा जा रहा है?
दिल्ली कार बम मामले में मुख्य आरोपी के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से करीबी संबंध सामने आने के बाद
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विश्वविद्यालय
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उससे जुड़े व्यक्तियों
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और पुराने वित्तीय लेनदेन
सब कुछ विभिन्न एजेंसियों की जांच के दायरे में आ चुका है।
हालाँकि पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने स्पष्ट किया:
“भोपाल का पुराना ठगी मामला हालिया मामलों से सीधे जुड़ा नहीं है। यह 25 साल पुराना आर्थिक अपराध है। हमूद इस समय जेल में है।”
शाहजहानाबाद पुलिस क्या कहती है?
ACP अनिल बाजपेई के अनुसार:
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1999 में FIR हुई थी
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2000 में चार्जशीट अदालत में पेश हुई
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हमूद इस केस में वांछित है
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उस पर ₹5,000 का इनाम घोषित है
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“शाहजहानाबाद पुलिस उसकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी”
आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
कानून विशेषज्ञों की राय: क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इतने वर्षों बाद पुराने आर्थिक अपराधों का खुलना बताता है कि:
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फरार आरोपी आखिरकार पकड़े जा सकते हैं
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अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय मजबूत हुआ है
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संदिग्ध संगठनों पर निगरानी बढ़ने से पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं
इससे यह भी संकेत मिलता है कि दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच के चलते संदिग्ध नेटवर्क की विस्तृत समीक्षा हो रही है।
